बीएचयू अस्पताल की चौथी मंजिल से कूदकर आत्महत्या करने वाले अंकित का वीडियो वायरल

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वाराणसी, बीएचयू अस्पताल की चौथी मंजिल से कूदकर जान देने वाले 21 वर्षीय अंकित का एक वीडियो वायरल हुआ है। इस वीडियो में अंकित चौथी मंजिल की खिड़की से कूदने की कोशिश कर रहा है। बताया जाता है कि उस वक्त लोगों के समझाने और गार्ड के मना करने पर वह नहीं कूदा था। यह वीडियो उसकी मौत से कुछ घंटे पहले का है। तब उसने दिन में ही कूदने की कोशिश की थी। इसके बाद भी बीएचयू प्रशासन ने कोई सतर्कता नहीं बरती।

रविवार की रात वाराणसी के बाबतपुर निवासी जितेंद्र पाठक के इकलौते बेटे 21 वर्षीय अंकित पाठक ने जान दे दी थी। एक हफ्ते पहले अंकित को बीएचयू अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया था। इस बीच अंकित की रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर उसे कोविड-19 वार्ड में भर्ती कराया गया।अंकित के जीजा नैपुरा डाफी निवासी किशन मिश्रा ने कहा था कि अस्पताल में घोर लापरवाही हुई है, इसके चलते परेशान होकर अंकित ने जान दे दी है। किशन ने बताया कि अंकित के इलाज में लापरवाही बरती गई है। उसने लापरवाही की शिकायत भी घर वालों से लगातार की थी।

युवक के जान देने के बाद उसका यह वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। इस वीडियो में अंकित अस्पताल की चौथी मंजिल की खिड़की से कूदने की कोशिश कर रहा है। नीचे खड़े मरीजों के परिजन उसे समझाने की कोशिश कर रहे हैं। वीडियो अंकित का ही इसकी पुष्टि मामा अमरनाथ ने की है। उनका कहना है कि अंकित ने दिन में ही कूदने की कोशिश की थी। इसके बाद भी बीएचयू प्रशासन ने सतर्कता नहीं बरती।

उधर पूरे मामले पर बीएचयू अस्पताल के एमएस प्रोफेसर एसके माथुर ने एक वीडियो जारी कर अपना बयान दिया है। उनका कहना है 16 अगस्त को मानसिक अस्वस्थता के कारण उसे आकस्मिक चिकित्सा कक्ष में लाया गया था। जहां संबंधित चिकित्सकों ने उसकी जांच कर होल्डिंग एरिया में रखा था। इलाज के दौरान नियमानुसार कोरोना की जांच के लिए 19 अगस्त को सैंपल लिया गया। उसकी रिपोर्ट 22 अगस्त को पॉज़िटिव आई। उसी दिन उसे कोविड वॉर्ड में शिफ़्ट कर दिया गया।

प्रोफेसर एसके माथुर के अनुसार भर्ती होने पर मरीज़ को साइकोसिस (मानसिक रोग) से ग्रसित पाया गया और उसका संबंधित चिकित्सकों द्वारा इलाज किया जा रहा था। इसी बीच मरीज़ का व्यवहार लगातार असामान्य था। वह बार बार अपना बेड छोड़कर दूसरे मरीज़ों के पास जाता रहा। इसी दौरान 23 अगस्त की सुबह मरीज़ ने खिड़की से कूदने का प्रयास किया। उस समय मरीज़ को समझा बुझाकर वापस बेड पर लाया गया। उसे दवा दी गई और उसकी काउंसिलिंग की गई। साथ ही सभी संबंधित विशेषज्ञों द्वारा तत्परता से इलाज किया जाता रहा।

प्रोफेसर के अनुसार मरीज़ को कोविड का हल्का संक्रमण था। उसके असामान्य व्यवहार को देखते हुए परिजनों को सुझाव दिया गया कि अस्पताल आकर उसे संयत करें या घर पर ही क्वॉरंटाइन कर दवाएं देकर उसका इलाज करें। मरीज़ के परिवार ने इससे इनकार कर दिया और कहा कि अस्पताल में ही उसका इलाज किया जाए। इस स्थिति में मरीज का इलाज सुचारू रूप से अस्पताल में चलता रहा। इसी दौरान 23 अगस्त की रात 11 बजे अस्पताल की खिड़की से उसने छलांग लगा दी। तत्काल उसे ट्रामा सेंटर लेकर गए। जहां चिकित्सकों ने पहले से मृत घोषित कर दिया।