…तो बंद हो जाएंगे देश के कई पावर प्लांट

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एनसीएल को ११ करोड़ प्रतिदिन हो रहा नुकसान

लोकल परिवहनकर्ताओं ने रोका कोल डिस्पैच, बंद कराया बाजार

एनजीटी के निर्देशों पर बंद हुआ है सडक़मार्ग से कोयला

भोपाल। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देशों पर सिंगरौली-सोनभद्र की सडक़ों से कोयले की ढुलाई पर लगे प्रतिबंध के बाद देश के कई पावर प्लांट में कोयले की कमी होने से बंद होने की कगार पर पहुंच गये है।

राजस्थान विद्युत बोर्ड के दो पावर प्लांट कोटा और सूरतगढ़ क्रिटिकल स्टेज पर पहुंच गये हैं। कमोबेश यही स्थिति प्रयागराज पावर प्लांट की है, जिसमें महज 5 दिन से कम उपयोग के लिये कोयला बचा हुआ है। एनसीएल के मुहाने पर स्थित रेनूसागर पावर और हिन्डालको में महज 15 दिन का स्टॉक बचा हुआ है। अनपरा का लैंको पावर भी आंशिक रूप से प्रभावित हुआ है। जिससे विद्युत उत्पादक कम्पनियों में अफरा तफरी का माहौल बन गया है। एनटीपीसी, लैंको में एमजीआर से ही कोयले की आपूर्ति हो पा रही है।

80 हजार टन प्रतिदिन कोयला ठप
सडक़ मार्ग से एनसीएल प्रतिदिन लगभग 80 हजार टन कोयले की आपूर्ति कर रहा था। जिसमें दो प्रकार के ग्राहक है एक तो वे जो ई-आक्सन के जरिए कोयले की खरीद कर खदान से कोयला उठा रहे थे। ऐसे पावर प्लांटो में लगभग 50 हजार टन कोयला जाता था। दूसरे वे जो खदान से रेलवे यार्ड तक सडक़ मार्ग से एनसीएल भेज कर रेलवे के जरिये आपूॢत कर रहा था। दोनों ही प्रकार का कोयला परिवहन बंद है,जिससे एकमुश्त 80 हजार टन कोयले का डिस्पैच बंद हो गया है।
ये संस्थान प्रमुख रूप से हुए प्रभावित
एनसीएल की खदानों से ई ऑक्सन और ट्रक के जरिये कोयला ले जाने वाले हिंडालको का रेनूसागर पावर डिवीजन और महान एल्यूमिनियम प्रोजेक्ट बरगवां,ग्रासिम सीमेंट, अल्ट्राटेक सीमेंट, एस्सार पावर,प्रयागराज पावर,जेपी निगरी,जेपी बीना एमपी पावर प्रमुख रूप से प्रभावित हुए है। जो बंद होने की कगार में पहुंच गये हैं। इन सभी प्लांटों में एनसीएल का लगभग 50 हजार टन कोयला पहुंच रहा था।
दूरदराज के पावर प्लांट बंद होने की स्थिति में
एनसीएल के द्वारा रेलवे साइडिंग सिंगरौली से राजस्थान के कोटा, सूरतगढ़, यूपी के ललितपुर, प्रयागराज, एमपी के पीजीसीएल,हरियाणा के झज्झर पावर प्लांट क्रिटिकल स्टेज पर है। इन पावर प्लांटो में प्रतिदिन 30 हजार टन कोयला सिंगरौली से भेजा रहा था। जो गोरबी ब्लॉक बी और जयंत माइंस से रेलवे स्टेशन पहुंच रहा था। इन दोनों स्पर साइडिंग्स से प्रतिदिन 7 से 8 रैक कोयला डिस्पैच हो रहा था।

तीन दिन में 33 करोड़ का नुकसान
सूत्रों के मुताबिक एनसीएल से प्रतिदिन 80 हजार टन कोयले की आपूर्ति हो रही थी। इस मद से एनसीएल को लगभग 11 करोड़ की आय हो रही थी। इन तीन दिनों में एनसीएल को लगभग 33 करोड़ रूपये का नुकसान हो चुका है। इसके अलावा रेलवे को भी अब तक मालभाड़े के रूप में 20 करोड़ से अधिक का नुकसान हो चुका है। रेलवे साइडिंग पर शनिवार को कोई रैक नही लोड हो पाई। एनसीएल और रेलवे के अधिकारी भी मामले पर कुछ भी बोलने से कतराते रहे।

एनसीएल पर फोड़ रहे ठीकरा
देश के कई पावरप्लांटों में पैदा हुई मुश्किलों के बाद भी स्थानीय कोयला परिवहनकर्ता इस मुश्किल को एनसीएल को जिम्मेदार बता रहे हैं। सिंगरौली मोटर एसोशिएसन को व्यापार संघ और विधायक सिंगरौली का समर्थन मिलने के बाद शनिवार को उन्होनें मोरवा बाजार बंद करा दिया। इतना ही नही वे दर्जन भर चार पहिया वाहनों पर बैनर पोस्टर लगा कर माइक चोंगों के साथ अनपरा पहुंचे। वहां भी उन्होंने परिवहनकर्ताओं से मिल कर जिला प्रशासन को ज्ञापन सांैपते हुए सडक़मार्ग से कोयला परिवहन शुरू करने की मांग की।

गहराने लगा है रोजी रोटी का संकट
बड़े परिवहनकर्ताओं के बीच अपना व्यवसाय शुरू करने के लिये लोन से एक दो हाइवा ट्रक खरीदने वाले ऐसे मोटर मालिक भी है। जो ट्रांस्पोटिंग बंद होने से सांसत में है, दिन भर वाहनों के आगे पीछे घूमने और मौके बेमौके स्वयं स्टीयरिंग संभाल लेने वालेे नये ट्रक मालिकों के होश उड़े हुए हैं। उन्हें परिवार के भरण पोषण से अधिक फाइनेंसर की किश्त अदा करने की चिंता है। इससे भी अधिक मुश्किलें इस व्यवसाय से जुड़े मिस्त्रियों व मोटर व्यवसायियों की हो गयी है जो पूरी तरह से सिंगरौली के कोयला परिवहन आश्रित हैं। सिर्फ मोरवा में ही 2 सौ अधिक मिस्त्रियों गैराज मालिकों और इतने की मोटर पार्ट्स व्यवसायियों के बीच रोजी रोटी का संकट गहराने लगा है।
बेखौफ होकर बाइक से कर रहे आवागमन
इन दिनों मोरवा से जयंत-वैढऩ मार्ग तो दूसरी तरफ यूपी के अनपरा, ककरी, खडिय़ा से शक्तिनगर रूट पर लोग बाइक से बेखौफ होकर आवागमन कर रहे है। सडक़े साफ सुथरी और डस्टलेस हो गयी है, हल्की फुल्की बारिश से 24 घंटे उडऩे वाला कोलडस्ट भी सडक़ से बह कर जा चुका है। जिससे इन रूटों पर चलने वाले लोगों ने राहत की सांस ली है। अब उन्हें एनसीएल के द्वारा तैयार किये जाने वाले डेडिकेटेड कॉरिडोर का इंतजार है। जिससे सार्वजनिक आवागमन के मार्ग प्रदूषण और दुर्घटनामुक्त बने रहे।

कंगाल बनाएंगे सिंगरौली को
कोयला बंद होने से ट्रांसपोर्ट व्यवसायी अपने प्रदर्शन के दौरान बेलगाम हो चुके हैं। अपने भाषण में वे कह रहे हैं कि यदि सडक़ से कोयला नहीं जाने दिया तो सिंगरौली को कंगाल बना देंगे। इतना ही नहीं वे एनसीएल अफसरों के परिजनों को लेकर भी अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं।

अश्विनी दुबे पर फूट रहा आक्रोश
ट्रांसपोर्ट व्यवसायी सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट अश्विनी दुबे पर अपना आक्रोश निकाल रहे हैं। वे अप्रिय नारे लगाते हुए कह रहे हैं कि दुबे को बंद कराना था तो फ्लाई ऐश का भंडार रूकवाते, पानी में जा रहे प्रदूषण को रोकते। दूसरी ओर इस पूरे मामले में श्री दुबे ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हमने, सिंगरौली की जनता के हित में एनजीटी के समक्ष आवाज उठाई। आज एनजीटी के कारण लोग खुली हवा में सांस ले पा रहे हैं, भारी वाहनों से होने वाले एक्सीडेंट का खतरा टला है। रही बात पानी की तो कंपनियों को आरओ लगाने और रिहंद सहित जलस्रोतों में खदानों की गंदगी जाने पर हुआ नियंत्रण भी, एनजीटी के दिशा निर्देशों की देन है।

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