परिश्रमिक भुगतान के लिये दर-बदर की ठोकरे खा रहे श्रमिक

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तीन माह का नही मिला भुगतान

rafi ahmad ansari
बालाघाट। आदिवासीयों को रोजगार न देने और वन श्रमिको को भुगतान न करने के मामले में वन विभाग की कार्यप्रणाली अब ऐसे कटघरे में खडी नजर आ रही है कि सवालो पर सवाल जन्म लेने लगे है। एक ओर जिले की आदिवासी जनता रोजगार के मामले में वन विभाग पर ही आश्रित है तो दूसरी ओर वन विभाग की कार्यप्रणाली से परेशान भी। आये दिन श्रमिको का भुगतान और आदिवासीयों को वन विभाग की ओर से रोजगार न मिलने की शिकायते मिलती रहती है। विगत दो दिनो पूर्व लालबर्रा क्षेत्र के ग्राम कंजई से कुछ वन श्रमिक, पारिश्रमिक भुगतान न मिलने के सदंर्भ जिला मुख्यालय स्थित म.प्र राज्य वन विकास निगम लि. लामटा परियोजना मंडल के संभागीय प्रबंधक कार्यालय बालाघाट पहुचे थे जहां उन्होने अपनी समस्या से अधिकारी को अवगत कराया, लेकिन वन विभाग की कार्यप्रणाली उनकी समझ के परे ही साबित हुई। पीडित श्रमिको ने बताया कि 16 जनवरी 2020 से लेकर 3 मार्च 2020 (लगभग ढाई माह) तक उन्होने वन सुरक्षा श्रमिक के रूप में लालबर्रा कोरीडोर वनक्षेत्र में काम किया। वनो और वन्य प्राणियों की सुरक्षा की जिम्मेंदारी उनके कांधो पर सौंप दी गई थी, लेकिन केद्र सरकार के आदेश पर लॉकडाउन लगते ही विभाग ने उन्हे बिना सुचित किये काम से निकाल दिया और उनके ढाई माह का परिश्रमिक भुगतान भी नही किया। जिस कारण श्रमिको को अपने पारिश्रमिक भुगतान के लिये खासा परेशान होना पड रहा है और वे दरबदर की ठोकरे खाने को मजबूर है।

पीडित श्रमिको में प्रितम सिंह, मर्सकोले ने जानकारी देते हुए बताया कि वन परिक्षेत्र में काम करने वाले सैकडो लोग है जिन्हे मजदूरी का भुगतान नही मिला है। इस संदर्भ में उन्होने पूर्व में भी 15 सितम्बर और 18 सितम्बर को दो मर्तबा आवेदन कर चुके है, लेकिन उन्हे भुगतान नही मिल पाया है, मिला है तो सिर्फ आज कल में भुगतान करा दिये जाने का आश्वासन। श्रमिको ने बताया कि पिछले 6 माह से उन्हे मजदूरी भुगतान न मिलने के कारण वे कुछ हद तक आर्थिक तंगी का भी दंश झेल रहे है।

लॉकडाउन से स्थिति गंभीर बनी हुई है। उनका आरोप है कि जब भी वे भुगतान को लेकर आते है, वन विभाग हमेंशा बजट का हवाला देकर लॉलीपाप देते आया है। श्रमिको ने जिस क्षेत्र में कार्य किया, वह कान्हा टायगर रिजर्व क्षेत्र मंडला में भी आता है, जहां वे लोग भुगतान के संदर्भ में कान्हा टायगर रिजर्व क्षेत्र संचालक कार्यलय मंडला भी गये हुए थे, जहां उन्हे श्रमिक भुगतान की राशि म.प्र राज्य वन विकास निगम लि. लामटा परियोजना मंडल बालाघाट को भेज दिये जाने की जानकारी दी गई। लेकिन यंहा पता चलता है कि भुगतान की राशि आई ही नही। पीडित श्रमिको ने मांग की है कि जल्द से जल्द उनकी मजदूरी का भुगतान हो और उन्हे पुन: रोजगार दिया जायें, अन्यथा उनके सामने आत्महत्या करने की नौबत बन जायेगी।