3 नाबालिग गिरफ्तार इंटरनेट पर हैंकिंग सीखकर उड़ाये लाखों रुपए

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बिलासपुर, नाबालिग मन में इतना बड़ा खुराफात वह भी इंटरनेट पर हैंकिंग करते हुए दूसरों के खाते से लाखों रुपए निकाल लेना कोई सामान्य बात नहीं हैं।

पुलिस ने तीन ऐसे नाबालिगों को गिरफ्तार किया है जिन्होंने इंटरनेट पर हैकिंग सीखकर दूसरों के अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट कार्ड और वर्चुअल मनी बिटक्वाइन से लाखों रुपये की खरीददारी कर डाली। संगठित रूप से इन बालकों ने लड़कियों के नाम पर आईडी बनाकर सोशल मीडिया पर कई लोगों से भारी रकम वसूली। पुलिस का अनुमान है कि इन लोगों ने कम से कम 60 से 70 लाख रुपये की ठगी कर ली है। इनसे एक लाख रुपये की कीमत वाले 25 आईफोन, दो लैप टॉप, एक आईपैड, एक कार कई फर्जी सिम कार्ड आदि बरामद किये हैं। पुलिस का दावा है कि इतने सधे ढंग से नाबालिगों द्वारा ठगी को अंजाम देने का प्रदेश में यह पहला मामला है।

पुलिस अधीक्षक प्रशांत अग्रवाल को इस बारे में प्रारंभिक सूचना मिलने पर उन्होंने एएसपी ओपी शर्मा, कोतवाली सीएसपी अनिमेश बरैया, कोतवाली निरीक्षक कलीम खान और साइबर सेल की एक टीम बनाई। टीम ने जब छानबीन शुरू की तो दंग रह गई। ये सभी बच्चे नाबालिग हैं और बचपन से इन्हें इंटरनेट में महारत हासिल हो गई है। इसका इस्तेमाल कर उन्होंने ठगी कर लाखों रुपये कमाने का रास्ता निकाल लिया था।

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मोबाइल और कम्प्यूटर के जरिये ये बच्चे विभिन्न हैकिंग साइट्स तक पहुंचते थे और उनसे बकायदा अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट कार्ड का डिटेल, उस कार्ड के उपयोगकर्ता के आईपी एड्रेस के साथ खरीदा करते थे। वे प्राक्सी सर्वर का इस्तेमाल करते हुए आॅनलाइन शॉपिंग करते थे। अमेजॉन, फ्लिपकार्ट आदि को वे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा में भुगतान करते थे। विदेशी मुद्रा खरीदने के लिये वे भारतीय मुद्रा पेटीएम के माध्यम से जमा करते थे। पेटीएम संचालित करने के लिये भी उन्होंने ओडिशा, तमिलनाडु आदि के सिम से काम लेते थे। इस तरह उन्हें महंगे गैजेट्स बहुत कम दाम पर आॅनलाइन हासिल हो जाते थे। इसे वे यहां महंगे दाम पर बेचते थे। इनके पास से बरामद सभी आई फोन करीब एक लाख रुपये की कीमत के हैं।

इतना ही नहीं इन लोगों ने अज्ञात लड़कियों की तस्वीरों का इस्तेमाल कर फर्जी इंस्टाग्राम, फेसबुक आदि सोशल मीडिया में एकाउन्ट बना रखा था। इंस्टाग्राम पर लक्ष्मी-संता, लक्ष्मी-संता डॉट पीवीटी, श्रुति-जाटव आदि एकाउन्ट उन्होंने फर्जी तरीके से बना रखा है। लोगों से सोशल मीडिया पर दोस्ती कर उनसे अश्लील चैट करते थे और कई बार वीडियो भी बना लेते थे। बाद में इसे वायरल करने की धमकी देकर रुपये वसूला करते थे। कई बार आॅनलाइन सामान आने पर पैकेट खाली भेजने का आरोप लगाकर पैसा वापस मांग लेते थे जबकि सामान वे रख चुके होते थे। यहां तक कि आॅनलाइन फूड सप्लाई वाले खाने में भोजन का वजन कम होने, खाना नहीं होने आदि की शिकायत करके भी राशि वापस ले लिया करते थे। यही नहीं वे आॅनलाइन सामान भेजने का आॅर्डर भी लेकर रकम हड़प लेते थे और डिलवरी सक्सेस का मैजेस सामने वाले को भेज देते थे, जबकि उन्हें सामान मिला ही नहीं होता था।

मामले को सुलझाने में निरीक्षक सुनील तिर्की, उप निरीक्षक प्रभाकर तिवारी, सागर पाठक, मनोज नायक, एएसआई हेमन्त आदित्य, आरक्षक सरफराज खान, नवीन एक्का, दीपक यादव, अशफाक खान, तरूण केशरवानी, विकास यादव, बोधूराम कुम्हार, गोकुल जांगड़े, राजेश नारंग, राजेश यादव व संदीप शर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका रही।