मोदी ने पूरा किया अटल बिहारी बाजपेयी का चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बनाने का सपना

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नई दिल्‍ली, दो तिहाई बहुमत के साथ दोबारा सत्‍ता में वापसी करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्‍तान के बालाकोट एयर स्‍ट्राइक, जम्‍मू-कश्‍मीर से आर्टिकल 370 के खात्‍मे के बाद गुरुवार को स्वतंत्रता दिवस पर अपना एक और मास्‍टर स्‍ट्रोक चला। पीएम मोदी ने लाल किले के प्राचीर से दिए अपने भाषण में ऐलान किया कि सुरक्षा के मोर्चे पर नई चुनौतियों से निपटने के लिए देश की तीनों सेनाओं के बीच तालमेल बेहद जरूरी है और इसी को देखते हुए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) का नया पद सृजित किया जाएगा। चीन और पाकिस्‍तान के दोतरफा खतरे से निपटने के लिए सीडीएस बनाने का प्रस्‍ताव अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री रहने के दौरान से लंबित था, लेकिन राजनीतिक सहमति नहीं होने की वजह से पूरा नहीं हो पाया था।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘हमारी सेनाएं हमारा गौरव हैं। तीनों सेनाओं के बीच समन्‍वय को और ज्‍यादा बढ़ाने के लिए मैं लाल किले से एक बड़ी घोषणा करने जा रहा हूं। हमारी सरकार ने फैसला किया है कि अब भारत में चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ का पद सृजित होगा। यह देश के रक्षाबलों को और ज्‍यादा प्रभावी बनाएगा।’

बता दें कि 1999 में हुए करगिल युद्ध के बाद देश की सुरक्षा व्यवस्था में कमियों का पता लगाने के लिए गठित उच्च-स्तरीय समिति ने वर्ष 2001 में चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ की नियुक्ति की पैरवी की थी। करगिल रिपोर्ट के बाद पूर्व उप-प्रधानमंत्री लालकृष्‍ण आडवाणी की अध्‍यक्षता वाले मंत्रियों के समूह ने ट्राई-सर्विस जॉइंट प्‍लानिंग स्‍टाफ हेडक्‍वॉर्टर के साथ सीडीएस पोस्‍ट को बनाने का सुझाव दिया था।

 

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ तीनों सेनाओं का प्रमुख: करगिल रिपोर्ट में सुझाव दिया गया था कि तीनों सेनाओं के प्रमुखों को बारी-बारी से सीडीएस बनाया जाए। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का चेयरमैन चार स्‍टार वाला जनरल होगा, जिसका कार्यकाल 2 साल रखा जाए, जिसे बढ़ाया जा सकता है। आदर्श रूप में सीडीएस को तीनों सेनाओं का प्रमुख होना चाहिए न कि अपने मातहत बिना किसी कमांड के समकक्षों में प्रथम। सीडीएस अलग-अलग क्षेत्र के कमांडरों को निर्देश देगा जो तीनों सेनाओं के सैनिकों और साजो सामान से लैस होंगे। विशेषज्ञों के मुताबिक भारत की लंबी भू-सीमा और पहाड़ी क्षेत्रों को देखते हुए दो बड़े समुद्री कमांड और तीनों सेनाओं के एक ‘थियेटर’ कमांड सिस्‍टम की जरूरत होगी। ‘थियेटर’ कमांड में तीनों सेनाओं के सैनिक शामिल होंगे। इससे भारत बाहरी और आतंरिक दोनों ही खतरों से निपट सकेगा।

सीडीएस का ऐलान अब क्‍यों? : वाजपेयी सरकार से लेकर अब तक यह सिफारिश राजनीतिक सहमति नहीं होने की वजह से लागू नहीं हो पाई थी। तीन तलाक कानून और आर्टिकल 370 को खत्‍म करने के बाद उत्‍साहित एनडीए सरकार ने अब सीडीएस बनाने का फैसला किया है। एनडीए सरकार की दोबारा सत्‍ता में वापसी के बाद सीडीएस की नियुक्ति का फैसला पीएम मोदी की प्राथमिकता सूची में शामिल था।

दरअसल, कर‍गिल युद्ध के बाद से ही तीनों सेनाओं में रणनीतिक योजना बनाने, बजट, हथियारों की आपूर्ति और प्रशिक्षण में एकरूपता की कमी महसूस की जा रही थी। अब सीडीएस के गठन के बाद सरकार को अब सामान्‍य हालात और संकट की स्थिति में सेना, नौसेना और एयरफोर्स से एक सलाह मिलेगी। बता दें कि भूतकाल में तीनों सेनाओं में समन्‍वय की कमी वजह से भारत को काफी दिक्‍कतों का सामना करना पड़ा था।

1962 में चीन के साथ भारत का युद्ध हुआ था। उस युद्ध में भारतीय वायुसेना को कोई भूमिका नहीं दी गई थी जबकि भारतीय वायुसेना तिब्बत की पठारी पर जमा हुए चीनी सैनिकों को निशाना बना सकती थी। इसी तरह से पाकिस्तान के साथ 1965 के युद्ध में भारतीय नौसेना को पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर हमले की योजना से अवगत नहीं कराया गया था। हालांकि वर्ष 1971 के युद्ध में तीनों सेनाओं के बीच अच्‍छा सामंजस्‍य था और भारत को शानदार सफलता मिली। करगिल युद्ध के समय भी एयरफोर्स के इस्‍तेमाल में देरी के बाद भी भारतीय सेना के तीनों अंगों ने बढ़‍िया सामंजस्‍य दिखाया और पाकिस्‍तानी घुसपैठियों मार भगाया।

सीडीएस का एयरफोर्स ने किया था विरोध: सूत्रों के मुताबिक एयर फोर्स ने थियेटर कमांड और सीडीएस की नियुक्ति का विरोध किया था। एयरफोर्स ने कहा कि यह एक अनावश्‍यक आइडिया है। उसने कहा कि सीडीएस और थियेटर कमांड द्वितीय विश्‍वयुद्ध जैसे व्‍यापक सैन्‍य अभियानों के लिए जरूरी थे, जिसमें कई महाद्वीपों तक सेनाओं को भेजा जाता था। एयरफोर्स ने कहा कि आज तकनीक इतनी उन्‍नत हो गई कि बिना सीधा संघर्ष किए ही विशेष हथियारों के इस्‍तेमाल से दुश्‍मन को त‍बाह किया जा सकता है। परमाणु हथियारों के इस दौर में सेनाओं को बड़ी तादाद में एक जगह से दूसरी जगह तक भेजने का दौर अ‍ब खत्‍म हो गया है।

चीन, पाकिस्‍तान से निपटने के लिए सीडीएस जरूरी : भारत दो तरफ से परमाणु हथियारों से लैस दुश्‍मनों से घिरा हुआ है। पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख युद्ध की धमकी देते रहते हैं और चीन में समय-समय पर आंखें दिखाता रहता है। माना जा रहा है कि करगिल युद्ध के समय से ज्‍यादा इस समय सीडीएस की जरूरत है और इन्‍हीं सब को देखते हुए पीएम मोदी ने सीडीएस की नियुक्ति का ऐलान किया है

अमेरिका, चीन समेत दुनिया के कई देशों में सीडीएस: चीन में एक सीडीएस है जो भारत से जुड़े मुद्दों को देखता है। अमेरिका में पहले से ही सीडीएस की नियुक्ति की गई है। कनाडा, फ्रांस, घाना, इटली, नाइजीरिया, सिएरा लिओन, स्पेन, श्रीलंका और यूनाइटेड किंगडम में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का पद है। जिन देशों में इस पद की व्यवस्था है, उनमें से ज्यादातर देशों में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ सर्वोच्च सैन्य पद होता है। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का मुख्य सैन्य सलाहकार होता है। इसके अलावा सेना की विभिन्न शाखाओं के बीच तालमेल स्थापित करने की जिम्मेदारी भी चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की होती है।

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