सुरखी में स्टार प्रचारकों के बिना अकेले पड़े राजपूत

0
4

तीन बार रद्द हो चुका है सीएम का सुरखी दौरा, चौथे पर भी शंका

कांग्रेस उम्मीदवार पारुल साहू ने दमखम के साथ शुरू किया प्रचार

भोपाल। मध्य प्रदेश के सागर जिले की सुरखी विधानसभा क्षेत्र में चुनावी माहौर उफान पर है, लेकिन जैसे-जैसे उपचुनावों के औपचारिक ऐलान की तारीख नजदीक आ रही है, बीजेपी और कांग्रेस प्रत्याशियों के लिए स्टार प्रचारकों की कमी बड़ी मुश्किल बनती जा रही है। उपचुनाव वाले क्षेत्रों में लगातार शिलान्यास और भूमिपूजन कर रहे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान या प्रदेश सरकार पर लगातार हमले कर रहे पूर्व सीएम कमलनाथ अब तक सुरखी नहीं आए हैं।

शिवराज सिंह चौहान की सुरखी यात्रा में एक बार फिर बारिश अड़ंगा बनती दिख रही है। दरअसल, इससे पहले तीन बार बारिश के चलते सीएम का सुरखी दौरा रद्द हो चुका है। 15 जून को सुरखी के बांसा में उनकी सभा खराब मौसम के कारण टल गई तो जुलाई में डेट तय नहीं थी लेकिन 9 से 13 के बीच जैसीनगर उनकी सभा बारिश की भेंट चढ़ गई। वहीं 29 अगस्त को राहतगढ़ में होने वाली सभा में भी बारिश के कारण शिवराज सिंह का दौरा रद्द हो गया था। इस बार 25 सितंबर को जैसीनगर में मुख्यमंत्री की सभा को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं लेकिन मौसम ने अचानक करवट बदल ली है। बादलों ने एक बार फिर डेरा डाल लिया है। ऐसे में उनके आने को लेकर फिर से उहापोह की स्थति है।

रामशिला पूजन यात्रा के बाद ठंडे पड़े राजपूत
सुरखी से बीजेपी के टिकट पर प्रदेश के परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत उम्मीदवार हैं। क्षेत्र में रामशिला पूजन यात्रा आयोजित कर राजपूत कांग्रेस के मुकाबले बढ़त की हालत में थे, लेकिन इसके बाद से उनका प्रचार अभियान धीमा पड़ गया है। कांग्रेस से बीजेपी में आए राजपूत के लिए पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह की भी कमी दिख रही है। राजपूत की सारी उम्मीदें अब 25 तारीख को होने वाले सीएम के चुनावी दौरे पर टिकी हैं।

दमखम के साथ मैदान में उतरी कांग्रेस
दूसरी ओर, बीजेपी से कांग्रेस में आई पूर्व विधायक पारुल साहू पूरे दमखम के साथ प्रचार अभियान में उतर गई हैं। कांग्रेस की ओर से भी कोई स्टार प्रचारक अब तक यहां नहीं आया, लेकिन विधायक रहते हुए पारुल ने सुरखी में कई विकास कार्य कराए थे। वे इसके सहारे लोगों से वोट मांगने निकल रही हैं। माना जा रहा है कि पारुल साहू के साथ बीजेपी के कुछ स्थानीय नेता भी कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं, जो राजपूत के रास्ते में और मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं।