सेना को मिलेंगी और 72 हजार सिग सॉर असॉल्ट राइफल

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नई दिल्ली
ईस्टर्न लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर भारत-चीन तनाव के बीच रक्षा मंत्रालय ने इंडियन आर्मी के लिए 72 हजार और अमेरिकी सिग सॉर असॉल्ट राइफल की खरीद को मंजूरी दी है। रक्षा अधिग्रहण काउंसिल (डीएसी) की मीटिंग में सिग सॉर के लिए 780 करोड़ रुपये को मंजूरी दी गई। उधर रक्षा मंत्रालय ने नई रक्षा अधिग्रहण पॉलिसी को भी मंजूरी दी है। नई अधिग्रहण पॉलिसी के तहत सेना कई रक्षा उपकरण लीज पर भी ले सकते हैं इससे उन्हें खरीदने में लगने वाला वक्त बचेगा साथ ही कीमत भी कम होगी।

आर्मी को अमेरिकी इस असॉल्ट राइफल का पहला बैच यानी 72 हजार राइफल पहले ही मिल चुकी हैं और अब और 72 हजार राइफल मिलेंगी। यह आधुनिक असॉल्ट राइफल हैं और इन्हें पहले काउंटर टेररिजम ऑपरेशन वाले इलाकों में इस्तेमाल करने के लिए लिया गया था। फिलहाल एलएसी पर तैनात सैनिकों के पास भी यह असॉल्ट राइफल हैं। भारत ने फास्ट ट्रैक प्रॉक्योरमेंट (एफटीपी) के तहत यह असॉल्ट राइफल ली हैं। ये असॉल्ट राइफल मौजूदा इंसास राइफल को रिप्लेस करेंगी। इंसास को ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड ने बनाया था। सिग सॉर आधुनिक असॉल्ट राइफल हैं। इसका 16 इंच का बैरल है और कैलिबर 7.22 एमएम है। जबकि इंसास का कैलिबर 5.56 एमएम है। जितना ज्यादा कैलिबर उतना ज्यादा घातक। इंसास राइफल ऑटोमेटेड नहीं है जबकि सिग सॉर ऑटोमेटेड है। सिग सॉर का निशाना भी ज्यादा सटीक है। इंसास को रिप्लेस करने के लिए सिग सॉर के अलावा एके-203 राइफल भी आर्मी को मिलेंगी। इन्हें रूस के साथ मिलकर अमेठी की ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में बनाया जाना है।

सोमवार को डीएसी मीटिंग में कुल 2290 करोड़ रुपये के खरीद को मंजूरी दी गई। हाई फ्रिक्वेंसी रेडियो सेट और स्मार्ट एंटी एयर फील्ड वेपन की खरीद को भी मंजूरी मिली। हाई फ्रिक्वेंसी रेडियो सेट आर्मी की फील्ड यूनिट और एयरफोर्स को कम्युनिकेशन में मददगार साबित होंगे और इसके लिए 540 करोड़ रुपये को मंजूरी दी गई है। स्मार्ट एंटी एयरफील्ड वेपन नेवी और एयरफोर्स की फायर पावर को बढ़ाएंगे जिसके लिए 970 करोड़ रुपये पास किए गए हैं।

नई रक्षा अधिग्रहण पॉलिसी को भी मंजूरी
रक्षा मंत्रालय ने नई रक्षा अधिग्रहण पॉलिसी को भी मंजूरी दी है। इसमें गवर्नमेंट टू गवर्नमेंट डील में ऑफसेट की हटा दिया गया है। ऑफसेट के मुताबिक अगर डील गवर्नमेंट टू गवर्नमेंट है या सिंगल वेंडर से है तो विदेशी कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट के कुल अमाउंट का कम से कम 30 पर्सेंट इंडियन मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में इन्वेस्ट करना होता था। हाल ही में संसद में पेश की गई सीएजी रिपोर्ट में भी ऑफसेट दायित्व पूरा न करने को लेकर फाइटर एयरक्राफ्ट रफाल बनाने वाली कंपनी पर सवाल उठाए गए थे। नई अधिग्रहण पॉलिसी में यह भी कहा गया है कि आर्म्ड फोर्सेस कई इक्विपमेंट लीज पर भी ले सकते हैं इससे उन्हें खरीदने में लगने वाला वक्त बचेगा साथ ही कीमत भी कम होगी। आर्म्ड फोर्सेस ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट जैसे इक्विपमेंट लीज पर ले सकते हैं।