कृषि बिल से किसानों को नहीं मिलेगी उचित कीमत – ‘‘संजय सिंह परिहार‘‘

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कृषि बिल से किसानों को नहीं मिलेगी उचित कीमत – ‘‘संजय सिंह परिहार‘‘

लगान प्रथा की शुरूआत कर रही केन्द्र सरकार

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Syed Javed Ali
मण्डला – म.प्र. कांग्रेस कमेटी के सचिव एवं पूर्व जिलाध्यक्ष संजय सिंह परिहार ने संसद में पेश नए कृषि संशोधन बिल पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है लाल बहादुर शास्त्री जी ने जय जवान जय किसान का नारा देश को दिया था और कांग्रेस ने ठेकेदारी प्रथा खत्म की थी कानून पास किया था के ‘‘जो बोएगा जमीन उसकी होगी। ये कानून एक मील का पत्थर साबित हुआ था सदियों से चली आ रही बंधुआ मजूदरी की प्रथा को खत्म करने में कई पीढ़ियों तक किसान उसके बच्चे उसके पोते धरती जोतते रहते थे लेकिन उनका कर्जा साहूकार माफ नहीं करता था। देश के पूंजीपति और कई राजघरानों ने उसी के चलते कांग्रेस का विरोध शुरू कर दिया था। संसद में उन्हीं राजघरानों और पंजीपतियों के दबाव में ये तुगलकी कानून पास हुआ है, आने वाले समय में जब किसान कर्जा नहीं चुका पायेंगे तो उन्हें जमीन गिरवी रखने पड़ेगी और फिर पीढ़ी दर पीढ़ी बंधुआ मजदूरी की रीत चालू होगी तथा मोदी सरकार द्वारा प्रथम विधयेक आवश्यक वस्तु संशोधन विधेयक 2020 पास किया गया है जिसमें कई विसंगतियां हैं उन्होेेंने बताया कि भारत में सूखे और अकाल जैसे हालात निपटने के लिए के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 1955 में खाद्यान की काला बाजारी रोकने आवश्यक वस्तु अधिनियम संसद यह कानून लाया था, नए बिल में युद्ध अकाल के समय कीमतों में अप्रत्याशित उछल या गंभीर प्राकृतिक आपदा पर ही सरकार कदम उठायेगी, कृषि उत्पाद की जमाखोरी पर कब आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू किया जाएगा इसका स्पष्ट उल्लेख नहीं है। दूसरे कृषि विधेयक में कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य संवर्धन और सुविधा विधेयक 2020 है लाया गया है पूर्व में किसान अपनी फसल राज्य सरकार द्वारा निर्धारित सहकारी सोसायटी में व मंडियों में ही बेच सकते हैं। बदले में उन्हें फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य दिया जाता है व विक्रय किए गए अनाज की रकम मिलने की गांरटी रहती है, न बिल में किसान बाहर भी अपना उत्पाद बेच सकते है उचित रकम मिलने की गांरटी सरकार की नहीं रहेगी जबकि किसान को उसकी नजदीकी मंडी में ही अच्छी कीमत दिलाना सरकार का दायित्व है। तीसरे कृषि विधेयक में मूल्य आश्वासन पर किसान बंदोबस्ती और सुरक्षा समझौता और कृषि सेवा बिल 2020 इस बिल में किसानों को फसल उगाने से पहले ही किसी व्यापारी से समझौता नामा करना है इस समझौते में क्या-क्या होगा। म.प्र. कांग्रेस कमेटी के सचिव एवं जिला कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष संजय सिंह परिहार ने आरोप लगाया है कि इस बिल से किसान व्यापारियों का गुलाम बन जाएगा और उसकी जमीन कुछ दिनों बाद व्यापारी के कर्ज चुकाने में विक्रय हो जाएगी उन्होंने बताया कि सरकारी मंडियो में फसल की एक न्यूनतम कीमत मिलने का प्रावधान था। लेकिन मंडी के बाहर हो न्यूनतम कीमत मिलेगी या नही, इसे लेकर कोई नियम इस बिल में नही है। किसानों की एक चिंता ये भी है कि एपीएमसी मंडी में जो आढ़तिये अभी उनसे फसल खरीदते है, उन्हें मंडी में व्यापार करने के लिए एपीएमसी एक्ट के तहत लाइसेंस लेना होता है। ऐसे में किसान इस बात को लेकर आश्वस्त रहते हैं कि वो धोखाधड़ी नहीं होगी, सरकार स्टाॅक करने की छूट दे रही है लेकिन ज्यादातर किसानों के पास भंडारण की व्यवस्था नहीं है ऐसे में उन्हें उत्पादन के बाद अपनी फसलें औने-पौने दाम पर व्यापारियों को बेचनी होंगी, प्राइवेट कंपनियों के पास ज्यादा क्षमता और संसाधन होते हैं तो वे इनका स्टाॅक करके अपने हिसाब से मार्केट को चलांएगे ऐसे में फसल की कीमत तय करने में किसानों की भूमिका नहीं रहेगी बड़े व्यापारी और कपंनियों ज्यादा फायदा कमाएंगे।