बीएस-4 डीजल वाहनों के रजिस्ट्रेशन की सुप्रीम कोर्ट ने दी सशर्त अनुमति

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नई दिल्ली, सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि 1 अप्रैल से पहले खरीदे गए बीएस-4 डीजल वाहनों का जरूरी सेवाओं में इस्तेमाल के लिए रजिस्ट्रेशन किया जा सकता है। नगर निगमों और दिल्ली पुलिस को सार्वजनिक और जरूरी कार्यों के लिए इनके इस्तेमाल की अनुमति दी गई है। चीफ जस्टिस एसए बोबड़े की अगुआई वाली बेंच ने आदेश दिया कि 1 अप्रैल से पहले खरीदे गए डीजल वाहनों जिनका इस्तेमाल आवश्यक सार्वजनिक उपयोगिता के लिए किया जाएगा, बीएस-4 मानकों के आधार पर रजिस्ट्रर किया जाएगा और 1 अप्रैल के बाद खरीदे गए बीएस-6 वाहनों का रजिस्ट्रेशन बीएस-4 मानकों के आधार पर होगा। बेंच ने सभी शर्तों और नियमों का पालन करने पर सीएनजी वाहनों के रजिस्ट्रेशन की भी अनुमति दे दी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में बताया है कि बेंच के सामने तीन प्रकार के वाहनों सीएनजी वाहनों, बीएस-4 और बीएस-6 वाहनों के रजिस्ट्रेशन को लेकर आवेदन दिया गया था।

बेंच ने कहा कि ऐसे बीएस-4 डीजल वाहन जिन्हें नगर निगमों ने 1 अप्रैल से पहले खरीदा और कूड़ा उठाने जैसे सार्वजनिक उपयोगिता के लिए इस्तेमाल किया जाएगा उसने बीएस-4 के मानकों के आधार पर रजिस्टर किया जा सकता है। इससे पहले मार्च में फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स असोशिएशन (FADA) ने बीएस-4 वाहनों के रजिस्ट्रेशन के लिए एक महीने की और मोहलत मांगी थी।

एफएडीए ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए 31 मार्च की आखिरी को बढ़ाने की मांग की थी। संगठन ने कोरोना वायरस महामारी की वजह से लागू किए गए लॉकडाउन में बिक्री में गिरावट का तर्क दिया था। इसके बाद बेंच स्टॉक खाली करने के लिए समयसीमा में छूट दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि लॉकडाउन खत्म होने के 10 दिन के भीतर 10 फीसदी वाहन बेचे जा सकते हैं। गौरतलब है कि भारत ने 1 अप्रैल से दुनिया के सबसे साफ उत्सर्जन मानक की ओर कदम बढ़ा दिया। यूरो-4 से भारत यूरो-6 उत्सर्जन मानक को अपना लिया है।