शहर में हाथी की चहलकदमी और ग्रामीण में बढ़ रहा पंजा, भाजपा का खिसक रहा जनाधार

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भाजपा प्रत्याशी रघुराज सिंह कंषाना नजर नहीं आ रहे सक्रीय, कुछ ही समर्थकों के बीच घिरे

भाजपा कार्यकर्ताओं में नाराजागी फिर भी सुधार के नहीं प्रयास

awdhesh dandotia
मुरैना। मतदान की तिथि जैसे-जैसे नजदीक आ रही है चुनाव प्रचार परवान चढऩे लगा है। लेकिन प्रचार के इस दौर में भारतीय जनता पार्टी पूरी तरह पिछड़ी नजर आ रही है। मुरैना विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस व बसपा की सीधी टक्कर अब नजर आ रही है। भाजपा का नाम केवल उन सभाओं में ही नजर आ रहा है जो सिंधिया या मुख्यमंत्री आयोजित कर रहे हैं। इसके अलावा शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा का नाम लेने वाले कम ही लोग हैं। कारण यह है कि लोग भाजपा प्रत्याशी रघुराज सिंह कंषाना को पसंद नहीं कर रहे है जिसका खामियाजा भाजपा को उठाना पड़ सकता है।
मुरैना विधानसभा क्षेत्र के शहरी इलाके में जहां बहुजन समाज पार्टी लोगों के जेहन में है तो ग्रामीण क्षेत्र में कांग्रेस को भरपूर जनसमर्थन मिल रहा है। यानि शहर के अधिकांश लोग दबी जुबां से रामप्रकाश राजौरिया के पक्ष में ही मतदान करने की बात कह रहे हैं उधर कांग्रेस ने ग्रामीण क्षेत्र में अपने पक्ष में अभी तक माहौल बनाया है। लेकिन भाजपा प्रत्याशी रघुराज कंषाना न तो शहरी क्षेत्र में छाप छोड़ पा रहे हैं और नही ग्रामीण मतदाताओं को मना पाए हैं। वह केवल भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की आवभगत में ही लगे हैं। रघुराज का रवैया देखकर ऐसा लगता है कि वह मुख्यमंत्री व सिंधिया के सभाएं करवाकर ही उपचुनाव को जीतना चाहते हैं। ऐसा लगता है कि मुख्यमंत्री व सिंधिया की सभाओं में वह मंच पर हाथ जोड़कर खड़े हो जाते हैं और वहां मौजूद भीड़ को देखकर वह उसे अपने लिए अच्छा जनसमर्थन मान बैठे हैं। खबर तो यहां तक है कि भाजपा के ही कार्यकर्ता भी रघुराज के पक्ष में नहीं है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को दिखाने के लिए तो कार्यकर्ता साथ-साथ घूम रहे हैं लेकिन अंदरूनी तौर पर वह भाजपा प्रत्याशी को जिताना नहीं चाहते। लेकिन रघुराज सिंह कंषाना को इसे समझने की फुर्सत नहीं है वह अपने कुछ चार-छह समर्थकों के बीच घिरकर ही रह गए हैं और ऐसे समर्थकों के कारण उनके चुनाव प्रचार पर खासा असर पड़ रहा है। मतदान का दिन नजदीक आ चला है लेकिन वह अपनी हवा नहीं बना पाए हैं।

वैश्य वर्ग को मनाने की कवायद नहीं :
बीते विधानसभा चुनाव में वैश्य वर्ग ने रघुराज को खुलकर समर्थन दिया था। इस कारण रघुराज आसानी से चुनाव जीत गए थे। लेकिन इस बार वैश्य वर्ग का झुकाव उनकी ओर कतई नहीं है। बावजूद इसके उन्होंने अभी तक वैश्य वर्ग को मनाने की कोई कवायद नहीं की है। हालांकि वह महाराजा अग्रसेन जयंती के दिन केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर के साथ अग्रवाल महासभा संरक्षक रमेश गर्ग से मिलने पहुंचे थे। लेकिन रमेश गर्ग ने उन्हें तबज्जो नहीं दी थी। इस कारण वैश्य वर्ग का झुकाव अब बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी रामप्रकाश राजौरिया की ओर नजर आ रहा है।

ग्रामीण क्षेत्र में कांग्र्रेस को इसलिए लाभ :
मुरैना विधानसभा के ग्रामीण क्षेत्र में कांग्रेस को इसलिए फायदा नजर आ रहा है कि यहां गुर्जर समाज में मावई गोत्र के सर्वाधिक वोट हैं और कांग्रेस प्रत्याशी इसी गोत्र से हैं। इस कारण मावई बारह से उन्हें अच्छा खासा वोट मिलने की उम्मीद है। खबर है कि पिछले दिनों कांग्रेस के पक्ष में मतदान करने के लिए इन ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत भी हो चुकी हैं। लेकिन यह सब कवायद रघुराज सिंह कंषाना अभी तक नहीं कर पाए हैं। इस कारण वह चुनावी दौड़ में पूरी तरह पिछड़े नजर आ रहे हैं।