दोबारा पार्टी को खडा करने के लिए राहुल गांधी उपयुक्त नेता नहीं: वरिष्ठ कांग्रेस नेता

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राहुल गांधी के नेतृत्व में 2024 का लोकसभा चुनाव जीतना काफी मुश्किल

नई दिल्ली। पार्टी के कई नेताओं के द्वारा कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखे जाने के बाद अंदरुनी कलह खुलकर सामने आ चुकी है। वहीं, सोनिया गांधी को पत्र लिखने वालों में शामिल एक नेता ने अब राहुल गांधी को लेकर बड़ा सवाल उठाया है। नाम न बताने की शर्त पर कांग्रेस नेता ने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में 2024 का लोकसभा चुनाव जीतना काफी मुश्किल है। राहुल गांधी के खिलाफ फिर उठी आवाज एक मीडिया हाउस को दिए इंटरव्यू में कांग्रेस नेता ने कहा कि पिछले दो चुनावों में कांग्रेस को बडी हार मिली है। ऐसे में दोबारा पार्टी को खड़ करने के लिए राहुल गांधी उपयुक्त नेता नहीं हैं।

2024 में मिलेगी जीत?
चिट्ठी लिखने वाले एक नेता ने नाम न बता की शर्त पर कहा, ‘ हमलोग इस हालत में नहीं है कि ये कह सके कि 2024 के चुनाव में राहुल गांधी के नेतृत्व में हमें 400 सीटों पर जीत मिलेगी. हमें इस बात का एहसास होना चाहिए कि 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में पार्टी को जरूरत के मुताबिक सीटें नहीं मिल पाई हैं.’ बता दें कि 2019 के लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद सोनिया गांधी अंतरिम अध्यक्ष बनीं.

बड़े बदलाव की जरूरत
इस नेता ने भी कहा कि चिट्ठी लिखने वालों में से ज्यादातर का कहना है कि वो लंबे वक्त से राजनीति में हैं और वो पार्टी के लिए काम करना चाहते हैं. उन्होंने ये भी कहा कि वे सब सोनिया गांधी का सम्मान करते हैं. लेकिन पार्टी में बड़े बदलाव की जरूरत है. उन्होंन कहा, ‘नागपुर से लेकर श‍िमला तक पार्टी के सिर्फ 16 सांसद हैं, जिनमें से भी 8 अकेले पंजाब से हैं. हमें मान लेना चाहिए कि हम भारत में हैं और वास्तविकता कुछ और है. अगर कोई बैठक होती है तो मैं इस मुद्दे पर अपने विचार जरूर रखूंगा.’

सोनिया का नेताओं को कड़ा संदेश
बता दें कि जिन 23 असंतुष्ट नेताओं ने अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को चिट्ठी लिख कर पार्टी में बड़े बदलाव की मांग की थी वो अब निशाने पर आ गए हैं. दरअसल  कांग्रेस ने संसद से जुड़े विषयों पर पार्टी की रणनीति तय करने के लिए 10 सदस्यीय समिति बनाई. इसमें दोनों सदनों के पांच-पांच सदस्यों को शामिल गया है. लेकिन इस समिति से कई बड़े नेताओं को नजरअंदाज कर दिया गया है.