आइए मिलकर खिलौने बनाएं, खेलेगा बच्चा- संवरेगा देश!: पीएम मोदी 

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नई दिल्ली
आज की तारीख में भारतीय बाजार में चीन के खिलौनों का बोलबाला है. लेकिन बीते जून महीने से गलवान घाटी में तनाव के बाद चाइनीज खिलौने की डिमांड में कमी आई है. जिसके बाद घरेलू उत्पादों की मांग बढ़ गई है. यही वजह है कि सरकार भी अब खिलौने के उत्पादन को घरेलू स्तर से लेकर वैश्विक स्तर तक बढ़ाने वाली है.  

खुद मोर्चे पर पीएम मोदी
खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी घरेलू खिलौने कारोबार को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय हैं, इसी महीने उन्होंने इससे जुड़े उद्योग-जगत के साथ एक बैठक की थी. उसके बाद अब 30 अगस्त को 'मन की बात' में पीएम मोदी इस उद्योग को बढ़ावा देने के संकल्प को दोहराया. उन्होंने कहा कि घरेलू कारीगर जो खिलौना बनाते हैं, उनमें भारतीयता की झलक होती है, हमारी संस्कृति की झलक होती है. इन कारीगरों और इससे जुड़े उद्योगों को प्रोत्साहित करने की जरूरत है.
 
बड़ा कारोबार
पीएम मोदी ने बताया कि ग्लोबल टॉय इंडस्ट्री 7 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक की है. 7 लाख करोड़ रुपयों का इतना बड़ा कारोबार, लेकिन भारत का हिस्सा इसमें बहुत कम है. उन्होंने कहा कि जिस राष्ट्र के पास इतने विरासत हो, परंपरा हो, क्या खिलौनों के बाजार में उसकी हिस्सेदारी इतनी कम होनी चाहिए? 

देश बनेगा आत्मनिर्भर
पीएम मोदी ने कहा कि देश को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास कर रहे हैं, हर क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाना है. इसमें सबका सहयोग चाहिए. भारत के कुछ क्षेत्र टॉय क्लस्टर यानी खिलौनों के केंद्र के रूप में भी विकसित हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि भारतीयों के इनोवेशन और सॉल्यूशन देने की क्षमता का लोहा हर कोई मानता है. 

घरेलू उद्योग पर फोकस
प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे चिंतन का विषय था- खिलौने और विशेषकर भारतीय खिलौने. हमने इस बात पर मंथन किया कि भारत के बच्चों को नए-नए Toys कैसे मिलें. भारत टॉय प्रोडक्शन का बहुत बड़ा हब कैसे बने? 

घरेलू कारोबार को बढ़ावा देने पर फोकस
घरेलू टॉय इंडस्ट्रीज को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार ने फरवरी 2020 में आयात शुल्क में 200 फीसदी की बढ़ोतरी की थी. भारत में खिलौने इंडस्ट्रीज का सालाना 15 फीसदी दर से ग्रोथ हासिल कर रहा है. फिलहाल देश में खिलौने की मांग को पूर्ति करने के लिए भारतीय कंपनियां तेजी से काम कर रही हैं. 

खिलौने का बड़ा कारोबार
मार्केट रिसर्च फर्म आईएमएआरसी के मुताबिक, भारत में खिलौने का कारोबार 10,000 करोड़ रुपये का है, जिनमें से संगठित खिलौना बाजार 3,500-4,500 करोड़ रुपये मूल्य का है. एक अनुमान के मुताबिक 2024 तक भारत में खिलौने का कारोबार 3.3 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच सकता है. भारत में खिलौने 85 से 90 फीसदी तक चीन से आयात होते हैं. इसके अलावा श्रीलंका, मलेशिया, जर्मनी और हॉन्गकॉन्ग से खिलौने आयात किए जाते हैं. 

मन की बात में खिलौने का जिक्र
पीएम मोदी ने रविवार को 'मन की बात' में कहा कि खिलौने जहां activity को बढ़ावा देते हैं, वहीं आकांक्षाओं को भी उड़ान देते हैं. खिलौने केवल मन ही नहीं बहलाते, खिलौने मन बनाते भी हैं और मकसद गढ़ते भी हैं. भारत के कुछ इलाके खिलौनों के केन्द्र के रूप में भी विकसित हो रहे हैं. जिसमें कर्नाटक के रामनगरम में चन्नापटना, आंध्र प्रदेश के कृष्णा में कोंडापल्ली, तमिलनाडु में तंजौर, असम में धुबरी और उत्तर प्रदेश का वाराणसी शामिल है.

पीएम मोदी की अपील
प्रधानमंत्री ने देश के उद्यमियों ने अपील करते हुए कहा कि आइए मिलकर खिलौने बनाएं. अब सभी के लिए लोकल खिलौनों के लिए वोकल होने का समय है. ऐसे खिलौने बनाएं, जो पर्यावरण के भी अनुकूल हों. उन्होंने कहा कि हमारे देश में इतने ideas हैं, इतने concepts हैं, बहुत समृद्ध हमारा इतिहास रहा है.