मुंगावली में कांग्रेस को भारी पड़ सकता है बाईसाहब पर दांव लगाना 

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मुंगावली में कांग्रेस दमदार प्रत्याशी उतारकर मंत्री बृजेन्द्र सिंह यादव की बढ़ा सकती है परेशानी

भोपाल। मुंगावली विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में भाजपा की ओर से कांग्रेस के पूर्व विधायक और लोक स्वास्थ्य एवं यांत्रिकी राज्य मंत्री बृजेन्द्र सिंह यादव चुनाव मैदान में उतरेंगे। वहीं कांग्रेस ने अभी प्रत्याशी की घोषणा नहीं की है। कांग्रेस की तरफ से कई नेता टिकट के लिए दावेदारी कर रहे हैं। जिनमें प्रदुम्न सिंह दांगी की दावेदारी मजबूत मानी जा रही है। इनके अलावा क्षेत्रीय सांसद डॉ. केपी यादव के भाई अजयपाल सिंह की पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ सहित कांग्रेस के दिग्गजों से लगातार मुलाकात कर चुके हैं। सूत्रों की माने तो कांग्रेस पार्टी भी इस चुनाव में किसी भी तरह का खतरा न उठाते हुए पूर्व विधायक बृजेन्द्र सिंह की टक्कर में तगड़ा प्रत्याशी उतारने का मूड बना रही है। हालाकि इस लिस्ट में चंदेरी विधायक गोपाल सिंह चौहान के बेटे मनु राजा का नाम भी प्रमुखता से चल रहा है। क्षेत्र में 50 हजार वोट बैंक यादव समाज का होने से भाजपा की तरह कांग्रेस भी यादव प्रत्याशी को टिकट दे सकती है। सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस अपनी इसी रणनीति के तहत जिपं अध्यक्ष बाईसाहब यादव को कांग्रेस में लाकर टिकट देने की तैयारी कर रही है। अगर ऐसा हुआ तो यह कांग्रेस की बड़ी भूल होगी।

सहानुभूति में भी नहीं जीत पाई थी बाईसाहब
गौरतलब है कि 2018 में पति की मृत्यु के बाद भाजपा ने बाईसाहब यादव को प्रत्याशी बनाकर उपचुनाव लड़ा था। तब कांग्रेस के परम्परागत गढ़ को ढहाने के लिए भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी थी। इस चुनाव में जहां मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर, भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा और शिवराज मंत्रिमण्डल के मंत्रियों सहित लगभग 40 से ज्यादा विधायकों, सांसदों, भाजपा के वरिष्ठ नेताओं और जातिगत समीकरण के अनुसार इस क्षेत्र के मतदाताओं के नाते-रिश्तेदारों को लगाने के साथ-साथ एक आमसभा में मुंगावली में भाजपा की प्रत्याशी बाई साहेब यादव के एक संबोधन के दौरान पति को स्मरण करते हुए मंच पर रोने और उनके साथ उस मंच पर मौजूद राज्य के गृह मंत्री भूपेन्द्र सिंह, लोक निर्माण मंत्री रामपाल सिंह, कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन और जयभान सिंह पवैया की आंखें भी नम हो गई थीं। उस दिन लोगों ने यह मान लिया था कि भाजपा प्रत्याशी के साथ-साथ मंत्रियों के रोने की जो अदा पर अब मतदाता फिदा हो जाएंगे और बाई साहब को सहानुभूति का वोट देंगे? लेकिन सहानुभूति लहर नहीं चल सकी तो वहीं राज्य के अधिकांश मंत्रियों ने अपने-अपने समाज के लोगों में जाकर इस तरह की दुहाई दी कि भाजपा को वोट देकर उनकी और उनकी कुर्सी की लाज बचा लो? लेकिन बाईसाहब यादव को हार का सामना करना पड़ा। ऐसे में कांग्रेस अगर उन्हें उपचुनाव में टिकट देती है तो यह घातक कदम होगा।

दावेदारों की लिस्ट हुई लंबी
मुंगावली विधानसभा सीट पर कांग्रेस से इस्तीफा देकर आए बृजेन्द्र सिंह यादव का नाम तय है। लेकिन इसके बाद भी जिपं अध्यक्ष बाईसाहब यादव, जनपद अध्यक्ष जगन्नाथ सिंह यादव के नाम पिछले विधानसभा चुनाव में टिकट की दौड़ में शामिल रहे हैं। हालांकि पिछली बार सांसद डॉ. केपी यादव को मुंगावली से विधानसभा प्रत्याशी भाजपा ने बनाया था, लेकिन इस बार समीकरण बदले होने की वजह से कांग्रेस से टिकट की मांग करने वालों में दूसरे विधानसभा क्षेत्रों के कार्यकर्ता भी टिकट की मांग कर रहे हैं। सूत्रों की माने तो कांग्रेस भी भाजपा की तरह जोड़-तोड़ की राजनीति करते हुए भाजपा कार्यकर्ताओं में से किसी को अपना प्रत्याशी बना सकती है।

कांग्रेस का गढ़
मुंगावली विधानसभा क्षेत्र कांग्रेस का गढ़ माना जाता है। 2018 में मुंगावली सीट पर वोटकटवा उम्मीदवारों का 15,638 वोट मिले थे। जबकि लोक स्वास्थ्य एवं यांत्रिकी राज्य मंत्री ब्रजेंद्र सिंह यादव ने भाजपा के कृष्णपाल सिंह को 2,136 वोट से हराया था। ऐसे में वोटकटवा उम्मीदवार उपचुनाव में उनकी जीत की राह में रोड़ा बन सकते हैं। 2018 में इस सीट पर कुल 18 प्रत्याशी मैदान में थे और 1,38,406 वोट पड़े थे। बृजेन्द्र सिंह यादव को 55,346, कृष्णपाल सिंह को 53,220 और बसपा के कमल सिंह को 14,202 वोट मिले थे। उप चुनाव में भाजपा को भितरघात का खतरा है। इसलिए ब्रजेन्द्र सिंह यादव के लिए उप चुनाव चुनौती भरा होगा। वहीं 2018 में ही हुए उपचुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार ब्रजेन्द्र सिंह यादव ने 2,124 वोट से जीत दर्ज की थी और उन्हें कुल 70,808 वोट मिले। जबकि भाजपा की उम्मीदवार बाई साहब यादव को 68,684 मत मिले। यह सीट तत्कालीन मुंगावली विधायक महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा के अकस्मात निधन के बाद खाली हुई थी। जिसके बाद यहां उपचुनाव हुए थे। वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव की करें तो कांग्रेस ने यह सीट 20,765 मतों के अंतर से जीती थी। 2008 में बीजेपी के राव देशराज सिंह यादव 45,991 मतों के साथ जीत हासिल की थी, जबकि कांग्रेस के अरविंद कुमार अब्बी को 24,946 वोट मिले थे। 1990 में स्व. सुंदरलाल पटवा के नेतृत्व में भाजपा मैदान में उतरी और 4.36 फीसदी वोट बढ़ गए। तत्कालीन कांग्रेस की सरकार को हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद 1993 में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस चुनाव में उतरी तो 6.03 प्रतिशत मतदान बढ़ा और बीजेपी की पटवा सरकार हार गई थी। वहीं, 1998 में वोटिंग प्रतिशत 60.22 रहा था जो 1993 के बराबर ही था। उस वक्त दिग्विजय सिंह की सरकार बनी। लेकिन 2003 में उमा के नेतृत्व में बीजेपी सामने आई और दिग्विजय सिंह की 10 साल की सरकार सत्ता से बाहर हो गई। उस वक्त भी 7.03 प्रतिशत वोट बढ़े थे।

जातीय समीकरण
मुंगावली विधानसभा क्षेत्र यादव मतदाता बाहुल्य क्षेत्र हैं इसलिए यहां दोनों प्रमुख पार्टियों ने यादव प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है। इस विधानसभा क्षेत्र में 47 हजार एससीएसटी वोट, 40 हजार यादव, 18 हजार लोधी, 9 हजार कुशवाह, 12 हजार दांगी, 6 हजार गुर्जर, 7 हजार मुस्लिम और 5 हजार ब्राह्मण मतदाता है। इसके अलावा अन्य समाजों के वोट भी 1 से 3 हजार के बीच में हैं जो इस चुनाव के परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं।

दो साल में दो बार बने विधायक यादव
भाजपा की शिवराज सरकार में राज्यमंत्री पद से नवाजे गए ब्रजेंद्र सिंह यादव का राजनैतिक विरासत का ज्यादा फैलाव नहीं है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के संसदीय इलाके के मुंगावली से ब्रजेन्द्र यादव दो बार विधायक रहे । मार्च में कॉग्रेस सरकार से बगावत करके जिन 22 विधायको ने इस्तीफा दे कर कांग्रेस की सरकार गिरा कर भाजपा की सरकार बनाई थी उनमे यादव भी शामिल थे। स्थानीय सियायत में बडे गुणाभाग एवं सिंधिया की इच्छा से उनको मंत्री पद मिला है। मंत्री बनने के बाद उपचुनाव में वे ताकत से उतरेंगे।