अब ड्रैगन ने भूटान की भारत से लगी सीमा की जमीन पर किया दावा

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भारत के करीबी दोस्तों को परेशान करने की चीन की नई रणनीति

नई दिल्ली, लद्दाख में भारत के सामरिक, आर्थिक और कूटनीतिक जवाब से घबराए चीन ने अब एक नई चाल चली है और अब वह भारत के करीबी दोस्तों को परेशान करने की कोशिश कर रहा है। ड्रैगन ने भूटान की भारत से लगती सीमा वाले जमीन के टुकड़े पर पर दावा कर दिया है। दुनियाभर में चौतरफा घिरे पेइचिंग के इस कदम को भारत पर दबाव बनाने के तौर पर देखा जा रहा है। दरअसल, इसे भारत के करीबी दोस्तों को परेशान करने की चीन की नई रणनीति भी माना जा रहा है।

झूठ बोला चीन, कहा, भूटान के साथ चल रहा है सीमा विवाद
शनिवार को चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा था कि चीन और भूटान की सीमा का कभी निर्धारण नहीं हुआ है और पूर्वी, मध्य और पश्चिमी क्षेत्र में लंबे समय से सीमा विवाद चला आ रहा है। चीन ने भारत की ओर इशारा करते हुए कहा कि किसी तीसरे पक्ष को चीन-भूटान सीमा विवाद में उंगली नहीं उठानी चाहिए। चीन और भूटान ने वर्ष 1984 से लेकर 2016 के बीच में अब तक 24 दौर की बातचीत की है। इस दौरान बातचीत में केवल पश्चिम और मध्‍य इलाके के विवाद पर चर्चा हुई थी।

बता दें कि 29 जून को चीन ने भूटान के ग्‍लोबल इन्‍वायरमेंट फसिलिटी (GEF) काउंसिल से मदद वाले आवेदन पर विरोध जताया था। भूटान ने यह मदद देश के पूर्वी हिस्से में स्थित वन्यजीव अभयारण्य के लिए मांगी थी। चीन ने अपने विरोध में कहा कि यह विवादित हिस्सा है।

नहीं रहा है कभी विवाद
हालांकि चीनी विरोध के बाद भी भूटान को मदद मिली लेकिन चीन के दावे को धमकी के तौर पर देखा जा रहा है। क्योंकि दोनों देशों के बीच पूर्वी इलाके में कभी भी सीमा विवाद को लेकर बातचीत नहीं हुई थी। चीन के इस दावे के बाद भूटान ने नई दिल्ली स्थित चीनी दूतावास को कड़े शब्दों में डिमार्श भेजा है। भूटान ने कहा, ‘साकतेंग वन्‍यजीव अभयारण्य भूटान का अभिन्‍न और संप्रभु हिस्‍सा है।’

भारत के करीबी मित्र भूटान पर दबाव

सूत्रों का मानना है कि चीन का यह दावा भारत के करीबी मित्र भूटान पर दबाव बनाने के लिए है। सूत्रों का कहना है कि भारत से करीबी के लिए ड्रैगन भूटान को दंड देना चाहता है। हालांकि भारत ने अभी इसपर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

भारत ने डोकलाम में रोक दिए थे ड्रैगन के कदम
बता दें कि 2017 में डोकलाम में चीनी सैनिकों के सड़क बनाने के प्रयास को भारतीय सेना ने रोक दिया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच 72 दिनों तक तनातनी चली थी। फिर यथास्थिति बहाली के बाद दोनों देशों की सेनाएं पीछे हटी थीं। इस साल भी ऐसी खबरें आई कि चीन ने तोसरा/आमू चाउ में भारत के सिलिगुड़ी कॉरिडोर को ध्यान में रखते हुए एक सड़क बनानी शुरू कर दी है। पीएम नरेंद्र मोदी के विस्तारवाद वाले बयान के बाद शुक्रवार को चीनी दूतावास ने कहा था कि उसके 14 पड़ोसियों में से 12 के साथ सीमा समझौता है।

पड़ोसियों के साथ चीन की शर्तों के साथ हुआ है समझौता 

असल में चीन का जिन भी छोटे पड़ोसियों के साथ सीमा समझौता हुआ है, वह चीन की शर्तों के साथ हुआ है। ‘द भूटानीज’ के संपादक तेनजिंग लामसंग ने ट्विटर पर लिखा है, ‘1984 से अबतक हुए 24 सीमा विवाद को लेकर हुई बातचीत में चीन ने केवल दो विवादित हिस्से का जिक्र किया है। 1984 में दोनों पक्षों के बीच साइन समझौते के तहत ( पश्चिम में 269 स्क्वायर किलोमीटर और उत्तरमध्य भूटान में 495 स्क्वायर किलोमीटर) केवल दो हिस्सों को विवादित माना है। चीन ने कभी पूर्वी हिस्से को सीमा विवाद के दौरान नहीं उठाया है। इसलिए पूर्वी भूटान में तो कोई विवाद है ही नहीं।’