शताब्दी में पहली बार चतुर्योग में रक्षाबंधन, जानें राखी बांधने का समय

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सोमवार व पूर्णिमा का योग भगवान महादेव की विशेष कृपा दिलाएगा

रक्षाबंधन को सोमवार व पूर्णिमा का योग भगवान महादेव की विशेष कृपा दिलाएगा। सर्वार्थ-सिद्धि योग आयुष्मान योग के चलते दीर्घायु का वर प्रदान करेगा। ज्योतिषविदों का कहना है कि चतुर्योग रक्षाबंधन को विशेष बना रहे हैं।

ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि रक्षाबंधन पर पूर्णिमा के साथ-साथ सावन का आखिरी सोमवार होगा। इसके अलावा, पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा। इससे रक्षाबंधन के दिन की शुभता बहुत बढ़ जाएगी। पंडित विनोद त्रिपाठी कहते हैं कि इस दिन सुबह 9 बजकर 28 मिनट तक भद्रा रहेगी। सभी बहनें सुबह 9:28 पर भद्रा समाप्त होने के बाद ही अपने भाइयों को राखी बांधें। भद्रा की समाप्ति के साथ साथ ही सोमवार का राहुकाल भी निकल चुका होगा।
शताब्दी में पहली बार चतुर्योग में रक्षाबंधन आ रहा है। इसमें आयुष्मान इको सर्वार्थ सिद्धि योग बुधादित्य योग व शनि चंद्र के मिलन से विश्व योग यानी चतुर्योग बन रहे हैं।

राखी बंधन का मुहूर्त
शुभ योग : सुबह 9:29 से 10:46 तक
अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 12:00 से 12:53 तक
अपराहन मुहूर्त : दोपहर 1:48 से शाम 4:29 तक
लाभ मुहूर्त : दोपहर 3:48 से शाम 5:29 तक
संध्या अमृत मुहूर्त : शाम 5:29 से 7:10 तक
प्रदोष काल : शाम 7:06 से रात 9:14 तक

रक्षासूत्र बांधने का मंत्र
ॐ येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल:।
तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल।

राखी बांधने की पूजा विधि
सबसे पहले राखी की थाली सजाएं। इस थाली में रोली, कुमकुम, अक्षत, पीली सरसों के बीज, दीपक और राखी रखें। इसके बाद भाई को तिलक लगाकर उसके दाहिने हाथ में रक्षा सूत्र यानी कि राखी बांधें। राखी बांधने के बाद भाई की आरती उतारें, फिर भाई को मिठाई खिलाएं। राखी बांधने के बाद भाइयों को इच्छा और सामर्थ्य के अनुसार बहनों को भेंट देनी चाहिए। ब्राह्मण या पंडित जी भी अपने यजमान की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधते हैं। रक्षासूत्र में सरसों, केसर, चंदन, अक्षत और दूब जरूर बांधना चाहिए। रक्षा-सूत्र की पूजा जरूर करनी चाहिए। राखी दायीं कलाई पर ही बांधनी चाहिए। संभव हो तो रक्षा-सूत्र के बांधने तक भाई और बहन दोनों उपवास रखें