”वाणिकी योजना” को अमलीजामा पहनाने की मंशा में नही ”वन विभाग”

0
4

क्या बार्वेट तार की फेंसिंग में भी सुरक्षित नही ” जिले का जंगल”?

rafi ahmad ansari
बालाघाट। वन विभाग के द्वारा वनो की सुरक्षा को लेकर समूचे वनवृत में बार्वेट तार से फेंसिंग करवाया जा रहा है जिसमें करोडो रूपया व्यय हो रहा है। यह प्रक्रिया पिछले डेढ वर्षो से जारी है परंतु कुछ क्षेत्रो में कुछ कारणो से बार्वेट तार की फेंसिंग नही हो पा रही है जिससे बार्वेट तार और बिछाने के लिये लाई गई लकडियों की बल्लिया खराब हो रही है। इस तरह की जानकारी जिले के दक्षिण उकवा, उत्तर उकवा, पूर्व बैहर, पश्चित बैहर एवं दक्षिण सामान्य वन मंडल के पूर्व लांजी, पश्चिम लांजी, किरनापुर और हट्टा रेंज के विभिन्न बीटो से प्राप्त हो रही है। इस संबंध में जब संबधित वनकर्मीयों से बात की गई तो पता यह चला कि साधन न होने की वजह से बार्वेट तार की फेंसिंग नही हो पा रही है जबकि यह काम मजदूरो से करवा जाना है। अभी हाल ही में दक्षिण उकवा के पितकोना सर्किल और पूर्व लांजी के बिजागढ सर्किल के नरपी और केराडीह,खमारडीह का दौरा कर जानकारी ली गई तो भारी मात्रा में फेंसिंग हेतू बार्वेट तार डंप रखे हुए पाये गये जो बारिश के चलते हवा पानी लगने से खराब हो रहे है।

वनो की सुरक्षा को लेकर वाणिकी योजना के तहत करायें जा रहे फेंसिग के संदर्भ में वन विभाग से जुडे कुछ वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा की गई तो उनका यही कहना था कि विभाग के द्वारा उपर से ही इस योजना को क्रियान्वयन में नही लाना जाना था। चूंकि पुरे प्रदेश भर में वन विभाग के द्वारा करोडों नही, अरबो रूपयां खर्च किया जा रहा है। बताने वाले ने यंहा तक बताया कि सिर्फ कमीशन खोरी के कारण वरिष्ठ अधिकारियों के द्वारा इस योजना को पारित करवाया गया है। जिसमें शासन को आर्थिक रूप से भारी क्षति उठानी पड रही है। बालाघाट जिले में जमीनी स्तर पर इस योजना के क्रियांन्वयन को लेकर जब जानकारी ली गई तो अध्ािंकाश बीटो में कुछ कारणो की वजह सेंं जंगलो की सुरक्षा के लिये फेंसिग नही कर पाई गई है और कुछ संवेदनशील क्षेत्रो में की गई है तो वहां पर फेसिंग क्षतिग्रस्त पायें गये है। जिससे इस योजना पर इस जिले में पलिता लग रहा है।

वनो की सुरक्षा को लेकर विभाग जहां एक ओर पुरी तरह गंभीर नही है तो वही दूसरी ओर लकडी तस्कर जंगल के भीतर प्रवेश कर बेसकिमती वनो का दोहन कर रहे है। जिस कारण विभाग एवं शासन को काफी मात्रा में राजस्व की हानि भी हो रही है। विभाग फेसिंग को लेकर गैर जिम्मेंदाराना रवैया अपना रहा है जिस कारण वनो और वन्यप्राणियो की सुरक्षा पर सवाल खडे रहो रहे है। शायद, बार्वेट तार की फेंसिंग में भी सुरक्षित नही है जिले का जंगल”? जिस कारण वन विभाग ”वाणिकी योजना” को अमलीजामा पहनाने की मंशा में नजर नही आ रहा है।

इनका कहना है

वनो की सुरक्षा को लेकर और नवीन पौधो को बचाने के आशय से बार्वेट तार से जंगलो की फेंसिग कराई जा रही है, जिन जगहो पर फेंसिंग नही बिछाई गई है उसका कारण भारी बरसात है। बरसात के बाद पुन: बार्वेट तार की फेंसिंग करवाई जायेगी।
अनुराग कुमार,डीएफओ
दक्षिण वनमंडल सामान्य