उप्र में रोजगार के अवसर विकसित करने गांव-गांव में लगेंगे उद्योग

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उद्योग कृषकों द्वारा स्थापित किए जाएंगे, स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार भी मिल सकेगा

लखनऊ, प्रदेश के गांव-गांव में स्थापित किए जाएंगे छोटे-छोटे उद्योग। ये उद्योग कृषकों द्वारा स्थापित किए जाएंगे जहां स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार भी मिल सकेगा। किसानों को उद्यमी बनाने की योजना के तहत ये उद्योग भी कृषि आधारित ही होंगे जिसका रॉ मैटेरियल (कच्चा माल) स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होगा। मसलन खाद्य प्रसंस्करण से लेकर घरेलु दैनिक उपयोग के वस्तुओं के उद्योग लगेंगे। राज्य सरकार ने इसके लिए वृहद कार्ययोजना तैयार की है जिसके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग से लेकर कृषि, पशुपालन तथा रेशम समेत कई अन्य विभागों को सौंपी जाएगी।

डेवेलप्मेन्ट ऑफ माइक्रो इन्टरप्राइजेज इन रूरल एरियाज की मूल अवधारणा के तहत किसानों को उद्यमी बनाया जाएगा जिससे उनकी आय दोगुनी की जा सके। इसमें खाद्य प्रसंस्करण के बाद सबसे अधिक प्रमुखता पराली से जुड़े उद्योगों को दी जाएगी ताकि पराली जलाने की घटनाएं पूरी तरह से रुक सके। जानकारों की माने तो सुप्रीम कोर्ट व एनजीटी (राष्ट्रीय हरित अधिकरण) के दबाव में पराली आधारित उद्योगों का प्रदेश में जाल बिछाने की योजना तैयार की गई थी जिसमें पराली (फसल अवशेष) से तैयार वस्तुओं की मार्केटिंग को भी शामिल किया गया था।

इस बीच किसानों को उद्यमी बनाने की योजना शुरू किए जाने का निर्णय किया गया तो उस योजना को पराली वाली योजनाओं के साथ जोड़कर सरकार ने एक वृहद कार्ययोजना तैयार की है। पराली आधारित उद्योगों को शुरू कराने तथा उसे बढ़ाने की जिम्मेदारी कृषि विभाग को तो खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की जिम्मेदारी उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के पास होगी।

पराली आधारित उद्योग-
गत्ता व पैकिंग, गट्ठर बनाने की इकाई, बायो फ्यूल तथा कागज से जुड़े उद्योग।

खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े ये लघु उद्योग लगेंगे गांवों में
राइस मिल, दाल मिल, ऑयल मिल, फ्लोर मिल, दलिया, सेंवई, पापड़, चटनी, अचार, जेली, ब्रेकरी, बड़ी, टोमैटो केचप, मसाला उद्योग, ब्रेड-बिस्कुट व नमकीन।

गौ व अन्य पशु आधारित उद्योग भी लगेंगे-
दूध, दुग्ध उत्पाद के अलावा गोबर, गोमूत्र से जुड़े उत्पाद तैयार किए जाएंगे। इसके अलावा शहद उत्पादन, वर्मी कम्पोस्ट, अण्डा उत्पादन, मुर्गी पालन,बकरी तथा रेशम उत्पादन के साथ-साथ भूसा, चुन्नी-भूसी उद्योग व पशुप एवं मत्स्य आहार उ‌त्पादन आदि।  को भी बड़े पैमाने पर शुरू किया जाएगा।