जानिए लूज मोशन में क्यों फायदेमंद है खिचड़ी

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लूज मोशन की समस्या कभी भी और किसी के भी साथ हो सकती है। क्योंकि यह मौसम से जुड़ी बीमारी नहीं बल्कि लाइफस्टाल से जुड़ी समस्या है। जैसे ही खाने में कुछ गड़बड़ हुई पेट अंदर पहुंचे अपशिष्ट को बाहर निकालने के लिए अपना काम शुरू कर देता है…

लूज मोशन की समस्या बहुत तकलीफ देती है और इस कारण शरीर में बहुत कमजोरी भी आ जाती है। लेकिन आपको यह बात जान लेनी चाहिए कि कुछ खास स्थितियों में लूज मोशन हमारी सेहत के लिए जरूर होते हैं। क्योंकि यदि हमारे पेट में गया इंफेक्शियस फूड बाहर नहीं आया तो यह हमें अन्य कई खतरनाक रोगों का मरीज बना सकता है। यहां जानें, लूज मोशन में खिचड़ी का सेवन किन-किन तरीकों से हमें लाभ पहुंचाता है…

-मूंग दाल और चावल को मिलाकर तैयार की गई खिचड़ी लूज मोशन को कम करने का काम करती है। मूंग दाल की खिचड़ी पेट में जमा अपशिष्ट पदार्थ को बाहर निकालने का कार्य करती है। वह भी पेट दर्द से राहत देते हुए। दरअसल, मूंग दाल तासीर में हल्की ठंडी और महादिल होती है। यानी इसका सेवन हर मौसम में लाभकारी होता है।

-इसके साथ ही चावल में मौजूद स्टार्च हमारे पाचनतंत्र को रिलैक्स करने का काम करता है, इसलिए पेट दर्द में राहत मिलती है। खिचड़ी के पोषक तत्व पेट की गंदगी को बाहर निकालते हैं और आपके पेट में होनेवाली पीड़ा से भी राहत मिल जाती है।

-खिचड़ी खाने से हमारे पेट की मसल्स रिलैक्स होती हैं। ऐसा इसलिए होता है कि खिचड़ी सुपाच्य होती है। साथ ही लूज मोशन की स्थिति में जिस तरह की खिचड़ी का सेवन किया जाता है, उसमें पानी की अधिकता होती है। यह हमारे शरीर में जाकर पानी की कमी को पूरा करती है और डिहाइड्रेशन की समस्या से बचाती है।

-इस दौरान यदि आप मूंग दाल की खिचड़ी को ड्राई बनाकर उसका सेवन करते हैं, तो यह खिचड़ी आपके पेट में दर्द की वजह बन सकती है। इसलिए तुरंत आराम के लिए खिचड़ी में पानी की मात्रा अधिक रखें।

-लूज मोशन होने पर मूंग की छिलका युक्त दाल और चावल मिलाकर खिचड़ी तैयार करें। इस खिचड़ी में पानी की अधिकता होनी चाहिए ताकि खिचड़ी लिक्विड फॉर्म में रहे। ऐसी खिचड़ी पेट को जल्दी ठीक करने और विषाक्त पदार्थ पेट से जल्दी बाहर निकालने का काम करती है।

-मूंग दाल की खिचड़ी का सेवन यदि दिन में दो से तीन बार कर लिया जाए तो लूज मोशन की समस्या से एक ही दिन में मुक्ति पाई जा सकती है। साथ ही आपको अपने शरीर में कमजोरी का अहसास भी नहीं होगा।