सर्वे रिपोर्ट से भाजपा में खलबली, 12 मंत्रियों सहित 13 सिंधिया समर्थक पूर्व विधायकों पर हार का खतरा

0
3

संघ और इंटेलिजेंस के सर्वे ने बजाई खतरे की घंटी

मंत्रियों की साख बचाने सिंधिया ने संभाला मोर्चा

भोपाल। मप्र में उपचुनाव का बिगुल बजते ही भाजपा में भावी प्रत्याशियों की जीत-हार का आकलन होने लगा है। इसी कड़ी में संघ और इंटेलिजेंस की एक सर्वे रिपोर्ट ने भाजपा और सरकार को पसोपेश में डाल दिया है। दरअसल, इन दोनों रिपोर्ट में यह बताया गया है प्रदेश सरकार के 12 मंत्रियों सहित 13 सिंधिया समर्थक पूर्व विधायकों पर हार का खतरा मंडरा रहा है। इस रिपोर्ट के कारण ही भाजपा अभी तक अपने प्रत्याशियों की घोषणा नहीं कर पा रही है।
भाजपा सूत्रों के अनुसार, जिन मंत्रियों पर हार का खतरा मंडरा रहा है उनमें सबसे अधिक ग्वालियर-चंबल अंचल के आठ, मालवा के दो, बुंदेलखंड के एक और विंध्य क्षेत्र के एक मंत्री का नाम शामिल है। यानी प्रदेश की भाजपा सरकार में ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक जिन 16 पूर्व विधायकों को मंत्री बनाया गया है उनमें से 12 पर हार का खतरा मंडरा रहा है।

आधा दर्जन सिंधिया समर्थकों का टिकट खतरे में
उधर, संघ के सूत्रों का कहना है कि सिंधिया समर्थक जिन 13 पूर्व विधायकों पर हार का खतरा मंडरा रहा है, उनमें से आधा दर्जन की स्थिति बेहद कमजोर है। ऐसे में संघ ने भाजपा संगठन और सरकार को सुझाव दिया है कि उनको टिकट न दिया जाए। गौरतलब है कि ग्वालियर चंबल अंचल की 16 सीटों में से आठ सीटों पर शिवराज कैबिनेट के मंत्रियों की साख दांव पर लगी है। शिवराज सरकार में काबिज मंत्री उपचुनाव में जीते तो उनकी राजनीति चलती रहेगी। अगर इन मंत्रियों को नकामी मिली तो न सिर्फ इन मंत्रियों का राजनीतिक भविष्य संकट में आ सकता है बल्कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के रूतबे पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।

इन मंत्रियों को अग्नि परीक्षा से गुजरना पड़ेगा
उपचुनाव में जिन मंत्रियों और पूर्व विधायकों की उनके विधानसभा क्षेत्रा में स्थिति चिंताजनक है उनमें ग्वालियर-चंबल अंचल से एदल सिंह, प्रद्युम्न सिंह, इमरती देवी, महेंद्र सिसौदिया, ओपीएस भदौरिया, सुरेश राठखेडा, गिर्राज दंडौतिया और बृजेंद्र यादव शामिल हैं। वहीं मालवा से तुलसीराम सिलावट, हरदीप सिंह डंग, मनोज चौधरी, बंदेलखंड से गोविंद सिंह राजपुत और विंध्य से बिसाहूलाल सिंह का नाम शामिल है।

2018 में स्थिति
एदल सिंह: सुमावली विधानसभा सीट पर भाजपा के अजब सिंह को 13313 वोट से हराया था।
इमरती देवी: डबरा विधानसभा सीट से- भाजपा के कप्तान सिंह को 57446 वोट से हराया था।
प्रधुम्न सिंह: ग्वालियर विधानसभा सीट से- भाजपा के जयभान सिंह को 21044 वोट से हराया था।
महेंद्र सिंह सिसौदिया: बमौरी विधानसभा सीट से- भाजपा के बृजमोहन आजाद को 27920 वोट से हराया था।
ओपीएस भदौरिया: मेहगांव विधानसभा सीट से- भाजपा के राकेश शुक्ला को 25814 वोट से हराया था।
गिर्राज दंडोतिया: दिमनी विधानसभा सीट से, भाजपा के शिवमंगल सिंह तोमर को 18477 वोट से हराया था।
सुरेश राठखेडा: पौहरी विधानसभा सीट से, बसपा के कैलाश कुशवाहा को 7918 वोट से हराया था।
बृजेंद्र सिंह यादव: मुंगावली विधानसभा सीट से, भाजपा के केपी यादव को 2136 वोट से हराया था।

तुलसीराम सिलावट: इंदौर की सांवेर सीट पर तुलसीराम सिलावट भाजपा के राजेश सोनकर को 2,945 वोटों से हराया था।
हरदीप सिंह डंग: सुवासरा सीट पर हरदीप सिंह डंग ने भाजपा के राधेश्याम पाटीदार को मात्र 350 वोट से हराया था।
मनोज चौधरी: हाटपिपल्या सीट पर मनोज चौधरी ने भाजपा के दीपक जोशी को 13,519 से हराया था।
गोविंद सिंह राजपुत: राजपूत ने सुरखी में भाजपा प्रत्याशी सुधीर यादव को 21,418 वोट से हराया था।
बिसाहूलाल सिंह: अनूपपुर में बिसाहूलाल ने 11,561 वोट से भाजपा के रामलाल रतौले को हराया था।

इमरती हार जाएगी तब भी मंत्री रहेगी
महिला एवं बाल विकास मंत्री इमरती देवी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है जिसके बाद सवाल उठने लगा है कि क्या इमरती देवी को हार का डर सता रहा है? डबरा विधानसभा में चुनावी सभा के दौरान इमरती कह रही हैं कि अगर इमरती हार भी जाएगी तो भी मंत्री रहेगी। 32 सेकेंड का ये वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। चुनावी भाषण वाले इस वीडियों में इमरती कह रही हैं- हरिजन में मैने जनम लिया है, लेकिन इमरती देवी का दिल बहुत बड़ा है, आप जब भी चाहो आजमा लेना, इमरती देवी आपके लिए ढाल और तलवार दोनों बनकर खड़ी रहेगी। आपकी सुरक्षा के लिए इमरती देवी कभी किसी से नहीं डरती, इमरती देवी मैदान में घूमती है, ऐसे डराने वाले तो कई आगे पीछे घूमते हैं। उन्होंने आगे कहा कि मैं आपसे एक बात और कहना चाहती हूं अगर इमरती हार भी जाएगी तो भी मंत्री रहेगी।

हार का डर या कुछ और
पिछोर इलाके में जनसंपर्क सभा के दौरान इमरती देवी ने भाषण में बयान दिया तो खुद भाजपा की राजनीति में हलचल हो गई है। इमरती देवी के सामने कांग्रेस ने उनके समधी सुरेश राजे को मैदान में उतारा है। कांग्रेस का दावा है कि इमरती के खिलाफ बिकाऊ होने के आरोप और भाजपा में जाने के बाद दलित मतदाताओं का छिटकना परेशानी का सबब बन रहा है। माना जा रहा है कि इन हालातों में इमरती को अपनी हार का डर भी सता रहा है। यही वजह है कि इमरती अपने वोटरों को ये अहसास दिलाना चाहती है कि हार के बाद भी वो मंत्री बनी रहेगी। सितंबर में इमरती देवी ने दो ऐसे बयान दिए थे जिनकों लेकर सियासी बवाल मचा था। इमरती ने कहा था कि सत्ता और सरकार में इतना दम होता है कि कलेक्टर से कहे ये सीट चाहिए तो वो सीट जीत जाते हैं। वहीं एक सभा में इमरती ने कहा कि सीएम शिवराज और सिंधिया उनको डिप्टी सीएम बनाना चाहते है, अगर इमरती अच्छे वोट से जीती तो उनको डिप्टी सीएम बनाएंगे। इन बयानों के वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे।

सिंधिया ले रहे हैं हराने वाले से बदला!
गुना जिले की बमोरी विधानसभा क्षेत्र में 3 नवंबर को उपचुनाव होना है जिसकी आचार संहिता भी लागू हो गई है। आचार संहिता लागू होने से ठीक पहले बमोरी के भदौरा गांव में दो सड़कों का भूमि पूजन हुआ, जो भाजपा के लिए अब जी का जंजाल बनता दिख रहा है। भूमिपूजन की शिलालेख पट्टिका पर स्थानीय सांसद केपी यादव का नाम नहीं होने से उनके समर्थक यादव समुदाय ने भाजपा और ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। समुदाय के लोगों का आरोप है कि राजनीति के चलते गुना-शिवपुरी के सांसद का भाजपा के कार्यक्रमों में ही जानबूझकर अपमान किया जा रहा है। यादव समुदाय ने इसके खिलाफ आगामी विधानसभा चुनावों में बमोरी से भाजपा उम्मीदवार और प्रदेश के पंचायत मंत्री मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया को हराने के लिए कमर कसने का ऐलान कर दिया है। बता दें कि पिछले लोकसभा चुनाव में गुना से ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस के उम्मीदवार थे। भाजपा उम्मीदवार के रूप में के पी यादव ने उन्हें हराया था, लेकिन सिंधिया अब भाजपा में शामिल हो चुके हैं। उनके समर्थकों का मानना है कि सिंधिया के इशारे पर ही सांसद का बार-बार अपमान किया जा रहा है। इससे पहले भी जमरा गांव में शिलान्यास के दौरान सांसद का नाम शिलालेख पट्टिका पर नहीं था। समर्थकों के विरोध के बाद उनका नाम जोड़ा गया। लेकिन अब एक बार फिर से उनका नाम शिलालेख पट्टिका से गायब कर दिया गया। पट्टिका पर पंचायत मंत्री सिसोदिया के अलावा जिला अध्यक्ष गजेंद्र सिंह सिकरवार, गुना के विधायक गोपीलाल जाटव सहित सरपंच सचिव के नाम तक दर्ज थे। सांसद के समर्थकों का आरोप है कि अपमान करने के इरादे से जानबूझकर सिंधिया समर्थकों ने यादव का नाम कटवाया।

यादव समाज आक्रोशित
सांसद के अपमान से आहत समर्थक व यादव समुदाय अब खुलकर भाजपा के विरोध में स्वर उठाने लगा है। समर्थकों व समाज बंधुओं का कहना है कि बमोरी विधानसभा उपचुनाव में सिंधिया-समर्थक महेंद्र सिंह सिसोदिया को शिकस्त देने के लिए उन्होंने रणनीति बनाई है। यादव समुदाय के अलावा मिलने-जुलने वालों से भी मंत्री को वोट न देने की अपील वे गांव-गांव जाकर करेंगे। साथ ही, सिसोदिया द्वारा वन भूमि पर कराए जा रहे अवैध अतिक्रमण, गुंडागर्दी, जनपद के कार्यों में गोलमाल, घटिया निर्माण सामग्री का उपयोग आदि मुद्दों के निष्पक्ष जांच की मांग भी वे करेंगे। पूरे विधानसभा क्षेत्र में मंत्री का खुलकर विरोध शुरू हो गया है। थोड़े दिन पहले सिसोदिया ने यादव समुदाय के कद्दावर नेताओं को इक_ा कर समाज को संतुष्ट करने का प्रयास किया था, लेकिन अब एक बार फिर से सांसद का अपमान होने के बाद समर्थकों ने बीजेपी और खासकर सिंधिया के खिलाफ लामबंदी शुरू कर दी है।