दुबई और यूके के यात्रियों से भारत में फैला कोरोना: स्टडी में हुआ खुलासा

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नई दिल्ली, भारत में कोरोना वायरस ने कहर मचा रखा है लगातार बढ़ रही संक्रमितों की संख्या एक बड़ी चिंता का कारण बना हुई है। वहीं इसी बीच इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी मंडी की स्टडी में खुलासा हुआ है कि दुबई और यूके के यात्री भारत में कोरोना लाने के प्राथमिक स्रोत थे। यह शोध जर्नल ऑफ ट्रैवल मेडिसिन में प्रकाशित हुआ है। स्टडी में दावा किया गया है भारत में कोरोना मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय यात्रा के कारण भारत के विभिन्न राज्यों में फैल गया।

आईआईटी मंडी की सहायक प्रोफेसर सरिता आज़ाद ने बताया कोरोना के संक्रमण को वैश्विक से राष्ट्रीय स्तर तक ट्रैक किया गया। जिसमें भारत में इस बीमारी के फैलाव केंद्रीय भूमिका निभाने वाले कुछ सुपर स्प्रेडरों की पहचान की। मरीजों की यात्रा का इतिहास से पाया गया कि अधिकांश लोग स्थानीय थे।

इन राज्यों में भी फैला संक्रमण
अध्ययन में यह भी पाया गया है कि तमिलनाडु, दिल्ली और आंध्र प्रदेश से संक्रमित मामलों ने अपने समुदायों के बाहर बीमारी फैलाने में कम भूमिका निभाई। जबकि गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, केरल, जम्मू और कश्मीर, और कर्नाटक में संक्रमित लोगों ने स्थानीय प्रसारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उनमें से कुछ लोगों ने दूसरे राज्यों में संक्रमण को फैलाया।

दुबई और यूके के यात्रियों से भारत के राज्यों में फैला संक्रमण
आजाद ने बताया कि आंकड़ों से गणना किए गए सांख्यिकीय मैट्रिक्स से पता चला है कि दुबई और यूके ने भारतीय राज्यों में इस बीमारी को फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रिसर्च टीम ने जनवरी से अप्रैल तक संक्रमित रोगियों के यात्रा इतिहास का उपयोग किया है क्योंकि इनमें प्राथमिक डेटा स्रोत और एक सोशल नेटवर्क महामारी के शुरुआती चरण में फैलने का चित्रण किया गया था। रिसर्च में पाया गया कि कनेक्शन की अधिकतम संख्या से स्थापित किए गए थे। दुबई की आइजन्वेक्टर केंद्रीयता उच्चतम थी जिसने इसे सबसे प्रभावशाली नोड बना दिया। आंकड़ों से गणना किए गए सांख्यिकीय मेट्रिक्स ने खुलासा किया कि दुबई और यूके ने भारतीय राज्यों में बीमारी फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

वैश्विक स्तर पर भी कैसे फैली बीमारी इसका भी है डेटा
अध्ययन करने वाले आजाद ने बताया कि जब कोरोना जैसी महामारी का फैलती है तो एक अच्छा रिसर्च कार्य फ्यूचर के लिए एक रिकॉर्ड के रूप में कार्य करता है। इस कार्य में, हमने समय डेटा और का उपयोग किया है। हमने यह प्रदर्शित किया गया कि 30 जनवरी से 6 अप्रैल तक बीमारी वैश्विक स्तर पर राष्ट्रीय स्तर पर कैसे फैल गई। यह महामारी के शुरुआती चरण के दौरान भारत में रोग के संचरण को समझने में एक महत्वपूर्ण योगदान होगा।