PFI और SDPIको कर्नाटक में बैन करने की सैद्धांतिक सहमति

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बेंगलुरु
कर्नाटक सरकार कई मौकों पर कट्टर इस्लामिक संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) और उसके राजनीतिक दल सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) को बेंगलुरु में हुई हिंसा की जिम्मेदार मानती रही है। राज्य सरकार ने दोनों संगठनों पर बैन लगाए जाने की गुरुवार को सैद्धांतिक सहमति दे दी है।

हालांकि बैन लगाने का अंतिम फैसला कानूनी प्रक्रिया और इस मामले से जुड़े तमाम पहलुओं की विस्तृत जांच के बाद ही लिया जाएगा। कैबिनेट ने पुलिस से इस मामले में रिपोर्ट मांगी है जिसमें संगठन के खिलाफ पर्याप्त सबूत हों। इसके अलावा दंगाइयों से ही दंगे में हुए पूरे नुकसान की भरपाई के लिए तैयारी की जा रही है।

'जांच रिपोर्ट के बाद करेंगे कड़ी कार्रवाई'
कानून और संसदीय कार्य मंत्री जेसी मधुस्वामी ने कहा, 'कैबिनेट बैठक में दंगों पर चर्चा हुई। इसके साथ ही जिस संगठन का जिक्र किया जा रहा है उस पर भी चर्चा हुई। लेकिन हमने अभी कोई एक फैसला नहीं लिया है। अभी पुलिस की तरफ से भी न ऐसा कोई निवेदन आया है और न ही हमने विस्तृत जांच रिपोर्ट देखी है। हम उनके खिलाफ पुलिस की जांच रिपोर्ट देख लें, फिर निश्चित तौर पर कार्रवाई करेंगे।'

PFI पर बैन की मांग, एकमत हैं बीजेपी-कांग्रेस नेता
बीजेपी के वरिष्ठ नेता और मंत्रियों समेत कांग्रेस के पदाधिकारी भी पीएफआई पर प्रतिबंध लगाए जाने की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि पिछले साल मैंगलोर में हुई हिंसा में भी इसी कट्टरपंथी संगठन का हाथ था। कानून मंत्री मधुस्वामी ने कहा कि 11 अगस्त को हुई हिंसा में एसडीपीआई और पीएफआई की सक्रिय भूमिका के लिए उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई के सभी विकल्प तलाशे जा रहे हैं।

'दंगाइयों से ही होगी वसूली, जरूरी हुआ तो करेंगे कानून में संशोधन'
कानून मंत्री ने कहा, 'हम यह भी देख रहे हैं कि क्या प्रिवेंशन ऑफ डैमेज टू पब्लिक प्रॉपर्टी ऐक्ट के प्रावधान दंगों में हुए नुकसान की वसूली और दोषियों को सजा देने के लिए पर्याप्त हैं? अगर जरूरत हुई तो जरूरी संशोधन भी किए जाएंगे जिससे दंगाइयों से ही दंगे में हुए नुकसान की पूरी भरपाई कराई जा सके।' राज्य सरकार उत्तर प्रदेश सरकार के बनाए कानून का भी अध्ययन कर रही है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि नुकसान की भरपाई के मामले में यूपी सरकार के कानून के प्रावधान बेहद सख्त हैं।

बेंगलुरु में 11 अगस्त को फैली थी हिंसा
बता दें कि बेंगलुरु में कांग्रेस विधायक के एक रिश्तेदार द्वारा सोशल मीडिया पर कथित रूप से एक विवादास्पद पोस्ट डालने के बाद 11 अगस्त की रात डी जे हल्ली और आसपास के इलाकों में हुई हिंसा के बाद पुलिस द्वारा चलाई गई गोलियों से तीन लोग मारे गए थे और एक घायल ने बाद में दम तोड़ दिया था। इस हिंसा में दंगाइयों ने पुलकेशीनगर विधायक आर श्रीनिवास मूर्ति का आवास और डी जे हल्ली पुलिस थाना फूंक दिया था। साथ ही कई निजी और पुलिस वाहनों को आग के हवाले कर दिया।