असंतुष्ट कार्यकर्ताओ को सक्रिय करने की कवायद में जुटी कांग्रेस

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केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में सक्रिय रखने की रणनीत

भोपाल। प्रदेश में होने वाले निकाय चुनावों से पहले सत्ताधारी दल कांग्रेस केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ धरना और प्रदर्शन की रूपरेखा तैयार कर रही है। इसी के चलते आगामी माह की चौदह दिसंबर को दिल्ली में जंगी प्रदर्शन की तैयारी कांग्रेस में जोरों से चल रही है। इस पूरी कवायद के पीछे बताया जा रहा है कि राज्य में सरकार को गठित हुए एक साल होने जा रहे हैं और अभी तक किसी प्रकार की राजनीतिक नियुक्ति नहीं हुई है। इस बात को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं में गहरा असंतोष है। बताया तो यह भी जा रहा है कि पार्टी कार्यकर्ता अब धीरे धीरे घर बैठने लगे हैं। यही कारण है कि पार्टी अब कार्यकर्ताओं को मिशन पर लगाने का सोच रही है। इसी के चलते हाल ही में कें द्र की नीतियों के खिलाफ राजधानी भोपाल से लेकर प्रदेश भर के
जिला कार्यालयों पर धरना प्रदर्शन किया गया। गौर करने वाली बात यह है कि हाल ही में कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया ने समीक्षा बैठक के दौरान प्रदेश के जिम्मेदार नेताओं से कहा था कि दिल्ली के प्रदर्शन में कम से कम चालीस हजार तक की भीड़ आनी चाहिए।
परिसीमन शेष
जहां तक निकाय चुनावों का सवाल है तो अभी तक उसकी तारीखों का एलान नहीं हुआ है। इसके साथ ही अभी परिसीमन का भी कार्य शेष है। इसके साथ ही राजधानी भोपाल नगर निगम को दो भागों में विभाजित किए जाने का प्रस्ताव भी शासन के पास लंबित है। कुल मिलाकर देखा जाए तो आने वाले लगभग छह माह के अंदर अभी कोई चुनाव की तारीखों का एलान होना संभव नहीं दिख रहा है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिसंबर के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं को और किस काम पर लगाती है। क्योंकि निकाय चुनावों से पहले ना तो पीसीसी चीफ का निर्णय होने वाला है और ना ही किसी निगम मंडल की नियुक्ति होने वाली है।
 क्या कहते हैं जिम्मेदार
 सशक्त नेतृत्व के चलते मिल रही कामयाबी : राज्य में कमलनाथ की सरकार एक सशक्त नेतृत्व वाली सरकार है। इसलिए झाबुआ से लेकर आगामी चुनावों में भी कामयाबी मिलेगी। भाजपा को चाहिए कि वो पहले अपनी स्थिति को देखे और फिर बात करे। राज्य सरकार पर किसी प्रकार का कोई दबाव नहीं है। रही बात केंद्र सरकार से अपने हक को पाने की तो उसके लिए संगठन के कार्यकर्ता हमेशा संघर्ष करने क ो तैयार हैं। ऐसे में निर्णयों को टालने वाला भाजपा का आरोप बेबुनियाद और निराधार है।
 दुर्गेश शर्मा, प्रवक्ता मप्र कांग्रेस
  निर्णय लेने में अक्षम है कांग्रेस सरकार :  प्रदेश में कांग्रेस और कमलनाथ की सरकार तीन तरफा अंतरविरोधों से घिरी हुई है इसलिए वो नीतिगत निर्णय नहीं ले पा रही है। रही बात राजनीतिक नियुक्तियों की तो वो किसी ना किसी बहाने टालने का काम करते रहेंगे। यही कारण है कि अब कार्यकर्ताओं से यह कहा जाने लगा है कि जो सक्रिय दिखेगा नेतृत्व उसी के विषय में विचार करेगा। यह एक राजनीतिक बहानेबाजी है।
 डा दीपक विजयवर्गीय, मुख्य प्रवक्ता मप्र भाजपा

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