कोर्ट ने काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी मामले में सुन्नी वक्फ बोर्ड पर लगाया 3000 का जुर्माना

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kasi vishwanath gyanwapi

मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को

350 वर्ष पहले मुगल बादशाह औरंगजेब के आदेश पर एक मस्जिद बना दी गई थी

वाराणसी, उत्तर प्रदेश के वाराणसी में श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर से जुड़े ज्ञानवापी मस्जिद विवाद में अब सबकी निगाहें 13 अक्टूबर को लगी हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि अब इस मुकदमे की सुनवाई, वाराणसी के सीनियर जज सिविल डिवीजन फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलेगा या नहीं? इस पर जिला जज की अदालत फैसला करेगी। फिलहाल जिला जज की अदालत ने विलंब होने के कारण सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड पर 3000 रुपए का जुर्माना लगाते हुए निगरानी याचिका में मियाद अधिनियम के तहत माफी के सुन्नी वक्फ बोर्ड के आवेदन को स्वीकार कर लिया है। अब 13 अक्टूबर को सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और इंतजामिया कमेटी की याचिका पर सुनवाई होगी।

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काशी में बाबा विश्वनाथ और ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर चल रहे विवाद के सम्बन्ध में सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने जिला जज की अदालत में याचिका दायर की है। इस याचिका में ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर चल रहे मुक़दमे को चुनौती दी गई है। याचिका को स्वीकार कर लिया गया है। हालाँकि, कोर्ट ने देर से याचिका दायर करने के लिए बोर्ड पर 3000 रुपए का जुर्माना भी लगाया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होने वाली है।

दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद अक्टूबर 13, 2020 को अगली सुनवाई की तारीख तय की गई है। स्वयंभू विश्वेश्वर महादेव बनाम अंजुमन इंतजामिया मामले में सुन्नी वक्फ बोर्ड ने 18 सितंबर को दूसरे प्रतिवादी के तौर पर शामिल होने के लिए कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था।

दावा है कि काशी विश्वनाथ मंदिर में भगवान शिव के जिस ज्योतिर्लिंग का दर्शन किया जाता है, उसका मूल स्वरूप वो नहीं बल्कि उस जगह पर मौजूद है जहाँ 350 वर्ष पहले मुगल बादशाह औरंगजेब के आदेश पर एक मस्जिद बना दी गई थी।हिंदू पक्ष ने अदालत में 351 वर्ष एक महत्वपूर्ण कागज जमा कराया है जो काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद विवाद की सुनवाई कर रही है।