सीधी सांसद का आदर्श गांव: ओडीएफ घोषित, शौचालय नहीं

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सीधी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर गांव तक बिजली पहुंचाने का दावा किया था, लेकिन भाजपा सांसद रीति पाठक का गोद लिया गांव करवाही आज भी अंधेरे में है। बच्चे चिमनी और लालटेन की रोशनी में पढऩे को मजबूर हैं। किसी बीमार को इलाज कराना हो तो 30 किलोमीटर दूर सीधी जाना पड़ता है।

ग्रामीणों का आरोप है कि सांसद ने गांव के विकास में रुचि नहीं दिखाई। कुछ दिनों तक अफसरों दौड़-भाग करते रहे। सड़क, शांतिधाम और आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण हुआ। सांसद दौरे में करवाही के दूर से ही निकल जाती हैं।

शिक्षकों की कमी के कारण बच्चों का भविष्य दांव पर
करवाही में प्राथमिक पाठशाला है, लेकिन शिक्षकों की कमी के कारण बच्चों का भविष्य दांव पर है। ग्रामीणों का आरोप है कि जो शिक्षक हैं वे देरी से आते हैं या फिर गप्पे लड़ाने में मशगूल रहते हैं। 10-12वीं की पढ़ाई के लिए बच्चों को पांच से 10 किमी. दूर का सफर करना पड़ता है। ऐसे में छात्राओं की पढ़ाई छूट जाती है, क्योंकि कोई भी अभिभावक अपनी बेटियों को दूर पढऩे नहीं भेजना चाहता है।

ग्रामीण तीन किलोमीटर दूर स्थित कुएं के भरोसे
करवाही में बिजली और पानी सबसे बड़ी समस्या है। सांसद ने आश्वासन दिया था कि लोगों की प्यास बुझाने और सिंचाई के लिए पानी के इंतजाम किए जाएंगे, लेकिन इस पर अमल नहीं हुआ। ग्रामीण तीन किलोमीटर दूर स्थित कुएं के भरोसे हैं। गांव में बिजली के खंभे तक नहीं। यहां आज भी चिमनी और लालटेन युग चल रहा है।

मजदूरी अभी तक नहीं मिली
ग्रामीण बताते हैं कि 2015 से 2018 के बीच हुए निर्माण कार्य की मजदूरी अभी तक नहीं मिली। आधे से ज्यादा लोगों को जॉब कार्ड का नहीं दिए। 2016 में ओडीएफ घोषित हो चुके गांव में शौचालय नहीं बने हैं।

गरीबों को नहीं मिल रहा खाद्यान्न
सुआदीन यादव ने बताया कि समग्र आइडी आज तक नहीं बनाई गई। इससे गरीबों को शासकीय उचित मूल्य की दुकानों से खाद्यान्न नहीं मिल पा रहा। प्रधानमंत्री आवास योजना की दूसरी सूची नहीं जारी की गई। पहली सूची में भी गांव के पात्र हितग्राहियों को दूर रखा गया। प्रसूति सहायता राशि का भुगतान भी नहीं किया जाता है।

सीधी में मिलता है इलाज
में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है, लेकिन यहां इलाज नहीं मिलता। ग्रामीणों को इलाज कराने के लिए ३० किमी. दूर सीधी जाना पड़ता है।
ये काम हुए
एक स्टेडियम का निर्माण हुआ है। आंगनबाड़ी भवन, शांतिधाम और सड़कें बनी हैं। मेड़ बंधान और कूप निर्माण भी कराए गए।
4500 आबादी
30 पीएम आवास
(22पूरे 8 अधूरे)
170 शौचालय

शौचालय नहीं बने
हमारे घरों में शौचालय नहीं बने। सरपंच सचिव से इसके लिए बोला पर सिर्फ आश्वासन मिलता है। गांव में पौधरोपण किया गया, पर पौधे कहां गए, इसका पता नहीं।
– राजीव लोचन
परिवार की समग्र आइडी नहीं बनाई जा रही है। इस कारण गांव के कई परिवारों को शासकीय उचित मूल्य की दुकानों से खाद्यान्न व केरोसिन नहीं मिल पा रहा है। जिस गांव के लोग भूखे हों, वो आदर्श कैसे हो सकता है।
– नसीर खान

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