…तो संयुक्त राष्ट्र में फाइनेंशियल एक्शन टॉस्क फोर्स पाक को करेगा ब्लैकलिस्टेड

0
5

इस्लामाबाद, संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर मुद्दे पर भारत को घेरने की कोशिश कर रहे इमरान खान को अभी और बुरे दिन देखना बाकी है। फाइनेंशियल एक्शन टॉस्क फोर्स ने अगले महीने होने वाली अपनी बैठक में पाकिस्तान को ग्रे से ब्लैकलिस्ट में डालने का मन बना लिया है। एफएटीएफ के इस बात की तस्दीक पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने भी की है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान एफएटीएफ द्वारा ब्लैकलिस्ट किए जाने की कगार पर खड़ा है।

नवाज शरीफ ने भी की पुष्टि
रायटर्स की एक रिपोर्ट में शरीफ के हवाले से कहा गया है कि उन्हें घोटाले के झूठे आरोप में फंसाया गया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पाकिस्तानी सेना के जनरल यह नहीं चाहते थे कि अपने कार्यकाल के दौरान मैं इस्लामिक आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई करूं, जो भारत और अफगानिस्तान सीमा पर फौज की मदद से आतंकी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं।

अगले महीने होने वाली है एफएटीएफ की बैठक
शरीफ का बयान ऐसे समय में आया है, जब पाकिस्तान अगले महीने होने वाली बैठक में एफएटीएफ द्वारा ब्लैकलिस्टेड किए जाने से बचने की कोशिश कर रहा है। फरवरी में एफएटीएफ की बैठक में, पाकिस्तान ने अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद-रोधी वित्तपोषण मानदंडों का पालन करने के लिए अतिरिक्त चार महीने का समय लिया था, लेकिन चेतावनी दी गई थी कि अगर यह अनुपालन करने में विफल रहा तो उसे कालीसूची में डाल दिया जाएगा।

ईरान और उत्तर कोरिया पहले से हैं ब्लैकलिस्टेड
एफएटीएफ द्वारा ब्लैकलिस्ट में शामिल किए जाने पर पाकिस्तान को उसी श्रेणी में रखा जाएगा जिसमें ईरान और उत्तर कोरिया को रखा गया है और इसका मतलब यह होगा कि वह अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों जैसे आईएमएफ और विश्व बैंक से कोई ऋण प्राप्त नहीं कर सकेगा। इससे अन्य देशों के साथ वित्तीय डील करने में भी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।

2018 में डाला गया था ग्रे सूची में
पाकिस्तान को जून 2018 में ग्रे सूची में डाला था। अक्टूबर 2018 और फरवरी 2019 में हुए रिव्यू में भी पाक को राहत नहीं मिली थी। पाक एफएटीएफ की सिफारिशों पर काम करने में विफल रहा है। इस दौरान पाकिस्तान में आतंकी संगठनों को विदेशों से और घरेलू स्तर पर आर्थिक मदद मिली है।

क्या है एफएटीएफ
फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) एक अंतर-सरकारी निकाय है जिसे फ्रांस की राजधानी पेरिस में जी7 समूह के देशों द्वारा 1989 में स्थापित किया गया था। इसका काम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग), सामूहिक विनाश के हथियारों के प्रसार और आतंकवाद के वित्तपोषण पर निगाह रखना है। इसके अलावा एफएटीएफ वित्त विषय पर कानूनी, विनियामक और परिचालन उपायों के प्रभावी कार्यान्वयन को बढ़ावा भी देता है। एफएटीएफ का निर्णय लेने वाला निकाय को एफएटीएफ प्लेनरी कहा जाता है। इसकी बैठक एक साल में तीन बार आयोजित की जाती है।

क्या करता है एफएटीएफ
एफएटीएफ अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली को दुरुपयोग से बचाने के लिए राष्ट्रीय स्तर की कमजोरियों की पहचान करने के लिए काम करता है। अक्टूबर 2001 में एफएटीएफ ने धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के अलावा आतंकवादी वित्तपोषण से निपटने के प्रयासों को शामिल किया। जबकि अप्रैल 2012 में इनकी कार्यसूची में सामूहिक विनाश के हथियारों के प्रसार के वित्तपोषण का मुकाबला करने के प्रयासों को जोड़ा गया।एफएटीएफ अपने द्वारा दी गई सिफारिशों को लागू करने में देशों की प्रगति की निगरानी करता है। इसके अलावा मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादी वित्तपोषण की तकनीकों को खत्म करने की उपायों की समीक्षा करता है। इसके साथ ही एफएटीएफ विश्व स्तर पर अपनी सिफारिशों को अपनाने और लागू करने को बढ़ावा देता है।