डी.के. श्राफ अपनी लगन व मेहनत से वालीवुड़ में काम कर कमाया अच्छा नाम

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जिले के तामिया के हैं निवासी, प्रारंभ में किया बहुत संघर्ष

कास्टिंग डायरेक्टर का रोल अदा कर रहे हैं फिल्मों में

राकेश यादव
छिन्दवाड़ा/जुन्नारदेव, मध्यप्रदेश के जिलें छिन्दवाड़ा के जुन्नारदेव निवासी डी. के श्राफ वर्तमान में मात्र अपनी लगन एवं कड़ी मेहनत से मुंबई (वालीवुड) में अच्छा नाम कमा चुके हैं। शुरू में जब ये मुंबई पहुंचे उस समय यह डगर किसी भी दृष्टि से मुमकिन नहीं दिख रही थी, किन्तु मन में एक सुखद सपना लेकर जो पहुंचें थें उसके लिये भारी संघर्ष किया एवं वर्तमान में यहाॅं कास्टिंग डायरेक्टर हैं और अपना यह रोल निभा रहें है।

ज्ञात रहे कि इनकी माता अपने इस बच्चें का भविष्य जानती थी कि मेरा ये बच्चा अपने समय में मुबंई (वालीवुड) में धूम मचायेगा। इस बात को लेकर जब परासिया-तामिया क्षेत्र में फिल्म तेरे मेरे सपने की सूटिंग चले रही थी, जिसके अभिनेता देवानंद थें, इनके नाम को देख ही इनकी माता ने इनके नाम समान डी.के. श्राफ रखा था।

शुरूवाती समय में की भरपूर मेहनत – सन् 1994 में जब ये पहली बार मुंबई पहुचंे थें उस समय इनके मन में कुछ कर गुजरने की इच्छा थी। इस बात को लेकर श्री श्राफ अपने शुरूआती समय में पहलें संभल के चलें एवं इस दौरान इन्होने पूरी लगन के साथ भरपूर मेहनत की।

समय के साथ बढ़तें चलेग आगें – जैसें ही इनके जीवन के शुरूआती छड़ निकलें, वैसे-वैसे आगे बढ़तें गये एवं वर्तमान में फिल्मी दुनिया (वालीबुड) में कास्टिंग डायरेक्टर के पद पर सुशोभित हैं एवं अपने निर्देशन में कई फिल्मों का निर्माण करा चुके है।
पहली अचीम भेंट फिल्म हैं वेलकम – श्री श्राफ का जो कास्टिंग डायरेक्टर का जो पद हैं उस के हिसाब से उनकी पहली फिल्म वेलकम हैं जिसमें उन्हें कास्टिंग डायरेक्टर का रोल निभानें का मौका मिला। जिसमें फिल्म अभिनेता फिरोज खान थें।
वालीवुड में सबसे ज्यादा सितारों कें हैं क्लाइंट – एक फिल्म बनाने में कास्टिंग डायरेक्टर का रोल बहुत महत्वपूर्ण होता हैं एवं अब तक इन्होनें सैकड़ों फिल्मों में रोल निभा चुके हैं इस बात के चलते वालीवुड (फिल्मी दुनिया) में सबसे ज्यादा सितारों के क्लाइंट हैं।
दूसरे के सपने पूरे कर प्राप्त करते हैं – श्री श्राफ जी इस बात को भली भांति जानते है। कि इस दुनिया में कार्य करने बड़ें पैमाने पर लड़किया आती हैं, जो यहाॅं कार्य करने के चक्कर में शोषित होती हैं, इन्हें शोषित होने से पहलें इन्हें बचाना, फिर इनकी मदद करना, इसमें इन्हें सच्चा सुख प्राप्त होता हैं, ऐसा इनका मानना हैं।
नोट – फोटो संलग्न है।