पशुपालकों की नुकसान की भरपाई के लिए होगा पशुधन का बीमा

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प्रीमियम पर मिलेगा अनुदान, पशुपालक से सकेंगे लाभ

भोपाल। पशुपालकों को पशुधन के नुकसान की भरपाई केे लिए शासन की ओर से पशुओं को बीमा कराया जाएगा। इसमें प्रीमियम का कुछ अंश पशुपालकों को वहन करना होगा, जबकि शेष राशि शासन की ओर से बीमा कंपनी को जमा कराई जाएगी। पूर्व में पशु कल्याण के लिए शासन की ओर से पशु क्रेडिट कार्ड एवं नि:शुल्क टीकाकरण कार्य प्रारंभ किए जा चुके है। इसके बाद अब पशुओं का बीमा किया जाएगा। इससे प्रदेश के लाखों पशु पालकों को लाभ होगा।
जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय पशुधन मिशन (एनएलएम) योजना के अंतर्गत रिक्त मैनेजमेंट एंड लाइवस्टाक इंश्यारेंस (पशुधन बीमा) का क्रियान्वयन प्रदेश में प्रारंभ किया गया है। योजना का क्रियान्वयन मप्र राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम द्वारा किया जाएगा। ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड न्यू का चयन पशुओंं का बीमा करने लिए किया गया है। जो हिन्दुस्तान इंश्योरेंस ब्रोकर लिमिटेड के माध्यम से पशुधन बीमा की सेवाएं उपलब्ध कराएगी।

एक व तीन वर्ष तक के लिए होगा पशुओं को बीमा
योजनांतर्गत समस्त पशुधन, देशी एवं संकर दुधारू पशु, भावाही पशु घोड़ा, गधा, खच्चर, ऊंट, टट्टू, सांड, भैंस पाड़ा अन्य पशु भेड़, बकरी, सुअर, खरगोश आदि को सम्मिलित किया गया है। योजना के अंतर्गत प्रति परिवार एक हितग्राही के अधिकतम 5 पशुओंं का बीमा प्रीमियम अनुदान पर किया जा सकता है। इसमें भेड़, बकरी, खरगोश के लिए 10 पशुओं की संख्या को एक केटल इकाई माना गया है। इसमें प्रति परिवार एक हितग्राही का 5 केटल यूनिट का बीमा किया जाना है। पशु की मृत्यु के 24 घंटे के भीतर बीमा कंपनी को सूचना देनी होगी। पशुओं का बीमा एक या तीन वर्ष के लिए किया जाना है। एक वर्ष के लिए बीमा प्रीमियम दर 2.92 प्रतिशत तथा तीन वर्ष के लिए 7.34 प्रतिशत निर्धारित की गई है। बीमा पर एपीएल कार्डधारक परिवार को 50 प्रतिशत एवं बीपीएल, अजा, अजजा वर्ग के हितग्राही को 70 प्रतिशत अनुदान भी मिलेगा।

पशु बीमा से नुकसानी की होगी पूर्ति
कई बार बीमारी, दुर्घटनाओं या असमय अकारण पशुओं की मौत से पशुपालकों को हजारों रुपए की हानि उठानी पड़ती है। लेकिन पशुपालक अब कम बीमा प्रीमियम जमा कराकर बीमा लाभ ले सकते है। इससे पशुपालकों की नुकसानी की भरपाई हो सकेगी। शासन द्वारा योजनाएं तो बनाई जाती है, लेकिन प्रचार प्रसार के अभाव में सफल नहीं हो पाती है। ऐसे में विभाग को योजना का प्रचार प्रसार किए जाने की आवश्यकता है। इसके लिए किसानों से संपर्क कर अभियान चलाना चाहिए।