कृषि बिल पास कराना केंद्र सरकार के लिए एक चुनौती, राज्यसभा के गणित में सरकार कमजोर

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राजनाथ सिंह ने की एनसीपी-शिवसेना से बात, सरकार ने मोर्चाबंदी शुरू कर दी है 

नई दिल्ली, कृषि विधायकों को लोकसभा से पास कराने के बाद अब राज्यसभा की बारी है. यहां बिल पास कराना केंद्र सरकार के लिए एक चुनौती है. इन विधेयकों को लेकर एनडीए गठबंधन की सबसे पुरानी सहयोगी अकाली दल के विरोध की वजह से सरकार के लिए सदन के अंदर और बाहर मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है. ये बिल राज्यसभा में आएगा और सरकार की कोशिश होगी कि इसे हर हाल में पास करवा लिया जाए. कृषि से जुड़े तीनों विधेयक को राज्यसभा से पास कराने के लिए सरकार ने मोर्चाबंदी शुरू कर दी है. बीजेपी ने अपने सांसदों के लिए व्हिप भी जारी कर दिया है. इसके साथ विपक्षी पार्टियों को भी इस विधेयक के समर्थन में लाने के लिये केंद्र के बड़े मंत्री बातचीत में लग गए हैं.

राजनाथ सिंह ने की एनसीपी-शिवसेना से बात
सूत्रों के मुताबिक रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शिवसेना और एनसीपी के नेताओं से फोन पर बात की और इन विधेयकों के पक्ष में आने की अपील की. संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा में सरकार के पास बहुमत नहीं है. ऐसे में महत्वपूर्ण विधेयक को पास कराने के लिए सरकार को विपक्ष पर आश्रित होना पड़ता है.

राज्यसभा का नंबर गेम
बहरहाल, इन विधेयकों को लेकर सरकार आश्वस्त है कि वो आसानी से इन्हें पास करा ले जाएगी. हालांकि सरकार के सामने बड़ी चुनौती है. इन विधेयकों के समर्थन में खड़ी पार्टियाों के राजसभा के अंकगणित पर ध्यान दें तो 245 सदस्यों की राज्यसभा में बीजेपी 86 सांसदों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है. हालांकि मौजूदा समय में 2 स्थान रिक्त हैं. ऐसे में राज्यसभा में इन तीनों बिलों को पास कराने के लिए सरकार को कम से कम 122 वोट की जरूरत पड़ेगी.

कौन साथ-कौन खिलाफ
अकाली दल के विरोध के बावजूद सरकार को भरोसा है कि बीजू जनता दल (बीजद) के 9, एआईएडीएमके के 9, टीआरएस के 7 और वाईएसआर कांग्रेस के 6, टीडीपी के 1 और कुछ निर्दलीय सांसद भी इस विधेयक का समर्थन कर सकते हैं. ये वे पार्टियां है जो ना तो एनडीए के साथ है और ना यूपीए के साथ. सरकार को भरोसा है कि इन विधेयकों के समर्थन में कम से कम 130 से ज्यादा वोट पड़ेंगे.

विधेयक के विरोध में राज्यसभा में अभी 86 सांसदों के साथ बीजेपी सबसे बड़ी जबकि 40 सदस्यों के साथ कांग्रेस दूसरी बड़ी पार्टी है. शिरोमणि अकाली दल के तीन राज्यसभा सांसद निश्चित रूप से बिल के विरोध में वोट करेंगे. आम आदमी पार्टी के तीन सदस्य, समाजवादी पार्टी के आठ सांसद, बीएसपी के चार सांसद भी बिल के विरोध में वोट करेंगे.

बिल का विरोध कर रहे दलों का आकलन करने पर राज्यसभा में 100 सांसदों के कृषि विधेयकों के विरोध में वोट करने का अनुमान है. हालांकि, कुछ छोटे दलों ने अपना रुख साफ नहीं किया है. इन पार्टियों के राज्यसभा में करीब दर्जनभर सांसद हैं. 15 अन्य सांसद पहले से ही सदन की कार्यवाही में हिस्सा नहीं ले रहे हैं. 10 सांसद पिछलें हफ्ते से कोरोना पॉज़िटिव हैं. राज्यसभा में भले सरकार के पास बहुमत नहीं है लेकिन विपक्ष में फूट का फायदा मोदी सरकार को मिलेगा ये तय है.