अमेरिका से बेहतर है बालाघाट मुख्यालय की सडक?

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राहगीरो की लिये यातनाआें का कारण बन रही जर्जर सडक

rafi ahmad ansari
बालाघाट। शहर की सडको की जर्जर हालत अब आमजन एवं राहगीरो के लिये मुसीबतो का सबब बन रही है। मुख्य मार्गो में बने गढ्ढे दुर्घटना का कारण बन रहे है, बावजूद इसके नगर प्रशासन का इस ओर कोई ध्यान नही है। बैठक और मिटिंग मे हमेशा सडको को लेकर चर्चायें होती है लेकिन सडको की मरम्मत को लेकर कोई प्रयास नही किये जा रहे है। हनुमान चौक, आम्बेडकर चौक सहित अन्य स्थलो में सडके गढ्ढो में तब्दील हो चुकी है और अब डामर की परत धीरे धीरे उखड रही है। यह सबकुछ भारी वाहनो की आवाजाही का ही परिणाम है। हालाकि जिला प्रशासन ने भारी वाहनो की आवाजाही के लिये डेंजर रोड को बायपास मार्ग बनाने का विकल्प चुका, लेकिन इसके लिये बेसकिमती हरे भरे वृक्षो की बली चढाना भी उचित नही है। जिला प्रशासन व नगरपालिका प्रशासन को चाहिये है अपना अस्तित्व खो रही सडको का समय समय मरम्मत व सुधार कार्य करें।

हम सब जानते है कि शहर की सुदंरता सडको से बढती है, लेकिन सडक ही खस्ताहाल हो तो शहर की सुंदरता पर चार चांद लगाना संभव नही। हम सबने सुना है म.प्र शासन के सीएम शिवराज सिंह चौहान का ब्यान, कि उनके राज में म.प्र की सडके अमेरिका की सडको से लाख गुना अच्छी है। सडको पर राजनीति करने वाले शिवराज जी क्या जाने बालाघाट की सडको की दशा कैसी है। उन्हे बताना आवश्यक होगा कि बालाघाट मुख्यालय की सडके ही अपने खस्ताहाल पर आंसू बहा रही है और यहां सडको पर चलने वाले दुर्घटना का शिकार हो रहे है। चुनावी दंगल के परिणाम स्वरूप प्रदेश की कमान नाथ साहब के हाथ आई थी, उन्होने बालाघाट जिले को छिंदवाडा का मॉडल रूप देने का वादा किया था। पंरतु नाथ साहब किसानो के कर्जमाफी की दुनिया से उभरे नही और विधायको के गुट बदलते ही भाजपा सरकार का पल्ला भारी पड गया और पुन: शिवराज मामा के कांधो पर म.प्र की कमान आ गई। अभी उपचुनाव का दौर है, जहां एक बार फिर म.प्र में कमलनाथ और शिवराज इन दोनो में से किसकी सरकार बनेगी, इसका फैसला जनता के मत से होना बाकी है।

म.प्र के बालाघाट जिले में सडको की दुर्दशा सरकार की पोल खोल रही है। सरकार के नीचे, जिला प्रशासन और नगर प्रशासन है, लेकिन इनके अथक प्रयासो से शहर के हालात नही सुधर रहे है। यहां का जिला प्रशासन अभी गुलामी के चंगुल से उभरा नही है, तो वही संबधित जनप्रतिनिधि भी सडको के मुद्दो को लेकर आगे नही आ रहे है। जिस कारण जनता से सडको की दुर्दशा सहन नही हो पा रही है। स्थानीय जनता इस आशा में डूबी है कि नगर प्रशासन सडको को लेकर एक्शन में आयेंगा और सडको की मरम्मत कार्य करवायेगा। विगत कुछ वर्षो से देखा जा रहा है कि चंद घंटो की बारिश से नगर की सडके जलमग्न हो जाती है, इस ओर भी जनता ने विभिन्न प्रदर्शनो के माध्यम से नगर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया लेकिन इस ओर भी नगर प्रशासन ने कोई ध्यान नही दिया। वर्तमान में सडके भारी वाहनो की आवाजाही से खराब हो रही है। अब देखना यह है कि सडको को लेकर नगर प्रशासन आखिर कब चिंता जाहिर करता है या सडको के हालात यु ही बने रहेगें। वरिष्ठ अधिकारियों ने दिशा निर्देशन में वाहना की आवाजाही का रूट डायर्वट होना भी सडको की वर्तमान दशा का कारण है। पहले वारासिवनी की ओर से आने वाले भारी वाहन जयस्तंभ चौक से होकर आम्बेंडकर चौक की ओर आते थे, लेकिन बैठको में निर्णय बदला और वाहनो का रूट पुलिस लाईन चौक से सिविल लाईन होकर आम्बेडकर चौक कर दिया गया। इसी कारण एलआईसी भवन के सामने सडक धसक गई है, जो राहगीरों के लिये परेशानी का सबब बनकर उभर रही है।