…तो कांग्रेस पार्टी के बीच पैदा हुई खाईं पटने के बजाय और चौड़ी हो सकती है

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नई दिल्‍ली, कांग्रेस में असहमति का झंडा बुलंद किए नेता जिस ‘समिति’ को अपनी जीत बता रहे हैं, वह शायद नजर का फेर साबित हो। कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में चिट्ठी पर अच्‍छी-खासी बहस तो हो ही चुकी है। इस दौरान एक पैनल के ‘वादे’ की बात सामने आई थी जो मिलकर फैसले करता। लेकिन सूत्रों का कहना है कि मीटिंग में जो कुल हुआ, उसके हिसाब से ऐसा कोई पैनल नहीं बनना। यानी कांग्रेस के ‘बगावती’ नेता जिसे अपनी जीत बता रहे, वो असल में छलावा हो सकता है। इससे पार्टी के बीच पैदा हुई खाईं पटने के बजाय और चौड़ी हो सकती है।

अध्‍यक्ष को कमजोर नहीं करेगी कांग्रेस!
सूत्रों ने कहा कि ऐसे किसी पैनल पर सहमति नहीं बनी और न ही उसपर कोई कार्रवाई की बात हुई। दो बिंदुओं को जरूर नोट किया गया। कांग्रेस अध्‍यक्ष की मदद के लिए एक समिति बनाने की मांग थी लेकिन इसे सीडब्‍ल्‍यूसी की बैठक से जोड़कर नहीं देखा जा रहा। सूत्रों ने कहा, कुछ सदस्‍यों के हाथ में ताकत देकर कांग्रेस अध्‍यक्ष को कमजोर करने वाला पैनल नहीं बनाया जा सकता। ज्‍यादा से ज्‍यादा, सलाहकारों का एक समूह बनाया जा सकता है।

कांग्रेस में दो धाराएं आमने-सामने
एक सूत्र ने कहा, “ऐसी किसी समिति का कोई प्रस्‍ताव नहीं है। और अगर उस मांग पर कार्रवाई होती है जो यह एक सलाहकार बोर्ड होगा जो कि राजनीतिक दल में आम है।” कांग्रेस का यह रुख ऐसे वक्‍त में है जब खुलकर असहमति जाहिर करने वाले नेताओं में से कई- गुलाम नबी आजाद और कपिल सिब्‍बल अपने स्‍टैंड पर कायम हैं। उनकी मांग है कि सीडब्‍ल्‍यूसी के चुनाव हों।

पार्टी की तरफ से कथित पैनल को लेकर सफाई तब आई है जब उसे चिट्ठी लिखने वाले नेता अपने एजेंडा की जीत बता चुके थे। एक नेता ने कहा कि ‘सामूहिक निर्णय’ के सिद्धांत की सीडल्‍यूसी बैठक में भरसक आलोचना हुई। इस नेता ने कहा कि अध्‍यक्ष के अधिकारों को कम नहीं किया जा सकता।

वायरल वीडियो पर मौज ले रहे कांग्रेस
एक तरफ जहां गुलाम नबी आजाद चुनी गई सीडब्‍ल्‍यूसी की मांग पर अड़े हुए हैं। दूसरी तरफ, सोशल मीडिया पर पोस्‍ट किया गया एक वीडियो कांग्रेस नेताओं के बीच चुहल की वजह बन गया है। इस वीडियो में गुलाम नबी अध्‍यक्ष दिख रहे हैं जो 2018 में AICC सत्र में एक प्रस्‍ताव बढ़ा रहे थे जिसमें कांग्रेस अध्‍यक्ष को सीडब्‍ल्‍यूसी गठित करने का ‘अधिकार’ दिया गया था।