जानिए…कर्जदार प्रदेश के नौकरशाह कैसे बन गए धन्ना सेठ

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नौकरशाहों की संपत्ति सार्वजनिक होने के बाद उठे सवाल…

मप्र कॉडर के अधिकांश अफसरों ने दिल्ली-एनसीआर में मकान-फ्लैट में किया निवेश

वर्तमान समय में मप्र पर करीब 2,26,000 करोड़ का कर्ज है। केंद्र सरकार के उपेक्षापूर्ण रवैए, केंद्रीय करों में कटौती और केंद्र से मिलने वाले फंड को रोके जाने से कई योजनाएं अधर में लटकी हुई हैं। लेकिन इस विकट स्थिति में भी मप्र के नौकरशाहों की संपत्ति में दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ोत्तरी हुई है। इसका खुलासा हाल ही में आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अफसरों द्वारा वार्षिक संपत्ति का ब्यौरा देने के बाद हुआ है।

 

भोपाल। 3,08,252 स्क्वायर किमी क्षेत्रफल में फैला मप्र भले ही खनिज संपदा से परिपूर्ण है, लेकिन आज भी यहां कि 26 फीसदी आबादी गरीबी में जीवन यापन कर रही है। लेकिन यहां के नौकरशाह दिन पर दिन मालामाल हो रहे हैं। मप्र कैडर का आईएएस हो या आईपीएस या फिर आईएफएस सभी धनकुबेर हैं। कई अफसर करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं।

हाल ही में प्रदेश के 358 आईएएस, 254 आईपीएस और आईएफएस अधिकारियों ने अपनी अचल संपत्ति का ब्यौरा केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय (डीओपीटी)को दी है। आईएएस और आईपीएस अधिकारियों द्वारा 31 जनवरी 2019 की स्थिति में खरीदी गई अचल संपत्ति का जो ब्यौरा सामने आया है उसके बाद कईअधिकारियों की संपत्ति सुर्खियों में है। कर्ज में डूबे प्रदेश में नौकरशाह धन्नासेठ कैसे बन गए हैं इसको लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। इससे भी अधिक चर्चा उन संपत्तियों की है जिनका जिक्रअफसरों ने कहीं नहीं किया है।

अधिकांश ने जमीनों में किया निवेश

आईएएस अफसरों द्वारा दिए गए संपत्ति के ब्यौरे की पड़ताल में यह बात सामने आई है कि एक साल के दौरान 35 से ज्यादा आईएएस अधिकारियों ने मध्यप्रदेश के साथ देश के अन्य प्रांतों आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, यूपी, दिल्ली, बिहार, राजस्थान समेत अन्य स्थानों पर फ्लैट, मकान, खेती लायक जमीन खरीदी है। रीवा नगर निगम में पदस्थ आयुक्त सभाजीत यादव ने अपनी संपत्ति विवरण में दस करोड़ रुपए से अधिक की अचल संपत्ति होने की जानकारी दी है। उनकी अधिकांश प्रापर्टी यूपी में है। जिन आईएएस अधिकारियों ने दिसम्बर 2018 से दिसम्बर 2019 के बीच संपत्ति खरीदी है, उनमें एसीएस आएस जुलानिया, केके सिंह, विनोद कुमार के अलावा आईएएस अफसर मनोज झालानी, आलोक श्रीवास्तव, स्मिता भारद्वाज, मनोज गोविल, पल्लवी जैन गोविल, शिवशेखर शुक्ला, मुकेश चंद्र गुप्ता, राहुल जैन, डॉ. अशोक कुमार भार्गव, प्रीति जैन, नेहा मारव्या, वीरेद्र सिंह रावत, तरुण राठी, टी. इलैया राजा, अमित तोमर, आशीष कुमार, अभिजीत अग्रवाल, जगदीश चंद्र जटिया, मनीष सिंह, दिलीप कुमार, आलोक कुमार सिंह, अभय वर्मा, रघुराज एमआर, राजाभैया प्रजापति के नाम शामिल हैं। इनमें से कई अधिकारियों ने कृषि फार्म, आफिस और अन्य कार्यों के लिए भी प्रापर्टी खरीदी है। इन अधिकारियों को अचल संपत्तियों से हर साल लाखों रुपए आमदनी किराए के रूप में भी मिल रही है।

बड़े शहरों में किया निवेश

मप्र कैडर के अधिकांश आईएएस अफसरों ने प्रदेश के बड़े शहरों भोपाल, इंदौर, जबलपुर और रायसेन में जमीनों और मकान में निवेश किया है। जबलपुर और भोपाल में मंडला कलेक्टर जगदीश चंद्र जटिया ने मकान खरीदे हैं। रायसेन जिले के रंगपुरा केसरी में अभय कुमार वर्मा, दिलीप कुमार ने भोपाल में आरएस जुलानिया, अनुग्रह पी., अभिजीत अग्रवाल, रघुराज एमआर, राजाभैया प्रजापति ने खेती और प्लाट की जमीन खरीदी है वहीं इंदौर में जिन अफसरों ने इंदौर में जमीन खरीदी है, उनमें प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ राहुल जैन, आलोक कुमार सिंह, वीरेंद्र सिंह रावत, मनीष सिंह, प्रीति जैन, डॉ. अशोक कुमार भार्गव, स्मिता भारद्वाज के नाम शामिल हैं। इन अफसरों ने इंदौर विकास प्राधिकरण की अलग-अलग स्कीम में जमीन खरीदने के साथ मल्हारगंज, मायाखेड़ी, हातोद, बदियाकीमा, झलरिया में प्रापर्टी खरीदी है।

कई अफसरों ने फ्लैट भी खरीदे हैं। उनमें मनोज गोविल और पल्लवी जैन गोविल, शिवशेखर शुक्ला, मनोज झालानी ने राजधानी के हाउसिंग बोर्ड की जमीन पर बनाए गए तुलसी टावर में फ्लैट बुक कराए हैं। इन फ्लैट की बुकिंग के समय कीमत 98 लाख रुपए थी जो अब सवा करोड़ रुपए को पार गई है।

ग्यारह आईएएस की सम्पत्ति का ब्यौरा नहीं

केन्द्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण मंत्रालय ने मध्यप्रदेश सहित पूरे देश भर के आईएएसव अफसरों को 31 जनवरी 2020 तक अपनी पिछले साल का सम्पत्ति का ब्यौरा ऑनलाइन भरने को कहा था। तय तिथि से 12 दिन की देरी से इन अफसरों की सम्पत्ति का ब्यौरा ऑनलाइन हो पाया है। वहीं 11 अफसर ऐसे हैं जिनकी संपत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं हो पाया है। प्रदेश के जिन आईएएस अफसरों की सम्पत्ति का ब्यौरा अभी तक ऑनलाइन नहीं किया गया है उनमें इसी साल वीआरएस लेने वाली गौरी सिंह, वीरेन्द्र कुमार, तरुण भटनागर, मनीष सिंह , सुभाष द्विवेदी, अरविंद दुबे, अवधेश शर्मा, धरणेन्द्र जैन, कृष्णदेव त्रिपाठी, कुमार पुरुषोत्तम, रत्नाकर झा के नाम शामिल है।

अफसरों को ससुरालवालों ने बनाया धनवान

मप्र के आईएएस अफसर मालदार हैं। दिलचस्प ये है कि इन अफसरों का कहना है कि वो अपने ससुराल की बदौलत धनवान बने हैं। अपनी अचल संपत्ति के ब्योरे में अफसरों ने बताया है कि उनकी पत्नियों को भी मायके से बेहिसाब प्रॉपर्टी मिली है। एक से एक महंगे गिफ्ट पत्नियों के रिश्तेदारों ने दिए हैं।

-पीसी मीणा- ससुराल से जयपुर में प्लॉट मिला है
-मोहम्मद सुलेमान – ससुराल से सहारनपुर में आम के बगीचे मिले
-अजीत केसरी – ससुर की ओर से रायपुर में कृषि भूमि मिली
-नीरज मंडलोई – सास और साले की ओर से इंदौर में फ्लैट और मकान मिला
-आशुतोष अवस्थी- सास ने दुकान और मकान दी
-नरेश पाल – ससुर की ओर से भोपाल में एक प्लॉट दिया
-स्वतंत्र कुमार – पत्नी को लखनऊ में मकान और प्लॉट मिला है
-प्रमोद गुप्ता- ससुर ने पत्नी को इंदौर में एक मकान दिया
-अरुण कुमार तोमर- पत्नी को भोपाल में ससुर की ओर से हॉल मिला
-रविकांत मिश्रा – सास की ओर से पत्नी को ग्वालियर में कृषि भूमि मिली
-राजीव शर्मा – ससुर ने बेटी के नाम भोपाल में प्लॉट और मुरैना में कृषि भूमि तोहफे में मिली
-श्रीनिवास शर्मा – ससुराल से जबलपुर में कृषि भूमि मिली
-भरत यादव – ससुर की ओर से भोपाल में पत्नी के नाम प्लॉट मिला
-राजीव रंजन मीणा – पत्नी को उनकी नानी की ओर से जयपुर में दुकान मिली

मप्र का हर सातवां ब्यूरोक्रेट खेती से मालामाल

मध्य प्रदेश के आला अफसरों ने जब अपनी संपत्ति का ब्यौरा दिया तो पता चला कि हर सातवां आईएएस अफसर तो किसान है। ज्यादातर आईएएस अफसर न केवल करोड़पति हैं बल्कि उन्होंने अपना ज्यादातर निवेश अचल संपत्ति में किया है। किसी ने प्लॉट खरीदा तो किसी ने फ्लैट। इसमें भी ज्यादातर ने किसान बनने में रुचि दिखाई और भोपाल, इंदौर व ग्वालियर, नोएडा समेत देश के ज्यादातर बड़े शहरों में अपने निवेश किए। कुछ अधिकारियों के ब्यौरे हास्यास्पद भी हैं। जहां आज की तारीख में दो से तीन हजार रुपए वर्गफीट की दर है, वहां बड़े-बड़े प्लाट-घर उन्होंने महज कुछ लाख रुपए देकर खरीद लेने का दावा भी कई अधिकारियों ने किया है। कुछ ही अधिकारियों को यह संपत्ति विरासत में मिली है, ज्यादातर ने इसे अपने बूते बनाया है। ताकि बुढ़ापा इत्मीनान से कट सके। इतना तो पक्का है कि कुछ ही अफसर बचे हैं, जो करोड़पति नहीं हैं। ज्यादातर तो इस सीमा को लांघ चुके हैं। प्रदेश के ब्यूरोक्रेट्स द्वारा केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय को सौंपे गए वर्ष 2019 के संपत्ति के ब्यौरे के अनुसार प्रदेश का हर सातवां नौकरशाह किसान है। यही नहीं खेती से कई नौकरशाह मालामाल हो रहे हैं।

आईएएस अधिकारियों का जमीन प्रेम

केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय को सौंपे गए ब्यौरे के अनुसार मप्र कैडर के आईएएस अधिकारियों ने जमीनों में जमकर निवेश किया है। कई अफसरों ने जहां खेती में तो कई ने भूखंड, प्लॉट, मकान में अपनी कमाई लगाई है। अफसरों की राजधानी भोपाल और इससे बाहर भी अचल संपत्तियां हैं। कई अफसरों ने अपने गृह प्रदेश में तो कई ने कई-कई प्रदेशों में निवेश किया है।

प्रेमचंद मीना ने किया करोड़ों का निवेश

1984 बैच के आईएएस अधिकारी प्रेमचंद मीना सहित कई अधिकारियों ने मकान और जमीन में करोड़ों रुपए का निवेश किया है। मीना का राजस्थान के बामनवास में 12.83 लाख का मकान, 21 एकड़ कृषि भूमि 35 लाख की, 2 एकड़ भूमि 8 लाख, होशंगाबाद रोड पर रिहायशी भूखंड 9.50 लाख, मंडोरी भोपाल में 4.10 लाख का भूखण्ड, दिल्ली में 28.50 लाख का फ्लैट, रायसेन में 6.50 एकड़ कृषि भूमि 23.28 लाख, राजस्थान के चकशालग्राम में 4.60 लाख की कृषि भूमि, जयपुर में 15.20 लाख के प्लाट, जयपुर में 32.50 लाख का मकान हैै। वहीं, इसी बैच के जयदीप गोविंद के पास भोपाल के चंद्रपुर में 10 लाख की जमीन, दिल्ली में 75 लाख का फ्लैट, बागमुगालिया मे 50 लाख का मकान, गौतम बुद्धनगर नोएडा में 75 लाख का मकान, गौतम बुद्धनगर नोएडा में 1.25 करोड़ का मकान है। इकबाल सिंह बैस के पास मोहाली पंजाब में दो मकान है। एक की कीमत 90 लाख (50 फीसदी शेयर पत्नी का), दूसरे मकान की कीमत 1 करोड़ 70 लाख। इन दोनों से करीब 11 लाख रुपए की वार्षिक आय। बिशनखेड़ी में 99 लाख की तीन एकड़ जमीन।

प्रभांशु कमल
प्रभांशु कमल के पास लखनऊ में खुद के नाम एक प्लाट, भोपाल के चूनाभट्टी में मकान और मेंडोरी में तत्कालीन कीमत के मुताबिक 32 लाख का फार्म हाउस है। मोहम्मद सुलेमान के पास यूपी के सहारनपुर में आम का बाग है। 3.368 हैक्टेयर के बाग से सालाना 4 लाख रुपए की आय होती है। यूपी में गौतमबुद्ध नगर में फ्लैट से 2 लाख 60 हजार रुपए सालाना आय। प्रेमपुरा में जमीन।
केके सिंह के पास बावडिय़ा कलां में मकान है। जिससे सालाना 5 लाख 22 हजार रूपए की आमदनी। गौतम बुद्ध नगर ग्रेटर नोएडा में मकान, जिससे सालाना 48 हजार रूपए की आय होती है। इनके अलावा भोपाल के प्रेमपुरा में प्लाट, बैरागढ़ चीचली में कृषि भूमि, जाटखेड़ी में प्लाट और रायसेन के गौहरगढ़ में कृषि भूमि है। वहीं जी. गोपाल रेड्डी के पास तेलंगाना में साढ़े सात एकड़ जमीन है। विनोद सेमवाल के पास देहरादून में मकान, जमीन है। चूना भट्टी में मकान, गांदरमऊ में जमीन, कालापानी में जमीन, बिशनखेड़ी में खेती की जमीन है।

जुलानिया के पास 1 करोड़ की कृषि भूमि

तथाकथित तौर पर प्रदेश के ईमानदार अफसरों में गिने जाने वाले राधेश्याम जुलानिया के पास इंदौर में एक करोड़ रुपए की कृषि भूमि है। वहीं, भोपाल के बावडिय़ा कला में 80 लाख रुपए का कृषि भूखण्ड, बाग मुगालिया में 1,13,00,000 रूपए का प्लॉट, फॉर्चून स्मार्ट सिटी में नौ लाख का प्लॉट और बरखेड़ी खुर्द में 54,04,700 रुपए की जमीन है।

प्रमोद अग्रवाल बड़े मालदार

1991 बैच के आईएएस अधिकारी प्रमोद अग्रवाल मालदार अफसरों में शामिल है। डीओपीटी को दी गई जानकारी के अनुसार प्रमोद अग्रवाल की भोपाल के अमझरा में 20 एकड़ जमीन एवं प्लाट है। अग्रवाल ने इसके बारे में बताया है कि इसमें से 50 प्रतिशत हिस्सा उनका है। इसके अलावा भोपाल और इंदौर में उनकी छह प्रॉपर्टी हंै। इनके झारखंड के रामगढ़ में दो से अधिक शोरूम और मकान हैं। इन्होंने वर्ष 2016 में झारखंड के रांची स्थित मोरबडी में 96 लाख रुपए में एक फ्लैट खरीदा है। यह फ्लैट गौतम बुद्ध मार्ग पर सातवें फ्लोर पर है। अग्रवाल ने अपनी कमाई का सबसे अधिक हिस्सा झारखंड के रामगढ़ में लगाया है। इसके साथ ही इनके द्वारा वर्ष 2012 में सात संपत्तियां खरीदी गई हैं जिनमें 1.425 एकड़ में से 1.385 एकड़ जमीन, बिजुलिया रामगढ़ में 77 डेसिमल का प्लाट जिसमें निवास और शोरूम शामिल है। इसके प्लाट नम्बर 457, 459 को इन्होंने खरीदा है। रामगढ़ में ही 38 डेसिमल में एक शोरूम बना है जो प्लाट नंबर 455, 454 में है। कुचेरी, झारखंड, में पंचवटी प्लाजा में 670 वर्गफीट की दुकन भी है। रामगढ़ के ही मरार में 14 डेसिमल प्लाट का पचास फीसदी हिस्सा भी इनका है। इसके साथ ही भोपाल और इंदौर में भी इनके द्वारा प्रापर्टी में निवेश किया गया है। इंदौर जिले के सांवेर तहसील के मांगलिया में 2.723 हेक्टेयर, डीएलएफ गार्डन इंदौर में अरियाडीह 3 हजार वर्गफीट का मकान, भोपाल जिले के फंदा खुर्द में 9.15 हेक्टेयर जमीन का 6.94 फीसदी एरिया है।

आईपीसी केसरी

आईपीसी केसरी के पास बिहार के सासाराम में 15 लाख के दो मकान, जिससे सालान एक लाख रूपए की आय होती है। गौतमबुद्ध नगर नोयडा में 3.25 करोड़ का फ्लैट, जिससे सालाना 8 लाख रुपए की आय होती है। वहीं हरियाणा के गुड?ांव में अपार्टमेंट और यूपी के गाजियाबाद में प्लाट है। वहीं मनोज झलानी के पास बरखेड़ा कलां में 16 लाख की जमीन, अहमदपुर में 19 लाख रुपए की जमीन और कोटरा सुल्तानाबाद में 52 लाख रुपए का मकान है। इस मकान से इनको सालाना 1.38 लाख रुपए की आय होती है।

राजेश राजौरा के पास 4 एकड़ जमीन

आईएएस अधिकारी राजेश राजौरा के पास भोपाल के मेंडोरा में चार एकड़ जमीन है। राजौरा ने इसकी कीमत 48 लाख रूपए बताया है। वहीं, अनुराग जैन के पास होशंगाबाद रोड पर 53 लाख रूपए से अधिक की जमीन, ग्राम पिपलिया में 25 लाख रूपए से अधिक की जमीन, प्रेमपुरा में 55 लाख रूपए की जमीन है। वहीं नोएडा और जयपुर में इनके फ्लैट हैं। जेएन कंसोटिया के पास इंदौर और भोपाल में मकान तथा जयपुर में प्लॉट है।

केसरी के पास भी जमीन

अजीत केसरी के पास हुजूर तहसील में खेती की जमीन है। रायपुर में प्लाट और खेती की जमीन है। दिल्ली में फ्लैट 2013 में कीमत 13.50 लाख की कीमत का है। गुड?ांव में भी फ्लैट, समरधा में खेती की जमीन है। बाग मुगालिया में जमीन है। अशोक वर्णवाल के पास झारखंड के गिरीडीह में 60 लाख रूपए का मकान है। बिसनखेड़ी में 35 लाख रूपए की कृषि भूमि, बावडि?ा कलां में 1.63 करोड़ से अधिक की कृषि भूमि और बावडि?ा कलां में 65 लाख रूपए का फ्लैट है। वहीं मलय श्रीवास्तव के पास विद्या नगर में प्लाट, चोपड़ा कलां और बरखेड़ी खुर्द में जमीन है।

प्रवीण गर्ग के पास जबलपुर में खेती की जमीन है

केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ आईएएस अधिकारी प्रवीण गर्ग के पास हरियाणा में 70 लाख का मकान है। इसी तरह जबलपुर जिले की शहपुरा तहसील अंतर्गत इमलिया गांव में इनके द्वारा खुद व पत्नी के नाम पर 3 एकड़ जमीन खरीदी गई है।
गुलशन बामरा द्वारा जम्मू एंड कश्मीर में आवासीय जमीन 2006 में क्रय की गई जिसकी कीमत 18 लाख 84 हजार है। भोपाल के कोटरा में वर्ष 2015 में घर खरीदा गया जिसकी कीमत 66 लाख 75 हजार रुपए है। इन्होंने किसी भी प्रापर्टी से आय होना नहीं बताया है। रिवेरा टाउन में क्रय की गई प्रापर्टी की कीमत नहीं बताई है। राघवेन्द्र सिंह ने रीवा के त्योंथर में 1.18 एकड़ कृषि भूमि 1992 में खरीदी है। इसकी कीमत महज 1 लाख 85 हजार बताई गई है। 14 हजार रुपए वार्षिक आय होती है। इंदौर में 2014 में प्लाट खरीदा जो कि 66 लाख 5 हजार का है।

-विवेक कुमार पोरवाल द्वारा बावडिय़ा कलां, भोपाल, में महज 1 लाख 10 हजार की प्रापर्टी होना बताया गया है। उन्होंने आकृति ईको गार्डन में 2010 में एक और 27 लाख की प्रापर्टी क्रय की है। यह संपत्ति उनकी पत्नी शिप्रा पोरवाल के नाम से है।

-मुकेश कुमार शुक्ला अमीरों की श्रेणी में हैं। उन्होंने केशरबाग इंदौर में वर्ष 2003 में 17 लाख का घर होना बताया है। वर्तमान कीमत 75 लाख है तथा 88 हजार रुपए वार्षिक आय है। इंदौर में ही बॉबे अस्पताल के पास दो प्रापर्टी होना बताया गया है। दोनों की कीमत 70 लाख बताई है। उन्होंने अपने और पत्नी के नाम से प्रापर्टी जुटाई है। मायाखेड़ी देवास में वर्ष 2015 में 25 लाख की जमीन क्रय की गई।

-श्रीनिवास शर्मा के पास रीवा जिले के त्योंथर में 12 एकड़ की जमीन पैतृक मिलना बताया है। जबलपुर के कचनार सिटी में 2002 में 4 हजार वर्गफुट का प्लाट खरीदा जिसकी वर्तमान कीमत 23 लाख 80 हजार बताई है। ग्राम गोसलपुर सीहोरा जिला जबलपुर में 6 हैक्टेयर जमीन है। सभी प्रापर्टी से 8 लाख से अधिक की वार्षिक आय होती है।

-रुचिका चौहान उत्तरप्रदेश की है। 2011 बैच की आईएएस रुचिका ने नूर नगर गाजियाबाद में एक फ्लैट शैलेन्द्र सिंह चौहान के नाम होना बताया है। इसकी कीमत 30 लाख रुपए बताई गई है। उन्होंने आईएएस बनने के बाद वर्ष 2014 में इंदौर में प्रापर्टी ले ली। उनके नाम से सैफरोन सिटी, पालखेड़ी में 20 लाख का प्लाट लेना बताया है।

-श्रीकांत बनोठ वर्ष 2009 में आईएएस बने। लेकिन उनके पास प्रापर्टी की कमी नहीं है। उनके नाम से आंध्रप्रदेश में ढाई करोड़ की प्रापर्टी है। इससे उन्हें 18 लाख की वार्षिक आय होती है। यह प्रापर्टी मां द्वारा मिली बताई गई है। आंध्रप्रदेश में ही वर्ष 2000 में पिता द्वारा क्रय की गई प्रापर्टी भी है जिसकी मौजूदा कीमत 46 लाख है। उनके पास इसी प्रदेश में कृषि भूमि भी है जिसकी कीमत तीन लाख रुपए बताई गई है। यह प्रापर्टी भी उन्हें गिफ्ट में मिली बताई गई है। इससे उन्हें हर साल एक लाख रुपए की सालाना आय होती है।

महिला आईएएस भी संपत्ति बनाने में नहीं पीछे

अरुणा शर्मा
जमीन में निवेश करने में महिला आईएएस अफसर किसी से कम नहीं है। 1982 बैच की अरुणा शर्मा के पास इंदौर के तलावली चांदा गांव में उन्होंने 1999 में पांच लाख की जमीन खरीदी लेकिन वर्तमान कीमत उन्हें पता नहीं है। भोपाल के अहमदपुर में 1995 में प्लॉट लिया। हरियाणा के गुडग़ांव में पायोनियर पार्क में वर्ष 2008 में 63 लाख का फ्लैट स्वयं और पुत्र अजय के नाम पर लिया। इससे 45 हजार रुपए किराया आता है। गुडग़ांव में ही वर्तमान कीमत के अनुसार 1 करोड़ 75 लाख का फ्लैट है। गौरी सिंह के पास फंदा में 80 लाख का प्लॉट है। वहीं, बरखेड़ा खुर्द में 30 लाख रुपए की खेती की जमीन है। राजस्थान के जयपुर में 60 लाख का मकान है। वीरा राणा के पास चूना भट्टी में जमीन, जाटखेड़ी में 28 लाख का मकान है। इलाहाबाद में मां से मिला मकान है। सलीना सिंह का अरेरा कॉलोनी में मकान, इंदौर में दो गोदाम है। दोनों से आय क्रमश: 6.67 लाख सालाना और 20 हजार रुपए महीना होती है।

संपत्ति ब्यौरे में कई झोल

मप्र के आईएएस अफसरों ने वर्ष 2019 की अपनी अचल संपत्ति का जो ब्यौरा दिया है उसमें कई झोल नजर आ रहे हैं। प्रदेश में ऐसे कितने ही नौकरशाह हैं, जिन्होंने अपने सेवाकाल में संपत्ति का बैलेंस शीट 100 गुना तक बढ़ा लिया है। वहीं केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर जनजाति कार्य मंत्रालय में सचिव के पद पर पदस्थ मध्यप्रदेश कॉडर के 85 बैच के आईएएस दीपक खांडेकर के पास पिछले साल 2018 में करोड़ों रुपए की सम्पत्ति थी। उनके पास नोएडा में स्वयं और पत्नी के नाम से खरीदा गया एक करोड़ का प्लाट तथा 55 लाख का मकान और भोपाल में स्वयं के नाम से 10 लाख का फ्लैट था। भोपाल के फ्लैट से इन्हें तीस हजार रुपए और नोएडा के मकान से सालाना तीन लाख 20 हजार रुपए की आमदनी होती थी। इस साल 27 जनवरी 2020 को इन्होंने जो सम्पत्ति का ब्यौरा दिया है उसमें इनके पास अब कोई भी सम्पत्ति बाकी नहीं रह गई है।

नौकरशाहों की संपत्ति का ब्यौरा जो ऑनलाइन दिया गया है, उससे अर्थशास्त्री कतई संतुष्ट नहीं हैं। उनका मानना है कि अफसरों द्वारा घोषित संपत्ति के ब्यौरे की कीमत बाजार दर पर किसी अच्छे वैल्युअर से आंकी जाए तो पता चलता है कि दर्शाई हुई कीमत से कम से कम 25 गुना अधिक कीमत छुपाई गई है। उदाहरण के लिए इकबाल सिंह बैंस की पंजाब में घर, खेती-बाड़ी सब को मिलाकर जितनी कीमत दर्शायी गई है, वह आज की कीमत के हिसाब से 25 गुना कम है।

इंदौर-भोपाल में सबसे अधिक निवेश

अफसरों का इंदौर-भोपाल प्रेम सिर्फ पोस्टिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें संपत्ति भी इन्हीं दो शहरों में चाहिए। नब्बे प्रतिशत आईएएस और आईपीएस अफसरों ने इन शहरों में एक न एक अचल संपत्ति बना रखी है। किसी के पास इंदौर में गोदाम है तो किसी के पास भोपाल में प्लॉट। इस पर भी 50 प्रतिशत अफसर ऐसे हैं, जिन्होंने नोएडा में जबरदस्त निवेश किया है। फ्लैट, प्लॉट, बंगला तक बनाया है वहां। वैसे, अन्य राज्यों से आए ज्यादातर अफसरों ने अब मध्य प्रदेश में ही जिंदगी गुजारने की ठान ली है।

कई आईएएस आज भी बेघर

जहां एक तरफ अधिकांश आईएएस अफसरों ने मकान, जमीन में जमकर निवेश किया है, वहीं कई अफसर ऐसे हैं जिनके पास आज तक अपना घर नहीं है। इनमें कई अफसर ऐसे भी हैं, जिन्हें सर्विस में रहते हुए 20 से 29 साल तक बीत गए, पर वे अपना घर नहीं बना पाए। केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण मंत्रालय को भेजी गई मध्यप्रदेश कैडर के आईएएस अफसरों की संपत्ति की जानकारी में ये तथ्य सामने आए। वहीं 1988 बैच के आईएएस अफसर संजय बंदोपाध्याय के पास 29 साल की सर्विस के बाद भी न खुद का मकान है और न ही जमीन का एक टुकड़ा। हालांकि बंदोपाध्याय के पास बाग मुगालिया में एक करोड़ का मकान और फरीदाबाद में 72 लाख का प्लाट है, जो उनके पिता ने खरीदा था। वहीं 1990 बैच के अफसर अश्विनी राय, 1991 बैच की नीलम शमी राव 1995 बैच के सचिन सिन्हा के पास भी मकान नहीं है। वहीं 1999 बैच के नवनीत कोठारी, राहुल जैन, धनंजय सिंह ने भी प्रापर्टी में इन्वेस्टमेंट नहीं किया। इनके अलावा प्रियंका दास, शिवपाल, तन्वी सुंदरियाल, भास्कर लक्ष्कार, उमाशंकर भार्गव, हरजिंदर सिंह, एफ राहुल हरिदास, हर्षिका सिंह, नीरज कुमार सिंह, निधि निवेदिता, पंकज जैन, प्रतिभा पाल, दीपक आर्य, अजय कटेसरिया, उमा माहेश्वरी आर, सतीष कुमार एस, ऋषि गर्ग, रजनी सिंह, मयंक अग्रवाल, हर्ष दीक्षित, गिरीश कुमार मिश्रा, अनूप कुमार सिंह, अमनवीर वैश्य, शीतल पटले, साकेत मालवीय,ऋषभ गुप्ता, रीता बाफना, जे लोकेश कुमार रामचंद्र, भाव्या मित्तल, अविनाश वशिष्ट, अंकित, आदित्य सिंह, संस्कृति जैन, ऋतु राज, रानी बंसल, जे रीभा, हिमांशु चंद्रा, हर्ष सिंह, हर्षल पंचोली, बालगुरू के, अर्पित वर्मा, प्रति यादव, जयंति सिंह, हरेन्द्र नारायण, गौरव बैनल, आशीष सांगवान, जेड परीक्षित संजय राव, विवेक कुमार, शेरसिंह मीणा, रोहित सिसौदिया, राहुल नामदेव ढोटे, गुरू प्रसाद, अभिषेक मिश्रा, सिद्धार्थ जैन, श्यामवीर, हर सिमरत कौर, संघप्रिया, अमन वैष्णव, श्रुति जयंत देशमुख, श्रेयांस कुमावत, पवन सचिन प्रकाश, निधि सिंह, काजल ज्वाला,हिमांशु प्रजापति, दिलीप कुमार, अक्षत जैन के पास भी कोई अचल संपत्ति नहीं है।

इन आईपीएस के पास नहीं है मकान

2019 बैच के विनोद कुमार मीना, प्रियंका शुक्ला, अभिनव विश्वकर्मा। 2018 बैच के मोती यूआर रहमान, गुंजन आर्या, अर्पण यदुवंशी, आदित्य मिश्रा। 2017 बैच के रवींद्र वर्मा, रोहित केसवानी, विनीत कपूर, पुनित गेहलोत, अंकित जैसवाल। 2016 बैच के रजत सकलेचा और 2015 बैच के अगम जैन।

इन्होंने सर्विस में आते ही खरीदे फ्लैट व प्लॉट

केंद्र सरकार को भेजी गई जानकारी के मुताबिक 2018 बैच के आईएएस में से अभिषेक चौधरी के पास दिल्ली में 1 करोड़ 10 लाख की अचल संपत्ति है। जिसे उन्होंने गिफ्ट मिलना बताया है। वहीं, प्रथम कौशिक के पास हरियाणा और पंजाब में 26 लाख की जमीन है। शिशिर गेमावट के पास 35 लाख जबकि अक्षय कुमार टेमरवाल, अमन वैष्णव का फ्लैट है। तपस्या परिहार ने नरसिंहपुर में 2 करोड़ में दो कृषि भूमि खरीदी है। वहीं इसी बैच की हरसिमरनप्रीत कौर, संघप्रिया, श्यामबीर, सिद्धार्थ जैन के पास कोई अचल संपत्ति नहीं है। वहीं 2015 बैच की संस्कृति जैन ने नागपुर में प्लाट लिया है और उन्हीं के बैचमेट रौशन कुमार सिंह ने सर्विस में आने के बाद एक साल में ही लखनऊ में एक प्लाट और ग्रेटर नॉएडा में एक फ्लैट में निवेश किया है। इसी तरह 2012 बैच के रोहित सिंह व राजीव सिंह और 2013 बैच के फ्रैंक नोबल ने अपने रिटर्न में रीवा, जयपुर और कांचीपुरम में प्लाट में निवेश करने की जानकारी दी है।

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