ग्वालियर-चंबल अंचल में जीत के लिए अपनी जमीनी हकीकत टटोल रही पार्टियां

0
2

उपचुनाव में ग्रामीणों के भरोसे कांग्रेस

भोपाल। प्रदेश में उपचुनाव अक्टूबर के अंत में तय माने जा रहे हैं। भाजपा व कांग्रेस नेता जुबानी जंग के बाद अब जीत के लिए अपनी जमीनी हकीकत टटोल रहे हैं। कांग्रेसियों का मानना है कि ग्वालियर-अंचल के ग्रामीण मतदाताओं को आज भी पार्टी पर भरोसा है। उपचुनाव में ग्रामीण मतदाता कांग्रेस का पूरा साथ देगा। कांग्रेस का मानना है कि शहरी मतदाताओं को भाजपा राष्ट्रवाद से बरगलाने में कुछ सफल हो जाती है। वहीं भाजपा नेताओं का दावा है कि ग्रामीण क्षेत्र का मतदाता कांग्रेस के झूठ को समझ चुका है। अब कर्जमाफी, बेरोजगारी भत्ते जैसे झूठे प्रपंचों में नहीं फंसेगा। अंचल के ग्रामीण क्षेत्रों में सिंधिया फैक्टर भी काम करेगा। पार्टी के लोग ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार बैठकें कर रहे हैं।

शहरी मतदाता भी भाजपा के राष्ट्रवाद के मायने समझने लगा है
2018 के विधानसभा चुनाव में शहरी क्षेत्रों से भी कांग्रेस को उम्मीद से अधिक समर्थन मिला था। ग्वालियर शहर की चार विधानसभा सीट में से तीन कांग्रेस ने जीती थी। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों की डबरा व भितरवार पर कांग्रेस ने कब्जा बरकरार रखा था। मुरैना जिले की 6 सीटों में से कांग्रेस ने 6 सीटें जीती थीं। इसके अलावा भिंड, शिवपुरी व दतिया के ग्रामीण क्षेत्रों में भी कांग्रेस का प्रदर्शन अच्छा रहा था। पिछले दो बार के विधानसभा नतीजों को लेकर ग्रामीण कांग्रेस के अध्यक्ष अशोक सिंह दावा कर रहे हैं कि इस बार भी ग्रामीण क्षेत्रों के साथ शहर में भी कांग्रेस का प्रदर्शन अच्छा रहेगा और ग्रामीण क्षेत्रों से भी अभूतपूर्व समर्थन की उम्मीद हैं। उनका कहना है कि लॉकडाउन के दौरान महानगरों से अपने गांव लौटने पर ग्रामीणों ने जो परेशानी उठाई है वह उसे कभी नहीं भूलेंगे। इन लोगों का मत भी कांग्रेस को जाएगा। भाजपा शहर के मतदाताओं को लेकर कुछ भी दावे करे, लेकिन अब पढ़ा-लिखा तबका भी समझने लगा है कि किन का लोकतंत्र पर भरोसा है।

अब ग्रामीण मतदाता कांग्रेस के झूठे लुभाने वादों में नहीं फंसेगा
भाजपा के रणनीतिकार मान रहे हैं कि शहरी क्षेत्र के मतदाताओं पर उनकी मजबूत पकड़ है। अंचल के ग्रामीण क्षेत्र का मतदाता अब कांग्रेस के झूठे प्रपंच को समझने लगा है। पिछले विधानसभा चुनाव में अंचल के लोगों ने कमल नाथ व दिग्विजय सिंह के नाम पर नहीं, ज्योतिरादित्य सिंधिया के चेहरे को देखकर वोट दिया था। क्षेत्र के लोगों को उम्मीद थी कि सिंधिया के सीएम बनने से क्षेत्र अधिक फायदे में रहेगा, लेकिन कमल नाथ ने ज्योतिरादित्य सिंधिया से छल-कपट व गांधी परिवार की मेहरबानी से सरकार हथिया ली। इसके साथ ही सिंधिया को इतना अपमानित किया कि उन्हें कांग्रेस छोडऩे के लिए मजबूर होना पड़ा। भाजपा ग्रामीण अध्यक्ष कौशल शर्मा का मानना है कि इस बार शहर के साथ ग्रामीण मतदाता भी भाजपा के साथ नजर आ रहा है। उसके दो कारण हैं। पहला किसानों से किया गया कर्जमाफी का वादा पूरा न करना और दूसरा सिंधिया को अपमानित करना। यही दो वजह भाजपा उम्मीदवारों की जीत का आधार बनेंगी।