आत्‍मनि‍र्भरता में संस्‍कृति का रंग भरते मोदी: जन्‍म दिवस पर वि‍शेष

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आनन्‍द शुक्‍ल
वैश्विक महामारी कोरोना के कारण एक ओर जहां पूरी दुनिया इससे उबरने के लिए जूझ रही है वहीं देश के प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने आत्‍मनि‍र्भर भारत का संकल्‍प लिया है। यह संकल्‍प 21वीं सदी के नये भारत का है जो अपनी आवश्‍यकताओं की पूर्ति के लिये किसी पर नि‍र्भर नहीं होगा। वह अपनी आवश्‍यकताओं को पहचान कर उसकी पूर्ति सुनिश्चित करने की तैयारी में जुट गया है। गौर करने वाली बात यह है ि‍क कोरोना जैसी महामारी में देश को य‍दि‍राहत मिली है तो वह अपनी ही जीवनशैली और लोकल फॉर वोकल से संभव हुई है। यही कारण है कि पीएम ने आत्‍मनि‍र्भरता का सपना देखा है।

अपने 6 वर्षों के कार्यकाल में पीएम मोदी ने बड़े नि‍र्णय लिये हैं जो देशहित में हैं। पीएम मोदी के निर्णयों में राष्‍ट्रवाद स्‍पष्‍ट दि‍खाई देता है। वे जमीनी काम करते हैं। धारा 370 की समाप्ति हो या तीन तलाक का मामला हो, मोदी ने दृढ़ता के साथ इसे लागू किया है। राम मंदिर निर्माण का निर्णय भी उनकी ही उपलब्धि में शामिल है। प्रशासनिक स्‍तर पर होने वाले भ्रष्‍ट्राचार पर भी नियंत्रण मिला है। आगामीवर्ष 2022 तक देश में सभी नागरिकों को घर देने का काम भी काफी अभूतपूर्व है। इस दि‍शा में तेजी से काम चल रहा है। नि‍र्धन परिवारों को अन्‍न देकर जहां एक ओर आम आदमी को संरक्षण देने का काम किया वहीं स्‍ट्रीट वेंडरों को रोजगार चालू रखने के लिए बिना ब्‍याज ऋण देने का काम भी पीएममोदी ने किया है। मोदी अपनी योजनाओं के कुशल संचालन के लिए निर्धन परिवारों के खातोंमें सीधे राशि भेजने का काम करके उन्‍होंने 21वीं सदी के नये भारत का लक्ष्‍य बता दि‍या है।
यह बात सही है कि देश को आत्‍मनि‍र्भर बनाने के लिए हमें दूसरों पर नि‍र्भरता समाप्‍त करनी होगी। कोविड-19 से निपटने के उपाय हों या नये भारत का निर्माण सब प्रकार के नि‍र्णयों में देश की संस्‍कृति ने ही अहम रोल निभाया है। ऐसे में यह कहना उचित होगा कि मोदी आत्‍मनि‍र्भरता में संस्‍कृति का रंग भरने का काम कर रहे हैं। यह स्‍वागत योग्‍य है।
पीएम नरेंद्र मोदी ने आजादी की 74वीं सालगिरह पर लाल किले की प्राचीर से अपने भाषण में ‘आत्मनिर्भर भारत’ की रूपरेखा को भी रेखांकित किया।
पीएम मोदी के भाषण में आत्म निर्भर भारत का सबसे ज्यादा जिक्र इन दि‍नों हो रहा है। यही कारण है कि आत्म निर्भर भारत अब एक मंत्र बन चुका है। उन्होंने कहा कि ‘आखिर कब तक हमारे ही देश से गया कच्चा माल, फिनिश्ड प्रोडक्ट बनकर भारत में लौटता रहेगा। पीएम ठीक कह रहे कि कोरोना संकट काल ने हमें आत्मनिर्भर बनने का बहुत बड़ा मौका दिया है। पहले हम N95, वेंटिलेटर नहीं बनाते थे अब हम इनका उत्पादन बड़ी मात्रा में कर रहे हैं। भारत अब रक्षा उत्पादन में भी पूरी क्षमता से जुट गया है। 100 हथियारों के आयात पर भारत ने रोक लगा दी है। उन्होंने कहा कि अब आत्मनिर्भर बनना भारत की सबसे बड़ी जरूरत है।  आज भारत की मानसिकता होनी चाहिए वोकल फॉर लोकल, हम अपनी चीजों का गौरवगान नहीं करेंगे तो उसको अच्छा बनने का मौका नहीं मिलेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं कि ‘आज पड़ोसी सिर्फ वो ही नहीं हैं, जिनसे हमारी भौगोलिक सीमाएं मिलती हैं बल्कि वे भी हैं जिनसे हमारे दिल मिलते हैं। जहां रिश्तों में समरसता होती है, मेल-जोल रहता है। कई देशों में बहुत बड़ी संख्या में भारतीय काम करते हैं। उन्होंने इशारों इशारों में ही चीन को भी दो टूक जवाब दिया है और कहा कि ‘LoC से लेकर LAC तक, देश की संप्रभुता पर जिस किसी ने आंख उठाई है, देश ने, देश की सेना ने उसका उसी भाषा में जवाब दिया है।

मौजूदा समय में देश और दुनिया में कोरोना वैक्‍सीन को लेकर चल रहे सबसे बड़े सवाल का भी जवाब भी दिया। ‘आज भारत में कोराना की एक नहीं, दो नहीं, तीन-तीन वैक्सीन इस समय टेस्टिंग के चरण में हैं। जैसे ही वैज्ञानिकों से हरी झंडी मिलेगी, देश में उन वैक्सीन का बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू किया जाएगा। इसके लिए हमारी तैयारी पूरी है।
नये भारत में ‘नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन’ देश में शीघ्र लागू किया जाएगा। नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन। नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन, भारत के हेल्थ सेक्टर में नई क्रांति लेकर आएगा।’ इस मिशन के तहत हर भारतीय को एक हेल्थ आईडी दी जाएगी। जिसमें उसके स्वास्थ्य से जुड़ी हर जानकारी होगी। मतलब उसे डॉक्टर या अस्पताल जाते समय हर बार टेस्ट रिपोर्ट लेकर जाने की जरूरत नहीं होगी। यूनीक आईडी के जरिए डॉक्टर उस व्यक्ति की सारी जानकारी देख सकेगा।
पीएम का कहना है कि ये एक साल जम्मू कश्मीर में महिलाओं, दलितों को मिले अधिकारों का साल है। ये जम्मू कश्मीर में शरणार्थियों के गरिमापूर्ण जीवन का भी एक साल है।’ उन्होंने कहा कि ‘जम्मू-कश्मीर में डिलिमिटेशन का काम चल रहा है।
देश के हर गांव में इंटरनेट पहुंचाने का काम भी शुरू हो गया है। ‘साल 2014 से पहले देश की सिर्फ 5 दर्जन पंचायतें ऑप्टिल फाइबर से जुड़ी थीं। बीते पांच साल में देश में डेढ़ लाख ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर से जोड़ा गया है। आने वाले एक हजार दिन में इस लक्ष्य को पूरा किया जाएगा। देश के हर गांव यानी 6 लाख गांवों को ऑप्टिकल फाइबर से जोड़ा जाएगा।

‘भारत को आधुनिकता की तरफ, तेज गति से ले जाने के लिए, देश के ओवरऑल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलेपमेंट को एक नई दिशा देने का काम भी चल रहा है। ये जरूरत पूरी होगी ‘नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन प्रोजेक्ट’ से। इस प्रोजेक्ट पर देश 100 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। अलग-अलग सेक्टर्स के लगभग 7 हजार प्रोजेक्ट्स की पहचान भी की जा चुकी है। ये एक तरह से इंफ्रास्ट्रक्चर में एक नई क्रांति की तरह होगा।
आज दुनिया की बहुत बड़ी-बड़ी कंपनियां भारत का रुख कर रही हैं। भारत की अर्थव्यवस्था पर दुनिया का भरोसा बढ़ा है। दुनिया इस शक्ति को, इन रिफॉर्म्स और उससे निकले परिणामों को देख रही है। बीते वर्ष, भारत में एफडीआई ने अब तक के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। भारत में एफडीआई में में 18 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। ये विश्वास ऐसे ही नहीं आता है। वन नेशन-वन टैक्स, इनसाल्वेंसी और बैंकरप्सी कोड, बैंकों का मर्जर आज देश की सच्चाई है। देश की कृषि और किसान भी आत्‍मनि‍र्भर बनें तो देश की तरक्‍की और कई गुनी बढ़ जायेगी। इसके लिए एक लाख करोड़ का पृथक कृषि ढॉंचा कोष बनाया गया है। कुल मिलाकर देखा जाये तो 21वीं सदी भारत की ही होगी और मोदी विश्‍व का नेतृत्‍व करेंगे। इसमें कोई दो राय नहीं।