अब गांवों का बनेगा मास्टर प्लान, 10 जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के तहत दो विभाग करा रहे सर्वे

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भोपाल। शहरों की तर्ज पर अब गांवों का भी मास्टर प्लान बनेगा। घर एवं भूखंडों का नक्शा तैयार होगा और ग्रामीणों को उनका मालिकाना हक भी मिलेगा। इसके लिए ग्रामीण आबादी सर्वेक्षण योजना के तहत प्रदेश के 10 जिलों में पायलट प्रोजेक्ट पर बसाहटों का सर्वे काम शुरू होने जा रह है। भारतीय सर्वेक्षण विभाग द्वारा पंचायत एवं ग्रामीण विकास और राजस्व विभाग के माध्यम से यह कार्य किया जाएगा। भारतीय सर्वेक्षण विभाग द्वारा आगामी जून माह के प्रथम सप्ताह में हरदा एवं डिंडोरी जिले के कुछ गाँव में कार्य प्रारंभ किया जाना प्रस्तावित है। इस साल प्रदेश के 10 पॉयलेट जिलों का चयन किया गया है, शेष 43 जिलों का सर्वे द्वितीय एवं तृतीय वर्ष में क्रमबद्ध किया जाएगा। प्रथम चरण में शामिल 10 जिलों मुरैना, श्योपुर, सागर, शहडोल, खरगौन, विदिशा, भोपाल, सीहोर, हरदा और डिंडोरी जिले के 10 हजार 553 राजस्व गाँव शामिल किये गये है। इन सभी राजस्व गाँवों में आबादी भूमि के सर्वे का कार्य तीन चरणों में किया जाएगा।

हितधारकों को होने वाले लाभ
ग्रामीण आबादी सर्वेक्षण योजना में ग्रामीण सम्पत्तियों का अधिकार अभिलेख होगा, प्रत्येक सम्पत्ति धारक को उसकी सम्पत्ति का स्वामित्व प्रमाण-पत्र दिया जाएगा। सम्पत्तियों पर बैंक से ऋण लेना आसान होगा। सम्पत्तियों के पारिवारिक विभाजन, सम्पत्ति हस्तांतरण की प्रक्रिया सुगम होगी और पारिवारिक सम्पत्ति के विवाद कम होंगे।

संपत्तियों के तैयार होंगे अभिलेख
ग्रामीण आबादी सर्वेक्षण योजना का मुख्य लक्ष्य ग्रामीण सम्पत्तियों का अधिकार अभिलेख तैयार करना और प्रत्येक सम्पत्ति स्वामी को उसकी सम्पत्ति का स्वामित्व अभिलेख उपलब्ध करवाना है, जो उसके स्वत्व तथा स्वामित्व का प्रमाण होगा। आबादी सर्वे अन्तर्गत केवल उन सम्पत्ति धारकों का अधिकार अभिलेख तैयार किया जाएगा, जो मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता-1959 (यथा संशोधित-2018) के लागू होने की तिथि 25 सितम्बर 2018 को आबादी भूमि पर काविज थे, अथवा जिन्हें इसी तिथि के बाद विधिपूर्वक आबादी भूमि में भू-खण्ड का आवंटन किया गया हो।