आगर में बड़ा उलटफेर कर सकते हैं कांग्रेस के विपिन वानखेड़े

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भाजपा के गढ़ में इस बार मजबूत नजर आ रही कांग्रेस

भोपाल। भाजपा विधायक मनोहर ऊंटवाल के निधन के बाद खाली हुई आगर विधानसभा सीट भाजपा का गढ़ मानी जाती है। उपचुनाव में इस सीट को जीतने के लिए कांग्रेस ने अपना पूरा दम लगा दिया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने इसी सीट से उपचुनाव का शंखनाद किया है। दरअसल, इस बार यहां कांग्रेस मजबूत नजर आ रही है। इसलिए कांग्रेस प्रत्याशी विपिन वानखेड़े के लिए जीत दर्ज करने का बड़ा मौका है।

आगर सीट को लेकर अभी से सरगर्मी तेज हो गई है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही इस सीट को अपनी प्रतिष्ठा का विषय बना चुके हैं। भाजपा विधायक मनोहर ऊंटवाल के निधन के बाद रिक्त हुई सीट पर भाजपा-कांग्रेस दोनों ही दलों की निगाहें लगी हुई है। कांग्रेस यहां जीत हासिल कर बढ़त बनाने के हर संभव प्रयास करेगी जबकि भाजपा अपना सम्मान बचाने के लिए हर हाल में सीट बरकरार रखना चाहेगी।

वानखेड़े दूसरी बार प्रत्याशी
उपचुनाव में आगर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस ने दूसरी बार एनएसयूआईं प्रदेश अध्यक्ष विपिन वानखेड़े को प्रत्याशी बनाया है। विधानसभा चुनाव 2018 में वानखेड़े ने कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में भाजपा के कद्दावर नेता मनोहर ऊंटवाल को कड़ी टक्कर दी थी, वे मात्र 2490 मतों से पराजित हुए थे। जनवरी के अंतिम दिनों में विधायक ऊंटवाल का निधन होने से यह सीट रिक्त हो गई। आगामी महीनों में होने वाले चुनाव के चलते संगठन स्तर पर चुनावी तैयारी दोनों प्रमुख दलों में तेज हो गई है। भाजपा का प्रत्याशी अभी तय नहीं हुआ है। अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित इस सीट पर पार्टी के कई वरिष्ठ व कद्दावर नेता अपने निकटस्थ को प्रत्याशी बनाने की जुगत में लगे हैं। अब कांग्रेस ने अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया है। ऐसे में जल्द ही भाजपा के प्रत्याशी की घोषणा भी होने की पूरी संभावना बन गई है।

भाजपा का दबदबा
इस सीट पर भाजपा का दबदबा रहा है। भाजपा इस सीट पर 7 बार जीत हासिल कर चुकी है। बीते चार चुनावों से भाजपा इस सीट पर जीत हासिल करती आई है। 2018 में इस सीट पर भाजपा के मनोहर उंटवाल और कांग्रेस के विपिन वानखेड़े के बीच मुकाबला था। उंटवाल ने 2490 वोटों से कांग्रेस के प्रत्याशी वानखेड़े को हराया था। इस सीट पर 2003 से भाजपा का कब्जा है। मनोहर उंटवाल ने 2013 के चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के माधव सिंह को 28 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था। मनोहर उंटवाल को 83726 वोट मिले थे तो वहीं कांग्रेस के माधव सिंह को 54867 वोट मिले थे। 2008 के चुनाव की बात करें तो बीजेपी के लालजीराम माल्वीय को जीत मिली थी। उन्होंने कांग्रेस के रमेश चंद्र सूर्यवंशी को हराया था। इस चुनाव में लालजीराम को जहां 60065 वोट मिले थे तो वहीं रमेश चंद्र को 43331 वोट मिले थे।

मतदाताओं की बात करें तो इस विधानसभा में कुल 2 लाख 17 हजार 369 मतदाता हैं। इनमें एक लाख 2 हजार 9 पुरुष मतदाता तथा 1 लाख 5 हजार 355 महिला मतदाता हैं। साथ ही 5 मतदाता तृतीय लिंग से आते हैं। जहां विधानसभा के लिए होने वाले उपचुनाव में कांग्रेस ने अपने प्रत्याशी विपिन वानखेड़े को मैदान मे उतार दिया है वही भाजपा की तरफ से प्रत्याशी को लेकर अभी तक कोई घोषणा नही हुई है।

यह है जातिगत समीकरण
आगर विधानसभा क्षेत्र में बड़ौद तहसील सहित कानड़ टप्पा शामिल है। यहां मालवीय व रविदास समाज के मतदाताओं की संख्या सबसे ज्यादा है। इन दोनों ही समाज द्वारा अपनी जातिगत मतदाता संख्या को आधार बनाकर टिकट की मांग की जाती है। इस आरक्षित सीट पर 5 बार इन दोनों ही समाज के विधायक निर्वाचित होकर विधानसभा पहुंचे है।

आगर क्षेत्र में अजा में बलाई व मेघवाल मतदाता ज्यादा हैं। निर्णायक भूमिका सोंधिया,यादव मुस्लिम व अन्य पिछड़ी जातियों की मानी जाती रही है। आगर व बडोद तहसील के इस क्षेत्र में सौंधिया मतदाता बड़ोड क्षेत्र में अधिक है और भाजपा आगर की तुलना में बड़ोद तहसील से हर चुनाव में बढ़त बनाती रही है। इस सीट पर दोनों ही दल प्रत्याशी जातीगत समीकरण बैठाने के बाद ही तय करेंगे। परंपरागत रूप यह सीट भाजपा का अभेद किला रही है। आगर में उपचुनाव सहित अब तक हुए 16 निर्वाचन में कांग्रेस महज 4 बार जीत का स्वाद चख सकी है। वहीं खटीक, बैरवा व वाल्मिकी समाज के उम्मीदवार भी इस सीट पर विजय हुए है। बडौद क्षेत्र में पिछडा वर्ग में सबसे अधिक मतदाता सोंधिया समाज के है। आगर क्षेत्र में यादव समाज के मतदाता भी बड़ी संख्या में है। वहीं मुस्लिम समाज व अन्य पिछडा वर्ग की जातियां भी इस क्षेत्र में बडी संख्या में है।

अभी तक आगर विधानसभा
वर्ष                     विधायक
2018 मनोहर ऊँटवाल
2014 गोपाल परमार, भाजपा उप चुनाव
2013 मनोहर ऊंटवाल, भाजपा
2008 लालजीराम मालवीय, भाजपा
2003 रेखा रत्नाकर, भाजपा
1998 रामलाल मालवीय, कांग्रेस
1993 गोपाल परमार, भाजपा
1990 नारायणसिंह केसरी, भाजपा
1985 शंकुतला चौहान, कांग्रेस
1980 भूरेलाल फिरोजिया, भाजपा
1977 सत्यनारायण जटिया, जनता पार्टी
1972 मधुकर मरमट, कांग्रेस
1967 भूरेलाल फिरोजिया, जनसंघ
1962 मदनलाल भंडारी, जनसंघ
1957 मदनलाल भंडारी, जनसंघ
1952 सौभागमल जैन, कांग्रेस