मुख्यमंत्री ने दिए आदेश, खासगी ट्रस्ट की बेची गई संपत्ति और अवैध निर्माण की जांच करेगी ईओडब्ल्यू

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ट्रस्ट की देशभर के 26 राज्यों में 246 संपत्ति हैं, जिसमें 138 मंदिर, 18 धर्मशालाएं, 34 घाट, 12 छतरियां, 24 बगीचे एवं कुंड हैं

भोपाल, शिवराज सरकार ने खासगी ट्रस्ट की बेची गई संपत्ति, अवैध निर्माण और संपत्ति खुद-बुर्द करने के आरोपों की जांच ईओडब्ल्यू करेगी। मंगलवार को इस संबंध में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आदेश दे दिए हैं। हाईकोर्ट ने सोमवार को आदेश में कहा था कि खासगी ट्रस्ट ने जितनी भी संपत्तियां बेची हैं, उनके सौदे शून्य करवाकर शासन इन संपत्तियों पर कब्जा लेने का प्रयास करे। इसके साथ ही कोर्ट ने 250 संपत्तियां शासन के अधीन करने का आदेश सुनाया था।
मुख्यमंत्री ने जांच के आदेश देते हुए कहा कि खासगी ट्रस्ट की जो संपत्ति बेची गई हैं, उन पर अवैध निर्माण हुआ है, खुर्दबुर्द के आरोप लगे हैं, इसलिए इसकी जांच ईओडब्ल्यू से कराने का निर्णय लिया गया है। उच्च स्तरीय बैठक में मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, मुख्यमंत्री के पीएस, ओएसडी मकरंद देउसकर, डीजी ईओडब्ल्यू शामिल थे। खासगी ट्रस्ट की देशभर में 26 राज्यों में 246 संपत्ति हैं, जिसमें 138 मंदिर, 18 धर्मशालाएं, 34 घाट, 12 छतरियां, 24 बगीचे और कुंड शामिल हैं। शिवराज ने कहा कि खासगी ट्रस्ट की संपत्ति जिन व्यक्तियों के द्वारा अवैध रूप से बेची गई है, अब उन पर सरकार कार्रवाई करेगी। साथ ही ट्रस्ट की संपत्तियों को वापस लेने का हरसंभव प्रयास सरकार करेगी।

रेवेन्यू के साथ पुलिस की स्पेशल टीम बनेगी
मुख्यमंत्री ने कहा कि खासगी ट्रस्ट की संपत्तियों पर जो निर्माण हुआ है, उन्हें हटाया जाएगा और उसकी मूल स्थिति में पहुंचाया जाएगा। ट्रस्ट की संपत्तियों को वापस लेने के लिए स्पेशल पुलिस स्क्वाड, रिवेन्यू की एक टीम का गठन किया जाए।

यह संपत्ति देश-प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर हैं
खासगी ट्रस्ट को देखभाल के लिए मिली संपत्तियां बेचे जाने के मामले में हाईकोर्ट में दायर की गई शासन की अपील पर सोमवार को विस्तृत आदेश जारी किया था। इसमें हाईकोर्ट ने फैसले में कहा कि ट्रस्ट और ट्रस्टी को 26 राज्यों में 246 संपत्ति केवल देखभाल के लिए मिली थी। इन संपत्तियों को कौडिय़ों के दाम पर बेचा जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। इस काम के लिए ट्रस्ट ने सप्लीमेंट्री डीड बना ली थी जो पूरी तरह गलत थी। इसे भी शून्य घोषित किया जाता है। जस्टिस सतीशचंद्र शर्मा, जस्टिस शैलेंद्र शुक्ला की खंडपीठ ने फैसला दिया है। हाई कोर्ट ने मुख्य सचिव, वित्त विभाग के प्रमुख सचिव, संभागायुक्त व कलेक्टर की कमेटी गठित की है। यह कमेटी संपत्ति खरीदे-बेचे जाने की जांच करेगी। इसमें किसी तरह लापरवाही मिलती है तो आर्थिक अपराध अन्वेषण प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) को पूरा मामला सौंपा जाएगा। वहीं, संभागायुक्त को आदेश दिए हैं कि हरिद्वार में कुशावर्त घाट सहित जितनी भी संपत्ति बेची हैं उन्हें वापस लाने का प्रयास करें। आम जनता वहां पहुंच सके, ऐसी व्यवस्था करें। वहां के एसपी इस काम में संभागायुक्त के सहायक होंगे।

सिंधिया की संपत्तियों की भी हो जांच
प्रदेश कांग्रेस के मीडिया प्रभारी केके मिश्रा ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि ग्वालियर राजघराने द्वारा अपने आधिपत्य के पंजीकृत-अपंजीकृत ट्रस्टों के नाम पर कूटरचित दस्तावेजों के माध्यम व अफसरसाही से सांठगांठ कर अवैध तरीके से हथियाई गई अरबों रूपए की जमीनों, देवस्थलों, समाधियों को खुर्द-बुर्द कर उन्हें अवैध रूप से बेचने, उनमें किये गये अवैध निर्माणों, इनके माध्यम से की जा रही किराया वसूली और अवैध कब्जों को लेकर भी एक उच्च स्तरीय जांच करवाकर उनसे संबद्ध ट्रस्टियों के विरूद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1998 की धारा 13(1)डी., धारा 467,468,471 एवं 420 के तहत एफआईआर दर्ज करायें। संभव हो तो एसीएस मनोज श्रीवास्तव जैसे निष्पक्ष, निडर और भूमि मामलों के विशेषज्ञ अधिकारी को यह जिम्मा सौंपा जायें। मिश्रा ने अपने आरोपों को पुन: दोहराते हुये कहा कि इसमें कोई भी संदेह नहीं है कि सिंधिया राजघराना पूरी तरह अपने राजनैतिक रसूख की वजह से व्यवसायिक होकर प्रदेश के सबसे बड़े भू-माफिया के रूप में अपनी पहचान बना चुका है। मिश्रा ने मुख्यमंत्री से अपनी उस मांग को पुन: दोहराया है कि यदि वे भू-माफिया के खिलाफ कार्यवाही करने के वास्तविक पक्षधर है तो उनके निर्देश पर ही ज्योतिरादित्य सिंधिया के विरूद्ध जमीन घोटालो को लेकर ईओडब्ल्यू में दर्ज जो विभिन्न एफआईआर खत्म कर दी गई थी, उन्हें पुर्नजीवित किया जायें।