नदी के बहाने सियासी जमीन बचाने की जुगत में डॉ. गोविन्द सिंह

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चंबल संभाग की नदियों नदियों के संरक्षण को लेकर 11 सितम्बर तक चलेगी पदयात्रा

आनन्द शुक्ल

मध्यप्रदेश की राजनीति में इन दिनों नदी एक बार फिर चर्चा में है। गजब की बात है कि नदियों के संरक्षण की बात इससे पहले जब भी की गई तब-तब कांग्रेस ने यह कहा कि भाजपा का यह शगल है कि वो इस प्रकार की चीजों का इस्तेमाल चुनावी हथकंडे के लिये ही करती है। अब इस बार चंबल की नदियों के संरक्षण का बीड़ा कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता डॉ. गोविन्द सिंह ने खुद उठाया है जो इसके पहले इस प्रकार के कदमों का पुरजोर विरोध करते रहे हैं। हालांकि 2022 के चुनावों से अपने आपको चुनावी राजनीति से दूर करने की घोषणा कर चुके डॉ. सिंह को अब अचानक नदी के बचाव और संरक्षण की जरूरत क्यूं आन पड़ी? यह तो वही बताएंगे। अभी फिलहाल तो ऐसा लगता है कि चंबल संभाग की 16 सीटों पर होने वाले उपचुनावों की मजबूरी ने डॉ. सिंह को नदी बचाने की याद दिलाई है। नदी के बहाने सिहासी जमीन बचाने की जुगत में पूर्व मंत्री डॉ. सिंह ने यह अभियान शुरू किया है। दरअसल पूर्व मंत्री डॉ. गोविन्द सिंह अभी इस बात को लेकर आशांवित हैं कि सीटों का अंक गणित कांग्रेस के पक्ष में आ सकता है और वे एक बार फिर सत्ता की सीढ़ी चढ़ सकते हैं।

गौर करने वाली बात यह है कि बीते वर्ष 2016 मं जब सीएम शिवराज ने प्रदेश की जीवन रेखा नर्मदा संरक्षण यात्रा निकाली थी तब डॉ. गोविन्द सिंह मुख्य आलोचकों में से एक थे। तब वे पानी पीकर कोसने का काम करते और तत्कालीन सरकार को हर कदम पर घेरने की कोशिश करते। कास ऐसा हुआ होता कि प्रदेश की सियासी जमावट में बड़ा नाम होने के नाते डॉ. गोविन्द सिंह दलीय विचार से उपर उठकर नदी बचाओ, पर्यावरण, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि महत्वपूर्ण मुद्धों पर या तो सुझाव दिये होते या उस दिशा में हो रहे प्रयासों का समर्थन किये होते।

चंबल की धरा पर खासतौर पर भिण्ड में बहने वाली नदियों की सुरक्षा और उनके प्रवाह को अविरल बनाये रखने के लिए कांगे्रस के इस दिग्गज नेता के प्रयासों में कोई बड़ा नेता अभी तक उनके साथ सड़कपर नहीं उतरा। यह भी घटना चैंकाने वाली ही है। हालांकि मौजूदा सांसद विवेक तन्खा ने वहां पहंुचकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और नदियों के संरक्षण के लिए अदालत में याचिका लगाने की भी बात कही। पार्टी के ही दूसरे वरिष्ठ नेता अजय सिंह राहुल ने भी अपनी उपस्थिति इस अभियान में दर्ज करायी है। नदियों के लिए यदि सचमुच सड़क से लेकर सदन और जरूरत पड़ने पर न्यायालय तक ठोस प्रयास होते तो आम आदमी भी इन प्रयासों का स्वागत करता।

उपचुनावों के इस वातावरण में डॉ. गोविन्द सिंह के प्रयासों से कांगे्रस को कितना लाभ होगा यह तो भविष्य बताएगा। फिलहाल तो डॉ. नरोत्तम मिश्रा का कहना है कि- का वर्षा जब कृषि सुखानी। उनका कहना है कि डॉ. सिंह जब मंत्री थे उसी वक्त पदयात्रा निकालते तो वह ज्यादा परिणाममूलक होती।