JDU में टिकट पाने को लेकर ‘मारामारी’, एक सीट पर हैं कितने दावेदार 

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 पटना 
बिहार विधानसभा चुनाव -2020 में अपनी किस्मत आजमाने को लेकर राज्य में 15 सालों से सत्तारूढ़ जदयू में दावेदारों की कतार लंबी है। पार्टी नेताओं ने घटक दलों की सीट से लेकर अपने ही दल के मौजूदा विधायकों तक की सीट पर अपना दावा पार्टी आलाकमान के पास ठोका है। तीन हजार से अधिक आवेदन पार्टी ने सूचीबद्ध किए हैं। आलम एक अनार और सौ  बीमार जैसा है। 

गौरतलब है कि जदयू ने लोकतांत्रिक तरीका अपनाते हुए चुनाव लड़ने के लिए इच्छुक पार्टीजनों से बायोडाटा मांगा था। बायोडाटा पार्टी कार्यालय की वेबसाइट पर ऑनलाइन भेजने थे। बायोडाटा जमा करने की अंतिम तिथि पांच सितम्बर ही थी। अगस्त से ही राज्यभर से सभी 243 विधानसभा सीटों से जदयू के कार्यकर्ताओं के दावे पार्टी के पास आने लगे थे। पार्टी कार्यालय के अलावा इसके लिए कई और सेंटर भी उभरे थे। कोई सीएम आवास जाकर बायोडाटा जमा कर रहा था, कोई राष्ट्रीय संगठन महासिचव आरसीपी सिंह, कोई पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी तो कोई सांसद राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह के यहां। हालांकि सभी आवेदन पार्टी मुख्यालय भेजे गये। कई कार्टून आवेदन जब 5 सितम्बर तक जमा हो गए तो कम्प्यटूर में उसकी इंट्री आरंभ हुई। एक-एक नेताजी ने कई-कई जगह और एक ही नहीं दो-तीन सीटों से भी आवेदन कर दिए हैं। 

जानकारी के मुताबिक एक व्यक्ति के कई जगह जमा आवेदन और कई सीटों से दावे की एक इंट्री की गयी है। इन्हें सूचीबद्ध करने में 15 दिन लगे। करीब ढाई हजार आवेदनों की तैयार सूची शीर्ष नेता के पास विचारार्थ भेजे जाने की तैयारी थी।

500 से अधिक लोगों ने नीतीश कुमार को खुद बायोडाटा सौंपा
इसी बीच मुख्यमंत्री और जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष खुद टिकटार्थियों से पार्टी दफ्तर में मिलने लगे। मंगलवार को नीतीश कुमार ने 121, बुधवार को 650 और गुरुवार को 350 लोगों अर्थात कुल तीन दिनों में 18 घंटे में उन्होंने 1121 लोगों से मुलाकात की। इनमें 70 फीसदी टिकट पाने की आस में पार्टी नेता से मिले। करीब आधे ने अपना बायोडाटा भी मुख्यमंत्री को अपने हाथों सौंपा। अब एक बार फ‌िर से नीतीश कुमार के निर्देश पर इन आवेदनों को सूचीबद्ध किया जा रहा है। उम्मीद है कि टिकट तय करने के दौरान एक नजर इन बायोडाटा पर अवश्य डाली जाएगी। 

महज तीन से चार दर्जन सीटों पर है नए लोगों की उम्मीद 
जदयू के 71 प्रत्याशी 2015 के चुनाव में जीते थे। इनमें से श्याम रजक को छोड़कर शेष 70 प्रत्याशियों के फिर से चुनाव मैदान में उतरने के आसार हैं। जदयू को एनडीए गठबंधन में 115-120 सीटें मिलने के मद्देनजर 70 को छोड़कर शेष 40-45 सीटें ही ऐसी बचेंगी, जिनमें 2015 में लड़कर हारने वाले या उनकी जगह नये उम्मीदवारों के लिए मौके बन सकते हैं। उधर छह विधायक राजद से भी जदयू में आए हैं और इन सबों का भी तीर छाप पर चुनाव लड़ना प्राय: तय है। इन हालातों में देखना दिलचस्प होगा कि जदयू कितने नए उम्मीदवारों को अवसर दे पाता है। वैसे कतार में 15-20 सालों से पूरे समर्पण के साथ जदयू का झंडा थामने वाले बड़ी संख्या में नेता खड़े हैं और शिद्दत से वे अपनी बारी के इंतजार में हैं।