20.25 लाख की लागत से 405 शालाओं में बनाई गई ”पोषण वाटिका”

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बच्चों को मिल रही है पौष्टिक खाद्य सामग्री

rafi ahmad ansari
बालाघाट। जिले में मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम के अंतर्गत शालाओं में बनाई गई पोषण वाटिका आकर्षण का केन्द्र बन रही है। पोषण वाटिका से शालाओं के बच्चों को पौष्टिक खाद्य सामग्री मिल रही है। पोषण वाटिका से बच्चों में बागवानी एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता भी आ रही है।

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जागत गांव डाट काम

जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती आर उमा माहेश्वरी ने बताया कि मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम के अंतर्गत जिले की कुल 2751 प्राथमिक व माध्यमिक शालाओं में से सेम्पल के तौर पर 405 शालाओं की बगिया (पोषण वाटिका) बनवाई गई है। कुछ शालाओं में इसे मां की बगिया का नाम भी दिया गया है। पोषण वाटिका में जैविक सब्जियां एवं फलदार पौधों का विगत वर्षों में रोपण कराया गया था जो वर्तमान में फल फुल रहें है। जिससे बच्चों को जैविक खाद्य पदार्थ उपलब्ध हो रहा है।

प्रत्येक पोषण वाटिका का निर्माण 05 हजार रुपये की लागत से किया गया है। इस तरह जिले में 405 पोषण वाटिका पर 20 लाख 25 हजार रुपयें का व्यय किया गया है। मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती माहेश्वरी ने बताया कि आने वाले समय में जिले की शत प्रतिशत शालाओं में (पोषण वाटिका) मां की बगिया का निर्माण कराया जावेगा। बच्चों को बागवानी एवं पर्यावरण के प्रति जागरूक करने में इससे मदद मिल रही है।

इन पोषण वाटिकाओं से प्रायोगिक रूप से बच्चों को जैविक बागवानी के लिये प्रेरित करते हुए उन्हें पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। शालाओं की पोषण वाटिका में जो सब्जियां उत्पादित हो रही वह बच्चों एवं रसोईयों में बांटी जा रही है।

स्कूली बच्चों को घर-घर जाकर दिया जा रहा है सूखा राशन

इसी क्रम में सूखा राशन जिसमें दाल, चांवल, गेहू एवं तेल का वितरण कोविड-19 को ध्यान में रखते हुऐ घर-घर जाकर वितरण किया गया यह कार्य भी निरंतर जारी है। इससें बच्चे एवं उनके अभिभावक काफी खुश है। कोविड के इस दौर में बच्चों को घर पर ही खाने के लिए भर पेट पोष्टिक भोजन उपलब्ध हो रहा हैं।

जिले के प्राथमिक शाला के 84 हजार 757 एवं माध्यमिक शाला के 59 हजार 238, इस प्रकार कुल एक लाख 43 हजार 995 बच्चों को सूखा राशन वितरण सफलता पूर्वक कराया जा रहा है। महिलाओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए सभी स्कूलों में भोजन पकाने के लिए गैस चुल्हा-सिलेन्डर उपलब्ध कराया गया है। जिले के 5300 रसोईया एवं 2751 स्व-सहायता समूहों को घर-घर जाकर सूखा राशन वितरण करने का कार्य दिया गया है और उनके द्वारा यह कार्य पूरी जिम्मेदारी के साथ किया जा रहा है।