FATF की बैठक से पहले पाकिस्तान की खुली पोल, आतंकी फंडिंग को लेकर 40 सिफारिशों में से केवल दो पर किया अमल

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नई दिल्ली
फाइनेंशियल ऐक्शन टाक्स फोर्स (FATF)  की अहम बैठक से एक सप्ताह पहले पाकिस्तान को तगड़ा झटका लगा है। एफएटीएप की क्षेत्रीय इकाई एशिया पैसिफिक ग्रुप (APG) की ओर से पाकिस्‍तान के मूल्‍यांकन की पहली फॉलोअप रिपोर्ट को जारी किया गया है। इस रिपोर्ट में पाया गया है कि पाया है कि टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग को खत्म करने के लिए दिए गए सुझावों को लागू करने में पाकिस्तान असफल रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान ने एफएटीएफ की ओर से की गई 40 सिफोरिशों में से केवल दो पर ही प्रगति की है। एफएटीएफ सोमवार से वर्चुअल बैठकें शुरू करेगा जो कि 19 अक्टूबर तक चलेगा और इसमें अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, नीति विकास, रिस्क और ट्रेंड जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। इसके बाद एफएटीएफ 21-23 अक्टूबर के दौरान अपनी वर्चुअल प्लेनरी बैठक आयोजित करेगा, जो आतंक के वित्तपोषण से लड़ने के लिए पाकिस्तान के कदमों का आकलन करेगा। घटनाक्रम से परिचित लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि पाकिस्तान को व्यापक रूप से एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में बनाए रखने की उम्मीद है, जिसमें इसे 2018 में शामिल किया गया था। क्योंकि उस समय चीन, तुर्की और मलेशिया का समर्थन मिला था। और अब उसपर ब्लैक लिस्ट में जाने का खतरा मंडरा रहा है। 

पाकिस्तान की ओर से एपीजी की रिपोर्ट में बताया गया है कि देश में 40 में से चार सिफारिशों पर गैर अनुपालन, 25 पर आंशिक रूप से अनुपान, और नौ पर बड़े पैमाने पर अनुपाल कर रहा था। ये जो निष्कर्ष निकले हैं ये लगभग एक साल पहले निकाले गए निष्कर्षों के समान थे। जबकि दो सिफारिशों का पूरी तरह से अनुपालन किया जा रहा था।  इसके अलावा एपीजी की 40 सिफारिशें एफएटीएफ की ओर से पाकिस्तान के लिए निर्धारित 27 बिन्दु कार्रवाई से अलग है। इसमें से केवल 14 बिन्दुओं का अनुपालन किया गया था। सिफारिशों में यूएन की ओर से घोषित आतंकियों की संपति को फ्रीज करना, गैर-लाभकारी संगठनों (एनपीओ) के उपयोग के लिए धन जुटाने के लिए आतंकवादी समूहों और यहां तक ​​कि राज्य द्वारा संचालित पाकिस्तान पोस्ट के लिए आतंकवाद-रोधी वित्तपोषण आवश्यकताओं के अधीन नहीं होने जैसे मुद्दों को कवर करती हैं।