एक बार फिर सडक पर उतरा आदिवासीयों का जनसैलाब

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आदिवासीयों के हित में संवेदनशील नही सरकार- आरोप

rafi ahmad ansari
बालाघाट। आदिवासी समाज के विभिन्न संगठनो ने आज एकता का परिचय देते हुए आदिवासी समाज के हित से जुडी मांगो को लेकर सडक पर उतरकर जनआंदोलन किया किया। जहां भारी तादाद में आदिवासी समाज के लोग शामिल हुए। जहां जनआंदोलन उत्कृष्ठ मैदान से प्रारंभ होकर कलेक्ट्रेड कार्यालय में समाप्त हुआ। इस दौरान सुरक्षा की दृष्टि से चप्पे चप्पे पर पुलिस बल भी तैनात रहा।

उल्लेखनीय है कि पूर्व में विगत 15 सितम्बर को सामाजिक संगठनो के माध्यम से आंदोलन किया गया था जहां 9 सुत्रीय मांगो के संदर्भ में प्रदेश सरकार के नाम प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपा गया था। जहां उक्त मांगो को पूर्ण करने हेतू एक माह का अल्टीमेंटम भी दिया गया था। लेकिन एक माह बाद भी उनकी मांगो पर कोई कार्यवाही नही हुई। जिससे नाराज आदिवासी समाज एक बाद फिर सडक पर उतरा और आंदोलन को अंजाम दिया। उनकी मांगो को लेकर शासन प्रशासन की ओर से कोई सुचना या अभिव्यक्ति प्राप्त नही हुई थी जिससे आदिवासीयों में आक्रोश बढ गया। इस आंदोलन के पूर्व आदिवासी संगठनो ने एक बार फिर प्रशासन को चेतावनी दी थी। जहां इसी तारतम्य में आज उनके द्वारा आंदोलन किया गया और अपनी मांगो को बरकरार रखते हुए आगामी समय में पुन: प्रदेश स्तर आंदोलन की चेतावनी दी है।

आज 15 अक्टूबर को किये गये आंदोलन में समाज हित में म.प्र व छ.ग राज्य के आदिवासी संगठन के लोग शामिल हुए। जहां एक बडी जनशक्ति और जन सैलाब देखने को मिला। जहां आदिवासी समाज के बेनर तले सडक पर उतरकर लोकतांत्रित तरिक से आदिवासीयों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की। आदिवासी समाज का आरोप है कि वन विभाग की कु्ररता भी आदिवासी लोगो पर बढती जा रही है। वन विभाग, वनक्षेत्रो के निकट बसे गांवो के लोगो पर वन अधिनियम 2006, 2012 के तहत कार्यवाही करके ग्रामीणो का शोषण कर रहा है। भू-आंचार सहिंता के तहत प्रोजेक्ट के नाम पर विस्थापन कार्यवाही की जा रही है, आदिवासीयों को खदेडा जा रहा है, जिससे गांव समाप्त हो रहे है। इससे आदिवासी ग्रामीण भी प्रभावित हो रहे है। एक्ट्रोसिटी एक्ट का पुलिस कोई पालन नही कर रही है। आदिवासीयों को अनेको योजनाओं के लाभ से वंचित होना पड रहा है। एक बार आदिवासी समाज ने प्रशासन व सरकार को चेतावनी दी है कि यदि अब मांग पूरी नही हुई तो अब की बार आवेदन,निवेदन और दनादन (आर-पार)की लडाई होगी।

मृतक झामसिंह के परिवार को न्याय दिलाने आदिवासी समाज ने सौंपा ज्ञापन— बालाघाट जिले के गढ़ी थाना क्षेत्र अंतर्गत बसपहरा के जंगल में 06 सितम्बर 2020 को झाम सिह धुर्वे नामक ग्रामीण की मृत्यु की जांच के संबंध में आदिवासी समाज द्वारा कलेक्टर को ज्ञापन सौपा गया है और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की गई। कलेक्टर ने इस दौरान आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर उनकी मांगों को सुना और बताया कि बसपहरा में मृत झामसिंह धुर्वे की मृत्यु की दंडाधिकारी जांच के आदेश कर दिये गये हैं और अपर कलेक्टर बैहर श्री शिवगोविंद मरकाम को जांच का जिम्मा सौंपा गया है। मध्यप्रदेश शासन द्वारा इस घटना की सीआईडी जांच भी कराई जा रही है। शासन के नियमों के अनुसार मृतक के परिवार को राशि प्रदान की जायेगी और इसकी प्रक्रिया प्रारंभ है। मृतक के एक पुत्र को पुलिस विभाग में आरक्षक के पद पर नियुक्ति दी जा रही है। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा भी मृतक के एक पुत्र को नौकरी दी जा रही है। मृतक के पुत्रों को शीघ्र ही नियुक्ति आदेश भी प्राप्त हो जायेंगें। आदिवासी समाज द्वारा जो भी मांगे ज्ञापन के माध्यम से सामने रखी गई हैं, उन्हें कार्यवाही के लिए शासन को भेजा जा रहा है। इस घटना की जांच रिपोर्ट में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जायेगा, उसके विरूद्ध कार्यवाही की जायेगी। आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों से चर्चा के दौरान पुलिस अधीक्षक श्री अभिषेक तिवारी भी मौजूद थे।