सत्ता के संरक्षण में चल रहा है अवैध उत्खनन, परिवहन और डंपिंग का खेल

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एक सप्ताह में ही करोड़ दो करोड़ की रेत निकालकर बेच रहे है माफिया

rafi ahmad ansari
बालाघाट। जिले में रेत की चोरी और अवैध डंफिंग का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। यह काम प्रशासन के नाक के नीचे चल रहा है। नदी में पानी भरे होने के बावजूद एनजीटी के नियमों को दरकिनार कर बेधड़क रेत का अवैध परिवहन कर डंप किया जा रहा है। शंकर पिपरिया, डोंगरिया, चिचोली, टेकाड़ीघाट, चंद्रकुआ और कोड़बीघाट रेत माफियाओं के लिए सर्वाधिक लूट का अडडा बने हुए है। यहा पर नियम विरूध्द नदियों में 15 फीट रोड और रैम्प बनाकर रेत निकाली जा रही है और नदियों के किनारे में ही डंप किया जा रहा है। जिसे बाद में रेत माफियाओं के दवारा 50 से 60 टन के हाईवा डंफर में लोडिंग कर छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और जिले के बाहर बेचा जा रहा है। इससे ना केवल नदियों का अस्तित्व संकट में पड़ गया है बल्कि बारिश खत्म होने से पहले ही बावनथड़ी नदीं की जलधारा सूख गयी है। वही क्षेत्र में क्षमता से अधिक मात्रा में रेत का परिवहन होने से कई ग्रामीण सड़के महीने, 6 महीने और साल भर में टूट कर जर्जर हो गयी है।

  

डोंगरिया, चिचोली, चंद्रकुआं, कोड़बी में अवैध डंप
जिले में रेत माफियाओं की काली करतूतों का अंदाजा लगाने के लिए हमारी टीम ने डोंगरिया, शंकर पिपरिया, चिचोली, चंद्रकुआ और कोड़बी का दौरा किया। जहां भारी मात्रा में अवैध उत्खनन कर बिना स्वीकृति वाले डंप जगह जगह दिखाई दिए। यहा पर पिछले कई महीनों से नदियों में पानी भरे होने के बावजूद टैÑक्टरों और मशीनों को नदी में घुसाकर वहा से रेत का अवैध उत्खनन कर परिवहन किया जा रहा है। ठेकेदार के इशारे पर गांवों में कई छोटे बड़े रेत माफिया इस कारोबार में मस्त है। जो रेत चोरी के लिए सारे नियम कायदों को धता बताकर यह सब काम कर रहे है। ये लोग रेत चोरी करने के बाद नदियो ंके किनारे में ही सरकारी भूमि या फिर किसी किसान की जमीन का उपयोग डंप के लिए कर रहे हैं। जहां से रेत का अवैध परिवहन धड़ल्ले से हो रहा है। सर्वाधिक रेत चोरी कोड़बी और टुईयापार के चंद्रकुआ घाट में हो रही है। यहा पर अलग अलग स्थानों पर नदियों में पहुंचने के लिए रैम्प और रास्ते बनाए गए है। जहां इन रास्तों के माध्यम से सीधे मशीने, डंफर और टैÑक्टर घुसाए जाते है। कोड़बी घाट में यह तो आलम है कि यहा पर करीब चार घाटों में एक दिन में सैकड़ा भर टैÑक्टर घुसाकर रेत चोरी की जा रही है। जब भी उन्हे जानकारी मिलती है कि पत्रकार या कोई विरोधी दल के लोग आने वाले है तत्काल भाग खड़े होते है।

कोड़बी में मालामाल हो गए सरपंच और ठेकेदार के सहयोगी
कोड़बीघाट और चंद्रकुआघाट जिले में ऐसे घाटों में शुमार है। जहां से सप्ताह दो सप्ताह में करोड़ दो करोड़ की रेत निकाली जाती है। यहा पर स्वीकृत घाट के अलावा कई ऐसे घाट है जहां रेत का भंडार देखने से पता चलता है कि यहा दिन रात चोरी करने से भी रेत कम नहीं होगी। इसी का फायदा उठाकर रेत ठेकेदार के दवारा गांव के सरंपच और विरोध करने वालों से सांठगांठ कर बड़े पैमाने पर रेत की चोरी करवायी जा रही हैं। बताया गया कि बीते एक माह के भीतर रेत के अवैध उत्खनन और परिवहन से सरपंच और ठेकेदार के सहयोगी मालामाल हो गए हैं। जिन्होने इस रेतघाट के भरोसे करीब एक दर्जन नए टैÑक्टर भी खरीद लिए है।

किसानों और ग्रामीणों को विरोध करने पर मिलती है धमकी
चंद्रकुआं और कोड़बीघाट में एनजीटी की रोक के बावजूद सरेआम रेत की लूट की जा रही है। इसके विरोध में यदि कोई किसान अपने खेत को रहे नुकसान को लेकर आवाज उठाता है या फिर ग्रामीण सड़कों की समस्या के लिए डंफरों को रोकते है तो उन्हे जान से मारने की धमकी दी जाती है और उनके उपर डंपर चढ़ाने की कोशिश करते है। जिससे कई सारे ग्रामीण न केवल परेशान है बल्कि रेत माफियाओं के आतंक के कारण डरे हुए है। टेकाड़ीघाट,शंकर पिपरिया में ग्रामीण जोरदार विरोध कर रहे हैं। जिससे यहा पर जरूर अवैध उत्खनन को ठेकेदार ने रोक दिया है। लेकिन कोड़बीघाट और चंद्रकुआ में आज भी बदस्तूर रेत की लूट का कारोबार बदस्तूर जारी है। यहा के किसानों को सरेआम मारने पीटने की धमकी रेत ठेकेदार के गुर्गे और सहयोगी देते रहते है। जिससे अब लोगों ने इनके खिलाफ आवाज उठाना और विरोध करना भी बंद कर दिया हैं ।

वही कई ऐसे लोग भी है जो शुरूआत में विरोध कर रहे थे उन्हे पैसे देकर चुप कराया गया है।
पूर्व सांसद कंकर मुंजारे ने लिया रेतघाटों का दौरा, किया रेत के लूटरे और राज्यमंत्री के भाई का पदार्फाश
जिले के रेतघाटों में मची लूट को लेकर पूर्व सांसद कंकर मुंजारे ही खुला विरोध कर रहे है। साथ ही अपने लोगों के माध्यम से इन घाटों में पहुंचकर वहां की आमजनता में आंदोलन का बीज बो रहे है। वे निरंतर जिले भर के रेत घाटों में पहुंचकर रेत कारोबारी के दवारा की जा रही रेत की लूट को भी उजागर करने में लगे हुए है। इसी कड़ी में मंगलवार को उन्होने खैरलांजी और कटंगी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले डोंगरिया, चिचोली, शंकर पिपरिया, चंद्रकुआ, टेकाड़ी और कोड़बी के घाटों का दौरा किया। उनके आने की सूचना मात्र से ही यहा पर काम कर रहे ठेकेदार के कर्मचारियोें में भगदड़ दिखाई दी। कई स्थानो ंपर वे मशीने, टैज्क्टर और मोटर सायकले छोड़कर भाग खड़े हुए। कंकर मुंजारे ने यहा पर रेत निकालने वाले घाटों में पहुंचकर ठेकेदार दवारा नदी में डंफरों और टैÑक्टरो ंको घुसाने के लिए बनाए गए रैम्प, सड़कों का अवलोकन किया।

साथ ही ग्रामीणों को आंदोलन के लिए तैयार कर ठेकेदार के खिलाफ रेत चोरी को लेकर जमकर नारे भी लगवाएं। खासकर टेकाड़ी घाट में सड़क की दुर्दशा को लेकर लोग सामने आए। जहां उन्होने ग्रामीणों के साथ सड़क पर ही नारेबाजी करते हुए लोगों को रेत चोरो ंके खिलाफ बिना डरे खड़े होने के लिए प्रेरित किया। इसी कड़ी मे ंवे चंद्रकुआघाट भी पहुंचे जहां पर भी बड़ी संख्या में क्षेत्र के युवा और किसान उनके साथ खड़े दिखाई दिए। इसके बाद उन्होने कोड़बीघाट पहुंचकर वहा पर जारी रेत की लूट को देखा और शासन प्रशासन से लेकर रेत माफियाओं के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। उन्होने कहा है कि रेत की लूट में ठेकेदारों को सत्तापक्ष से राज्यमंत्री रामकिशोर कावरे, खनिज निगम के अध्यक्ष प्रदीप जायसवाल सहित शासन प्रशासन का पूर्ण सहयोग प्राप्त है और उनके संरक्षण में ही जिलेभर में रेत की लूट मची हुई है। ऐसे में सरकार से कोई उम्मीद करना बेमानी होगा। जनता को ही अब नदियों के संरक्षण, खेतों के कटाव और सड़कों की बदहाली के लिए स्वयं आगे आकर खड़े होना होगा अन्यथा रेत माफिया इस जिले को बख्शेंगे नहीं और इसके गंभीर दुष्परिणाम लोगों को पेयजल संकट, सिंचाई संकट के साथ सड़कों पर दुर्घटनाओं के तौर पर भुगतने होंगे।