मुजफ्फरपुर बालिका गृहकांड  में आजीवान कारावास की सजा भुगत रहे ब्रजेश ठाकुर पर चलेगा मनी लांड्रिंग केस

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पटना  
मुजफ्फरपुर बालिका गृहकांड में आजीवान कारावास, सजा भुगत रहे दोषी, ब्रजेश ठाकुर के खिलाफ अब मनी लांड्रिंग का मामला चलेगा। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पटना की विशेष अदालत में उसकी संपत्ति के पूर्ण स्वामित्व और प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत मुकदमा चलाने के लिए चार्जशीट दायर कर दी है। ब्रजेश के साथ ही उसके घरवालों को भी अभियुक्त बनाया गया है। बालिका गृहकांड में इसी वर्ष फरवरी में दिल्ली की अदालत द्वारा सजा सुनाई गई थी।
 
बालिका गृहकांड में वर्ष 2018 में ब्रजेश ठाकुर के खिलाफ सबसे पहले मुजफ्फरपुर महिला थाना में केस दर्ज किया गया था। बाद में यह सीबीआई को सौंप दिया गया। इन दोनों एफआईआर को आधार बनाकर ईडी ने ब्रजेश ठाकुर के खिलाफ मनी लांड्रिंग की जांच शुरू की थी। जांच के दौरान पाया गया कि ब्रजेश के एनजीओ सेवा संकल्प एवं विकास समिति को सरकार और अन्य माध्यमों से जो फंड मिले उसका दुरुपयोग किया गया। 
अपने व परिवार के नाम पर अकूत संपत्ति बनाई: ब्रजेश ने अकूत संपत्ति बनाई। उसने खुद और परिवार की सदस्य कुमारी आशा, राहुल आनंद, मनोरमा देवी समेत अन्य के नाम पर चल-अचल संपत्ति खरीदी। यहां तक कि उसने एक बेटे की मेडिकल की फीस पर भी मोटी रकम खर्च की। 

कई संपत्तियां जब्त: जांच के बाद उसकी 7.3 करोड़ की संपत्ति को मार्च 2019 और 1.47 करोड़ की अन्य संपत्तियों को इसी महीने जब्त किया गया। मनी लांड्रिंग के जरिये बनाई गई संपत्ति के पूर्ण स्वामित्व और अभियुक्तों को सजा दिलाने के लिए ईडी के बुधवार को चार्जशीट दायर कर दी। दो दर्जन से ज्यादा प्लॉट जब्त किए गए हैं: ब्रजेश ठाकुर की जिन संपत्तियों को जब्त किया गया है, उसमें 25 प्लॉट शामिल हैं। इनमें 12 पर निर्माण कार्य भी हुआ है। इसकी कीमत कागजात के हिसाब से 6.50 करोड़ रुपये है। हालांकि बाजार भाव इससे कहीं ज्यादा है। ये संपत्तियां ब्रजेश, उसकी मां और बेटे के नाम पर मुजफ्फरपुर के अलावा समस्तीपुर में हैं। 

पटना का फ्लैट भी जब्त
ब्रजेश के मुजफ्फरपुर के आरएम पैलेस होटल और पटना के अगमकुआं स्थित एक फ्लैट को भी जब्त किया गया है। तीन गाड़ियों के अलावा 37 बैंक खातों में जमा 50 लाख रुपये व विभिन्न वित्तीय संस्थाओं में किए गए 17.5 लाख के निवेश के साथ ब्रजेश की संस्थाओं के नाम पर जो संपत्ति थी उसे भी ईडी ने जब्त किया है। 
7 साल तक के सश्रम कारावास का प्रावधान 
अधिकारियों के मुताबिक प्रिवेंशन ऑफ मनी लांंड्रिंग एक्ट के तहत अधिकतम 7 साल तक सश्रम कारावास का प्रावधान है। अदालत ब्रजेश ठाकुर को इस मामले में दोषी पाती है तो उसे सश्रम कारावास के साथ जुर्माना भी लगाया जा सकता है। जुर्माने की राशि क्या होगी, यह अदालत पर निर्भर करेगा। 

19 अभियुक्तों को सुनाई गई है सजा
मुजफ्फरपुर बालिका गृहकांड काफी सुर्खियों में रहा था। वहां रहने वाली बच्चियों ने यौन शोषणा का आरोप लगाया था जिसके बाद यह हंगामा हुआ। शुरू में इसकी जांच बिहार पुलिस कर रही थी। बाद में मामला सीबीआई को सौंप दिया गया। नवंबर 2018 में सीबीआई ने प्राथमिकी दर्ज की। इस मामले की सुनवाई बिहार से बाहर दिल्ली की अदालत में हुई थी। सुनवाई के बाद मुख्य अभियुक्त ब्रजेश ठाकुर समेत 19 लोगों को अदालत द्वारा सजा सुनाई गई। नवंबर, 2018 में इस केस की जांच सीबीआई ने संभाली थी और फरवरी 2020 में अदालत ने अपना फैसला सुना दिया। 

 छह से अधिक लड़कियों ने दुष्कर्म करने का आरोप लगाया 
ब्रजेश ठाकुर पर बालिका गृहकांड मामले में छह से अधिक लड़कियों ने दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था। ब्रजेश बालिका गृह की लड़कियों का यौन शोषण कराता था। वह बड़े अधिकारियों तक लड़कियों को पहुंचाता था। मुजफ्फरपुर और पटना में ब्रजेश ने अड्डे बना रखे थे। 

ब्रजेश ठाकुर ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर किया
एक दिन पहले मंगलवार को सीबीआई ने ब्रजेश ठाकुर द्वारा दिल्ली उच्च न्यायालय में दायर एक याचिका का विरोध किया। याचिका में ठाकुर ने उस पर लगाए गए करीब 32 लाख रुपये के जुर्माने को स्थगित करने की अपील की है। अदालत ने इस मामले की सुनवाई 15 सितंबर तक स्थगित कर दी है।