उज्जैन वन वृत्त में फर्जी टीपी कांड, सीसीएफ को पता नहीं, पीसीसीएफ तक पहुंचा मामला

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प्रत्येक ट्रांजिस्ट पास पर आर्थिक भ्रष्टाचार की बू,मामला दबाने में लगे कतिपय अधिकारी

उज्जैन/ भोपाल।वन विभाग के उज्जैन वन संरक्षक क्षेत्र के तीन जिलों में हुए अवैध एवं फर्जी टीपी के मामले को दबाना शुरू कर दिया गया है। करीब 4हजार400 टीपी काटी जाना सामने आ रहा है। विभाग में ही एक टीपी पर हजारों रूपए के लेन-देन की बात चल रही है।मामले में निष्पक्ष जांच होना शंका के दायरे में इसलिए देखी जा रही है कि संभाग स्तर के एक अधिकारी खूद उसे दबाना चाह रहे हैं।

वन विभाग के उज्जैन वन संरक्षक क्षेत्र के शाजापुर, आगर, उज्जैन जिले में अवैध एवं फर्जी टीपी के कांड को अंजाम दिया गया है। मामला इंदौर में जांच के दौरान खुला। इसके बाद विभाग में इसे अंदर ही अंदर कुल्हड में गुड फोडने की तर्ज पर चलाया गया।इसी के चलते  मामले को दबाने की स्थिति सामने आ रही है।मामले में अब तक टीपी जारी करने वाले रेंजर एवं एसडीओ पर कार्रवाई न किया जाना ही इस शंका का मूल है। इसे लेकर उज्जैन मुख्य वन संरक्षक एवं शाजापुर डीएफओ आरोपों से परे नहीं देखे जा रहे हैं। विभाग में वन माफियाओं के दबाव में पूरे मामले में लीपापोती की बात प्रचलित है। पूरा मामला कुल 4380 टीपी का है जो रेंजर द्वारा डीएफओ शाजापुर और मुख्य वन संरक्षक  उज्जैन की सहमति से काटी गई,इसी के चलते मामला की जांच पर सवालिया निशान खडे हो रहे हैं। मामला मुख्य वन संरक्षक उज्जैन क्षेत्र में अंजाम दिया गया है और लकड़ी वन मुख्य वन संरक्षक इंदौर दो वन वृत्त के बीच अंजाम दिया गया है। उज्जैन वन वृत्त से अवैध एवं फर्जी टीपी जारी की गई और अवैध लकडी इंदौर वन वृत्त क्षेत्र में ले जाकर खपाई गई। इंदौर वन वृत्त में ही इस पूरे मामले का भंडाफोड टीपी की जांच के दौरान सामने आया।जिसे अब विभागीय बदनामी के नाम पर बर्गलाते हुए दबाने का प्रयास जारी है।

हर टीपी पर हजारों का लेनदेन!

विभाग में चर्चा सामने आ रही है कि प्रत्येक टीपी को जारी करने के लिए लकडकट्टों और अधिकारियों के बीच एडजस्टमेंट हजारों में हुआ है।ज्यादातर टीपी लाकडाउन के समय काटी जाना सामने आ रही है।चर्चा तो यह भी है कि जिस समय में टोटल लाकडाउन था और कार्यालय बंद थे ऐसे समय में भी टीपी काटी जाना सामने आ रहा है। तय है आर्थिक बंदरबांट के बगैर कर्मशीलता का यह मामला संभव नहीं है।बताया जा रहा है कि लकडकट्टों वन माफियाओं ने इन ट्रांजिस्ट पास से करोड़ों के वारे न्यारे किए हैं जिसमें 98 लाख के लगभग का लेनदेन किया गया है।

आखिर कार्रवाई क्यों नहीं

अवैध एवं फर्जी टीपी के मामले में जिम्मेदार रेंजर एवं एसडीओ पर अब तक दस्तावेजी कार्रवाई को भी अंजाम नहीं दिया गया है।विभाग में शंका जताई जा रही है कि जिस तरह से विभाग के कर्मचारियों ने अपने बच्चों को अवैध रूप से डेली वेजेस के नाम पर अवैध रूप से श्रम न्यायालय में दस्तावेज जलने की बात कह कर नियुक्त करवाया है उसी तरह टीपी भी अग्नि देव या वरूण देव की भेंट चढ़ाई जा सकती है ।जिससे बांस और बांसुरी दोनों का ही समापन हो जाए।

क्या है मामला-
विभागीय सूत्रों के अनुसार मध्यप्रदेश शासन ने निर्णय लेते हुए कई प्रकार की लकड़ियों में 60 प्रजातियों को ट्रांजिस्ट पास से मुक्त किया था। इस मामले में पर्यावरण संस्था की ओर से न्यायालय में वाद दायर किया गया था। उच्च न्यायालय ने इसमें स्थगन जारी किया था। न्यायालय के स्थगन के पालन में वन विभाग ने टीपी पर परिवहन की प्रक्रिया अपनाई थी। इसी पूरे मामले में उज्जैन, शाजापुर और आगर जिले में घोटाला हुआ है। शाजापुर और आगर से 4380 परिवहन पास बगैर भौतिक सत्यापन एवं अन्य जांच के जारी किए गए। यहां तक की लकडी पर हेमर का निशान भी नहीं लगवाया गया।
इन परिवहन पास में सील नहीं थी। लकड़ी की कटाई कहीं ओर से की गई और लकड़ी कहीं और से भरी गई।एक ही पास पर दो से तीन बार लकड़ी ले जायी गई। टीपी और लकड़ी का सत्यापन स्थल पर नहीं किया गया।सुत्रों के अनुसार इंदौर में जांच के दौरान जो टीपी पकड़ी गई थी उसमें न तो गाडी नंबर था न ही स्थल का उल्लेख था और न ही वजन का।

विभाग के जानकारों के अनुसार वनों की अवैध कटाई के साथ ही अवैध टीपी का यह मकडजाल चार जिलों में फैला हुआ है। कतिपय अधिकारी भी स्वार्थ के चलते इसमें सहयोगी की भूमिका में हैं। वन माफिया इनकी कमजोरी का जबरर्दस्त लाभ अर्जित कर रहा है।उज्जैन मुख्य वन संरक्षक क्षेत्र के उज्जैन,शाजापुर,आगर जिले के साथ ही इंदौर जिले में भी यह मकडजाल फैला हुआ है। इस मकडजाल के तहत जमकर चांदी काटी गई है।

मुख्य वन संरक्षक अंजान बने- मामले को लेकर वन विभाग में चल रही गतिविधियों को जानने के लिए मुख्य वन संरक्षक अजय यादव को मोबाईल काल किया गया।प्रथम बार में वे अंजान बन गए और दुसरी बार में पल्ला झाड़ लिया। उनसे हुए सवाल –जवाब नीचे दिए जा रहे हैं।

रिपोर्टर-हलो,सीसीएफ साहब बोल रहे हैं? भोपाल से पत्रकार अजय द्विवेदी बोल रहा हुं।

सीसीएफ- –हां बोल रहा हुं।

रिपोर्टर-आपके वन वृत में फर्जी टीपी कांड का मामला है इसमें अभी तक दोषियों पर कार्रवाई की गई?जांच वांच हुई क्या?

सीसीएफ- आप कौन बोल रहे हैं? रिपोर्टर-अजय द्विवेदी बोल रहा हुं पत्रकार हुं भोपाल से बोल रहा हुं।

रिपोर्टर-आपके वन वृत में कुछ जिलों शाजापुर,आगर,उज्जैन में फर्जी टीपी कांड हुआ है इसमें कार्रवाई हुई है क्या?

सीसीएफ- ये फर्जी टीपी कांड कहां से आ गया ?

रिपोर्टर-इंदौर ने खोला है और शाजापुर,आगर,उज्जैन में… फोन कट

दुसरी बार काल करने पर

रिपोर्टर-4380 टीपी कटी है जिलों में इनमें अनियमितता है,दोषियों पर कोई कार्रवाई की गई?

सीसीएफ- आप डीएफओं शाजापुर से पूछ लिजिए वो आपको बता देंगे

रिपोर्टर-हम एक जिले से क्यों पूछे आप सभी जिलों के मालिक हैं एक जिले की बात भी हो तो आप ने कोई कार्रवाई की?

सीसीएफ-आप डिटेल शाजापुर डीएफओ से पूछ लें।

रिपोर्टर- जिले की शिकायत भी आप तक ही आएगी तो आपने कोई कार्रवाई की ?

सीसीएफ- फोन कट

-आप मुझे व्हाट्सअप कर दिजिए। में पूरे मामले को देखता हुं । इतनी बातें याद नहीं रहती हैं। मैं दिखवा लूंगा।

-राजेश श्रीवास्तव,पीसीसीएफ,भोपाल