वन संरक्षक कार्यालय में ही पेड़ों का हुआ विध्वंस

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5 वृक्षों को छंटनी के नाम पर काटा गया और लकड़ी, दिन दहाड़े ही गायब

brijesh parmar
उज्जैन। वनों का संरक्षण करने वाले और पेड़ों को सुरक्षित रखने वाला विभाग ही बागड़ के खेत खाने की कहावत को चरितार्थ कर रहा है। वर्तमान में वृक्ष लगाने की बजाए छंटाई के नाम पर उनकी कटाई की जा रही है और तो और लकड़ी भी गायब।

यह सत्य वन संरक्षक कार्यालय से चंद मीटर दूरी का है। और तो और वन संरक्षक पूछे जाने पर उल्टा सवाल करते हैं आपको किसने बताया।
वन विभाग के कारनामे एक बार फिर अपने घड़े से बाहर आने लगे हैं। जिले में अवैध वनों की कटाई हो रही है।

राजस्व क्षेत्र से कटाई कर लकड़ कट्टे बगैर टीपी के परिवहन कर रहे हैं। ना कोई देखने वाला है और ना ही कोई सुनने वाला। आरा मशीनों पर बगैर मार्का की लकड़ी धड़ल्ले से उतर रही है। लकड़ कट्टे जिला और संभागीय कार्यालय में ऐसे उठ बैठ रहे हैं जैसे घर का राज चल रहा है।

शुक्रवार को वन संरक्षक कार्यालय परिसर में ही स्थित नीलगिरी के पांच वृक्षों को छंटाई के नाम कटाई कर दी गई। ठूंठ बाकी रह गए। यहां वृक्ष काटने वालों ने लकड़ी भी नहीं छोड़ी। कार्यालय के अधिकारी-कर्मचारी सोते रहे। सब कुछ होता रहा। खास बात तो यह है कि शासकीय कार्यालय परिसर में छंटाई के नाम पर वृक्षों की कटाई किसकी अनुमति से हुई और क्यों हुई। इस बात के जवाब के लिए वन संरक्षक राजेश यादव से बात कर सवाल किया गया तो उनका सवाल था आपको किसने बताया। जब उनसे पूछा गया संभाग में पौध रोपण की क्या स्थिति है तो वे जवाब देते हैं-डीएफओ से बात कर लो। पुन: उनसे सवाल किया गया, पौध रोपण की संभागीय स्थिति क्या है, तो भी वे बोलते हैं डीएफओ से बात कर लो। पांच वृक्ष काटे जाने के सवाल का जवाब देने की बजाए उन्होंने फोन काट दिया।