जीएसटी की वजह से दोहरा फायदा, आयकर भी ज्यादा आने लगा

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भोपाल
 वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने से आयकर में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दरअसल जीएसटी के कारण सारा कारोबार रिकार्ड पर आ गया, इसलिए इनडायरेक्ट के साथ डायरेक्ट टैक्स भी ज्यादा आने लगा। मप्र-छग में विभाग का राजस्व 12 फीसदी बढ़ा, अप्रैल में 250 करोड़ रुपए ज्यादा मिले। साल चुनौतीपूर्ण रहा, नई व्यवस्था के चलते परेशानियां भी आईं। धीरे-धीरे लोगों की मानसिकता भी बदलेगी।

मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ में कस्टम-सेंट्रल एक्साइज विभाग के सभी कमिश्नरेट में जीएसटी को लेकर विशेष व्यवस्थाएं की गईं हैं।

दोनों राज्यों के मुख्य आयुक्त हेमंत भट ने  पहले साल में कई तरह की चुनौतियां सामने आईं। जीएसटी काउंसिल ने कई संशोधन भी किए। कारोबारियों को जीएसटी के साथ एडजस्ट होने में ज्यादा समय नहीं लगा, बस मानसिकता बदलने की जरूरत है। हमारे यहां टैक्स न देने की मानसिकता है। धीरे-धीरे इसमें बदलाव लाने की जरूरत है।

मुख्य आयुक्त का कहना है कि ये सभी परेशानियां प्रारंभिक और अस्थाई ही हैं। उम्मीद है कि एक साल में नई व्यवस्था पूरी तरह आत्मसात कर ली जाएगी। पेश है मुख्य आयुक्त भट से बातचीत के अंश…।

मप्र-छग में जीएसटी लागू होने का एक साल कैसा रहा?

– आर्थिक सुधार की प्रक्रिया शुरू हुई है, कुछ समस्याएं थीं, जिन्हें दूर कर दिया गया है।

क्या व्यवस्था पूरी तरह दुरुस्त हो चुकी है?

– कारोबारियों की समस्याएं और शिकायतें कम होने लगीं हैं। इस साल दिसंबर में जीएसटी काउंसिल कुछ और निर्णय करेगी।

राजस्व के स्तर पर क्या फर्क सामने आया?

– बड़ा अंतर आया, अप्रैल में ही राजस्व में 12 फीसदी अर्थात करीब 250 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। यह बड़े बदलाव का संकेत है।

यह व्यवस्था इतनी फायदेमंद है तो विरोध के स्वर क्यों उठे?

– लोगों को समझाने में समय लगा। इसे 2010 में लागू होना था, सात साल की देर जरूर हुई।

जीएसटी के दायरे में कितने लोग आ चुके हैं?

– देश में 1.10 करोड़ लोग दायरे में आ चुके हैं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे 3 करोड़ करने का लक्ष्य दिया है।

नई व्यवस्था से सबसे बड़ा फायदा क्या नजर आया?

– इसकी वजह से आयकर में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, क्योंकि अब नंबर दो में कुछ भी नहीं बचा। कई वस्तुएं सस्ती हुईं कारोबारियों की सुविधा भी बढ़ी।

जीएसटी का भविष्य क्या देखते हैं?

– अब तो प्लेन उड़ चुका है, ऊपर ही ऊपर उड़ना है। आर्थिक सुधार नजर आने लगा है। विदेशी मुद्रा का भंडार ही देख लें।