कृषि विधेयकों के विरोध में किसानों ने रैली निकालकर किया प्रदर्शन, उग्र आंदोलन की दी चेतावनी

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मप्र की मंडियों में हड़ताल, किसान सड़क पर

भोपाल। मप्र में एक तरफ कृषि उपज मंडी अधिनियम के विरोध में प्रदेशभर की मंडियों के कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं, वहीं कृषि से जुड़े तीन विधेयकों के विरोध में किसानों ने रैली निकाल प्रदर्शन किया। आंदोलनकारी किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने बिल वापस नहीं लिया तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।
रतलाम, झाबुआ, मंदसौर, खंडवा, रीवा, सतना सहित कई जिलों में किसानों ने प्रदर्शन किया। रतलाम में युवा किसान शक्ति संघ के आव्हान पर शुक्रवार को किसानों ने मंडी बचाओ किसान बचाओ रैली निकालकर प्रदर्शन किया। किसान नेता प्रतीकात्मक रूप से एक ट्रैक्टर पर सावर होकर कार्यकर्ताओं के साथ नारेबाजी करते हुए कलेक्टोरेट पहुंचे। किसानों ने कृषि मंडी की समस्याएं दूर नहीं करने, यूरिया व फसल बीमा राशि नहीं मिलने सहित अनेक सवाल किए। बाद में एसडीएम को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया।

10 हजार कर्मचारियों ने काम बंद किया
मप्र में कृषि उपज मंडी अधिनियम 1972 में संशोधन कर मॉडल एक्ट लागू किया गया है। इसका विरोध किया जा रहा है। इसे लेकर मंडी कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं।
हड़ताल के संबंध में जानकारी देते हुए इंदौर चोइथराम फल एवं सब्जी मंडी के प्रभारी प्रदीप जोशी ने बताया कि प्रदेश की सभी मंडियों, जिसमें 10 हजार से ज्यादा कर्मचारी हड़ताल पर हैं। ये कर्मचारी मंडी एक्ट में सुधार न होने तक अनिश्चितकाल तक के लिए हड़ताल पर हैं। आने वाले दिनों में फल एवं सब्जी के साथ ही इससे जुड़ी अन्य सामग्री के दाम बढऩे की संभावना है।

व्यापारी बोले – व्यापार करना मुश्किल हो गया
मंडियों के व्यापारियों का कहना है कि कृषि उपज कारोबार में मॉडल एक्ट लागू होने के बाद मंडी में व्यापार करना मुश्किल हो गया है। व्यापारियों का कहना है कि 1 मई 2020 को अध्यादेश लाया गया है, जो कि प्रदेश के किसानों, हम्माल, तुलावटियों, व्यापारियों, मंडी और मंडी बोर्ड के कर्मचारियों के हित में नहीं है। व्यापारियों की मांग है कि इस अध्यादेश को तुरंत निरस्त किया जाए। साथ ही मंडियों में वसूल किए जाने वाले 1.70 प्रतिशत टैक्स को घटाकर 0.50 प्रतिशत किया जाए।

मोदी सरकार के कृषि विधेयक ने बढ़ाई शिवराज की टेंशन
उपचुनाव में किसानों का आक्रोश भाजपा का सूपड़ा साफ न कर दे
2018 में एट्रोसिटी एक्ट की तरह भारी न पड़ जाए कृषि विधेयक
मोदी सरकार के कृषि विधेयक ने मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और भाजपा के रणनीतिकारों को टेंशन में डाल दिया है। इसकी वजह यह है कि जिन विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव होने वाले हैं उनमें से अधिकांश किसान बहुल क्षेत्र हैं। उन क्षेत्रों में कृषि विधेयक का विरोध होने लगा है। इंटेलीजेंस ने सरकार को रिपोर्ट भेजी है कि किसानों का आक्रोश उपचुनाव में भाजपा पर भारी पड़ सकता है। इस रिपोर्ट के मिलते ही मुख्यमंत्री किसानों, कृषि श्रमिकों और अन्य मजदूरों को लुभाने में लग गए हैं। अब शायद ही इनका असर किसानों और मजदूरों पर पड़े। उधर, भाजपा के रणनीतिकारों को कृषि विधेयक 2018 के एट्रोसिटी एक्ट की तरह भयावह लगने लगा है।
गौरतलब है कि 2018 के विधानसभा चुनाव में मजबूत स्थिति में होने के बावजूद भाजपा एससी-एसटी एट्रोसिटी एक्ट और किसानों की नाराजगी के कारण 15 साल बाद सत्ता से बाहर हो गई थी। हालांकि 15 माह बाद जोड़-तोड़ कर वह सत्ता में आ गई है, लेकिन जिन 28 सीटों पर उपचुनाव होना है उन क्षेत्रों में फिर से भाजपा के खिलाफ माहौल बनने लगा है। गौरतलब है कि इन 28 सीटों में से 27 कांग्रेस के कब्जे वाली सीटें हैं।