बेटियों की शिक्षा और सुरक्षा के लिए हर स्तर पर प्रयासों की जरूरत है

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अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर सामाजिक मानसिकता में बदलाव की अपील

khemraj morya
शिवपुरी। इतिहास गवाह है कि बेटियां कभी भी समाज और परिवारों में बोझ नहीं समझीं गईं, उन्हें देवी के रूप में हमेशा सम्मान की नजरों से देखा जाता रहा है। यह तो दूषित सामाजिक सोच का परिणाम रहा कि हम विकसित होने का ढोंग करते करते दहेज के लालची बनते गए और अपनी ही बालिका संतान हमें बोझ लगने लगी। यह बात अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के कार्यक्रम में जिला विधिक सहायता अधिकारी शिखा शर्मा ने कही।

महिला एवं बाल विकास द्वारा वन स्टॉप सेंटर में महिला एवं बच्चों के कानूनों पर आयोजित संगोष्ठी में उन्होंने कहा कि हमें बेटे पैदा करने का अहंकार नहीं करना चाहिये। बेटे-बेटियां सब प्रकृति की देन है,उन्हें समान परवरिस, समान स्नेह और समान अवसर देने की जरूरत है। यह दुर्भाग्यपूर्ण ही कहा जायेगा कि हम 21वी सदी में बेटियों को बचाने के लिये इस प्रकार के दिवसों का आयोजन और योजनाओं का संचालन कर रहे है। संगोष्ठी में पीसीपीएनडीटी एक्ट, घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण,पॉक्सो एवं बाल विवाह निषेध कानून के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई। विधिक सहायता अधिकारी शिखा ने कहा कि कानून दूसरों को सबक सिखाने के लिये नहीं, हमारी हिफाजत के लिये होते है। हमें उनके दुरुपयोग से बचना चाहिये। कार्यक्रम में जिला कार्यक्रम अधिकारी देवेंद्र सुंदरियाल ने कहा कि जब हम बच्चों को बिना भेदभाव के शिक्षा, सुरक्षा और विकास के अवसर उपलब्ध कराएंगे तभी सामाजिक विकास होगा। बेटा-बेटी के बीच के भेदभाव को मिटाने की आज नितांत आवश्यकता है। बेटियों की शिक्षा और सुरक्षा के लिये हर स्तर पर प्रयासों की जरूरत है।संगोष्ठी में मौजूद नेतृत्व विकास पाठ्यक्रम के स्टूडेंट्स को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अगर हमारा ज्ञान दूसरों के काम नहीं आया तो व्यर्थ है। सच्चा ज्ञान तो वही है जो समाज को नई सोच दे सके। कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास द्वारा संचालित बैचलर ऑफ सोशल वर्क पाठ्यक्रम के तृतीय वर्ष के स्टूडेंट्स को नेतृत्व विकास की डिग्रियां प्रदान की गईं। इस अवसर पर बाल संरक्षण अधिकारी राघवेंद्र शर्मा, वन स्टॉप सेंटर प्रशासक कंचन गोड़, ममता संस्था की जिला समन्वयक कल्पना रायजादा,सामाजिक कार्यकर्ता जीतेश जैन, पर्यवेक्षक मंजू धाकड़ एवं चाइल्ड लाइन टीम सदस्य संगीता चौव्हाण ने भी महिला एवं बच्चों से जुड़े विषयों पर जानकारी दी।

साइकिल रैली निकालकर दिया बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का संदेश

महिला बाल विकास विभाग नरवर द्वारा बेटी बचाओ बेटी पढाओं योजनांतर्गत अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर किशोरी बालिकाओं की साईकिल रैली का आयोजन किया गया। इस अवसर मुख्य अतिथि के रूप में महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी देवेन्द्र सुंदरियाल ने हरी झंडी दिखाकर साईकिल रैली का शुभारंभ किया गया। श्री सुंदरियाल ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस के उपलक्ष्य में उपस्थित आंगनवाडी कार्यकर्ताओं, किशोरी बालिकाओं एवं जनसमूह को सामाजिक स्तर पर महिलाओं की भागीदारी बढाने तथा सभी सामाजिक एवं प्रशासनिक स्तरों पर मुख्य रूप से सशक्त भूमिका निभाने वाली हस्तिओं का उदाहरण देकर किशोरी बालिकाओं को जीवन में आगे बढने हेतु प्रेरित किया। महिला सशक्तिकरण की दिशा में विभाग द्वारा किये जा रहे कार्यों के बारे में भी जानकारी प्रदान की। साईकिल रैली महिला एवं बाल विकास विभाग नरवर के जनपद परिसर में स्थित कार्यालय से प्रारंभ होकर बाईपास के रास्ते लोढी माता मंदिर से होते हुए नरवर मुख्य बाजार के रास्ते से वापिस होते हुए कार्यालय पर समाप्त हुई। उक्त रैली के सफल आयोजन में पुलिस विभाग नरवर का भी योगदान सराहनीय रहा। परियोजना अधिकारी रविरमन पाराशर द्वारा रैली समाप्ति पर भागीदारी करने वाली किशोरी बालिकाओं एवं आंगनवाडी कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया। उक्त रैली के आयोजन में मुख्य रूप से अजय तिवारी, धर्मेन्द्र यादव, श्रीमती अर्चना महाजन, श्रीमती कीर्ति वर्मा, श्रीमती जयदेवी रावत, श्रीमती निशा सिकरवार, श्रीमती अनीता श्रीवास्तव, शंकर मौर्य, अरविंद सिंह राजौरिया आरक्षक, सुनील रावत आरक्षक, केदारीलाल आदिवासी का योगदान सराहनीय रहा।