2005 चुनाव के बाद से खिसकता चला गया वामदल का गढ़

0
2

भागलपुर 
बिहार और झारखंड की सीमा पर स्थित पीरपैंती विधानसभा (सुरक्षित) क्षेत्र सीपीआई का गढ़ माना जाता था, लेकिन 2005 के चुनाव के बाद वामदल का गढ़ ढहता चला गया। पीरपैंती विधानसभा सीट की चर्चा स्व. अम्बिका प्रसाद के बिना अधूरी मानी जाएगी। 49 साल तक स्व. प्रसाद के इर्द-गिर्द पीरपैंती विधानसभा क्षेत्र की राजनीति घूमती रही। वे इस क्षेत्र से छह बार निर्वाचित हुए तो छह बार दूसरे स्थान पर रहे। 2005 के अक्टूबर के चुनाव में तीसरे स्थान पर आने के बाद पार्टी का जनाधार सिमटता चला गया। 

पीरपैंती की 29 और कहलगांव प्रखंड की 18 पंचायतों से बना यह क्षेत्र झारखंड के साहिबगंज और गोड्डा से सटा हुआ है। इस सीट पर भाजपा की मजबूत इंट्री 2005 के अक्टूबर में हुए चुनाव में हो गयी थी। भाजपा के टिकट पर दिलीप कुमार सिन्हा दूसरे स्थान पर रहे, लेकिन पार्टी ने पहली जीत 2010 में दर्ज की। अमन कुमार पहली बार भाजपा से निर्वाचित हुए। 2015 के चुनाव में भाजपा ने प्रत्याशी बदल दिया। अमन की जगह ललन को प्रत्याशी बनाया, लेकिन चुनाव में राजद प्रत्याशी रामविलास पासवान की जीत हुई। सीपीआई के बाद इस क्षेत्र से सबसे अधिक बार जीत कांग्रेस की हुई थी। दो बार दिलीप सिन्हा कांग्रेस के टिकट पर निर्वाचित हुए और भागवत झा के मुख्यमंत्रित्व काल में बिहार सरकार में मंत्री भी बने। बाद में उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया। इस सीट पर जदयू की उपस्थित नहीं रही है।

रोचक होगा चुनाव
चुनाव को लेकर अभी गठबंधन की तस्वीर साफ नहीं हुई है। वामदल गठबंधन में शामिल होगा कि नहीं, यह तय नहीं है। मुख्य मुकाबला राजद और भाजपा के बीच होने वाला है। भाजपा की तरफ से पूर्व विधायक अमन कुमार और पिछले चुनाव में दूसरे स्थान पर रहे ललन कुमार ने तैयारी शुरू कर दी है। अन्य नेता भी टिकट की दावेदारी करेंगे। राजद के वर्तमान विधायक रामविलास पासवान को भी अन्य नेताओं से चुनौती मिल रही है।

गन्ना उत्पादन के लिए मशहूर
पीरपैंती गन्ना उत्पादन के लिए मशहूर है। जिले में सबसे अधिक गन्ना की खेती यहीं होती है। इसके अलावा आम, मक्का और मिर्च के उत्पादन में भी इस क्षेत्र की पहचान है। विधानसभा क्षेत्र स्थित धार्मिक स्थलों में बटेश्वर स्थान और योगीवीर पहाड़ी के अलावा दातासाह पीर मजार पर काफी संख्या में लोग पहुंचते हैं।

अनुसूचित जाति-जनजाति बहुल क्षेत्र
पीरपैंती 13 प्रतिशत अनुसूचित जाति और 12 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति के मतदाता हैं। 10 प्रतिशत मुस्लिम तो करीब इतने की यादव हैं। पांच प्रतिशत वैश्य हैं। 10 प्रतिशत कुर्मी, कोयरी और धानुक मतदाता हैं। सवर्ण मतदाता भी करीब 10 प्रतिशत हैं। 30% में अन्य जातियों के मतदाता हैं।

कुल मतदाता: 33,2,272
महिला: 15,5,228
पुरुष: 17,7,033

बूथ संख्या: 321 
पंचायत: 47 
वार्ड: 02 
अन्य: 11 

निर्वाचित विधायक
1951- सियाराम सिंह (कांग्रेस)
1957- रामजनम महतो (कांग्रेस)
1962- बैकुंठ राम (कांग्रेस)
1967-1977- अम्बिका प्रसाद (सीपीआई)
1980-1985- दिलीप कुमार सिन्हा (कांग्रेस)
1990-1995- अम्बिका प्रसाद  (सीपीआई)
2000-2005-  शोभाकांत मंडल (राजद)  
2010- अमन कुमार (भाजपा)
2015- रामविलास पासवान (राजद)