बच्चों को जीवित रखने के बजाये बच्चे को स्वस्थ रखने पर ध्यान करें केन्द्रित

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बच्चों को जीवित रखने के बजाये बच्चे को स्वस्थ रखने पर ध्यान करें केन्द्रित

अर्ली चाईल्ड हुड डव्लपमेंट का प्रशिक्षण आयोजित, आरबीएसके चिकित्सकों, एएनएम को दिया प्रशिक्षण

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Syed Javed Ali
मंडला. – राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत संचालित राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) में 0 से 18 वर्ष तक के बच्चों को नि:शुल्क स्वास्थ्य सेवाएं जिला चिकित्सालय स्थित जिला शीघ्र हस्तक्षेप केन्द्र में दी जाती है। जिससे कि पीडि़त बच्चे निरोगी हो सके और एक स्वस्थ्य समाज एवं उज्जवल भविष्य का निर्माण हो सके। इसी उद्देश्य से आरबीएसके अंतर्गत जिला स्तर पर अर्ली चाईल्ड हुड डव्लपमेंट का प्रशिक्षण आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण में जिले के सभी ब्लाकों में पदस्थ चिकित्सक, आशा सहयोगी, आशा कार्यकर्ता, एएनएम को प्रशिक्षित किया जाएगा। जिससे शिशु मृत्यु दर में कमी और दिव्यांगता को भी कम किया जा सके। आयोजित प्रशिक्षण में एक दिवसीय मास्टर ट्रेनरों को प्रशिक्षित किया गया। जिसके बाद मास्टर ट्रेनर सभी ब्लाकों में आयोजित चार बैचो में आशा, आशा सहयोगी, एएनएम को प्रशिक्षित करेंगे।

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत जन्म से 18 वर्ष तक के बच्चों के जीवन की गुणवत्ता सुधारने के लिये समय से जांच और शीघ्र प्रबंधन के जरिये बच्चों को केवल जीवित रखने के बजाये बच्चे को स्वस्थ रखने पर ध्यान केन्द्रित करना ज्यादा आवश्यक होता है। अपने बच्चे को समझने के लिये बच्चे के चेहरे की तरफ देखे, उसमें आपको संकेत मिलेंगे, जिससे आप उन्हे समझ सकेगे। उनमें होने वाली प्रतिक्रिया रोना, सोना, देखना, गहरी नींद, शांत रहना, परेशान दिखना, बच्चे को निंद्रा या हल्की नींद में उठ जाना ये सब बातें हमें समझना आवश्यक है।

सीएमएचओ डॉ. श्रीनाथ सिंह ने बताया कि अर्ली चाईल्डहुड डव्लपमेंट के अंतर्गत गर्भावस्था से लेकर जन्म के दो वर्ष तक कुल एक हजार दिवस तक यदि माताओं एवं बच्चों की सही समय पर स्क्रीनिंग के बाद शिशु में होने वाले खतरनाक लक्षणों की पहचान, उपचार एवं रेफेरल मिल जाने से शिशु मृत्यु दर और दिव्यांगता को कम किया जा सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुये स्वास्थ्य विभाग द्वारा यह प्रशिक्षण आयोजित किया गया है।

आयोजित प्रशिक्षण में डीपीएम डॉ. जेपी सिंह ने मास्ट्रर ट्रनरों को बताया कि स्क्रीनिंग के दौरान पाए गए विकास में देरी वाले बच्चों को जिला शीघ्र हस्तक्षेप केन्द्र में उम्र आधारित खिलौनों द्वारा बच्चों का विकासात्मक परीक्षण किया जाता है। जिससे बच्चे खिलौने के माध्यम से समझने का प्रयास करते है। जिससे उनका धीरे-धीरे मानिकस, शरीरिक एवं व्यावहारिक विकास होने लगता है। उन्होंने बताया कि ऐसे बच्चे माता पिता को बताए कि उनका घर में भी ध्यान दे, जिससे उनके विकास में कोई रूकावट ना आए।

जिला शीघ्र हस्तक्षेप प्रबंधक अर्जुन सिंह ने बताया कि समस्त ब्लाक के आरबीएसके चिकित्सक को प्रशिक्षित किया गया है। जिससे वह अपने ब्लाक की आशा, आशा सहयोगी, एएनएम को प्रशिक्षित कर सके। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य है कि जो भी जन्मजात बीमारी है, उनकी पहचान कर उस पीडि़त बच्चों को जिला शीघ्र हस्तक्षेप केन्द्र के माध्यम से उपचार करा सके। आगे बताया कि जन्म से लेकर 2 वर्ष तक बच्चे का भविष्य पर अत्याधिक प्रभाव पड़ता है। बच्चे के साथ खेलना, प्यार करना, बात करना और स्पर्श करने पर प्रतिक्रिया देते है। यह विकास में एक महत्वपूर्ण योगदान है।

बच्चों की करे देखभाल –
प्रशिक्षण में बताया गया कि बच्चे के जन्म के बाद शिशु को स्तनपान कराए, उसका टीकारण समय पर कराये जिससे उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहे, इसके साथ शिशु की त्वचा का ख्याल रखना, बच्चें की साफ सफाई के साथ उसके मानसिक विकास एवं बौद्धिक विकास पर ध्यान देना जरूरी है। जिससे शिशु का सही विकास हो सके।

संक्रमण से बचाता है स्तनपान –
प्रशिक्षण में स्तनपान के विषय में बताया गया। जिसमें बताया कि शिशु के जन्म के समय स्तनपान कराने से गर्भाशय में संकुचन आता है, एवं रक्त स्त्राव की मात्रा को कम करता है। जन्म के पहले घंटे में स्तनपान कराने उत्तम होता है। प्रसव के बाद पहले 2 से 5 दिनों तक मां का पीला गाढ़ा दूध होता है, जिसे कोलोस्ट्रम कहते है। यह शिशु को संक्रमण से बचाता है। यह दूध शिशु के लिये पहला प्राकृतिक टीका होता है। इसलिये इसमें कोई चूक ना करें।

15 फरवरी से आशा, सहयोगी, एएनएम का प्रशिक्षण होगा शुरू –
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत जिले के सभी ब्लाकों में अली चाईल्ड हुड डव्लपमेंट के अंतर्गत प्रशिक्षण आयोजित किया गया है। हर ब्लाक में एक दिवसीय चार बैच का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिये आरबीएसके के चिकित्सकों को प्रशिक्षित किया गया है, जिसके अंतर्गत आज अली चाईल्ड हुड डव्लपमेंट का प्रशिक्षण आयोजित किया गया है। 15 फरवरी, 19 फरवरी, 26 फरवरी, 27 फरवरी, 29 फरवरी को प्रशिक्षण दिया जाएगा।

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